What Is China’s Xianglong – चीन ने सुरंग खोदने की दुनिया में एक नई और अनोखी मशीन पेश की है, जिसका नाम शियांगलोंग रखा गया है। यह कोई साधारण TBM नहीं है, बल्कि TBM और ड्रिल-एंड-ब्लास्ट तकनीक का हाइब्रिड है, जिसे चीन दुनिया की पहली “boring and blasting” मशीन बता रहा है….

शियांगलोंग क्या है

शियांगलोंग को वुहान में तैयार किया गया है और इसे सिंघुआ यूनिवर्सिटी तथा चाइना रेलवे ग्रुप की एक यूनिट ने मिलकर विकसित किया है। रिपोर्टों के मुताबिक, यह करीब 70 मीटर लंबी, 4.5 से 4.55 मीटर व्यास वाली और लगभग 400 टन वजनी मशीन है।

इसका मकसद कठिन चट्टानों और जटिल भूगर्भीय इलाकों में सुरंग निर्माण को आसान बनाना है, खासकर वहां जहां पारंपरिक TBM धीमी पड़ जाती है या फंस जाती है।

यह कैसे काम करती है

आमतौर पर सुरंग बनाने के दो तरीके होते हैं: एक TBM, जो चट्टानों को धीरे-धीरे काटती है, और दूसरा ड्रिल-एंड-ब्लास्ट, जिसमें छेद करके विस्फोट से चट्टान तोड़ी जाती है। शियांगलोंग इन दोनों तरीकों को एक ही सिस्टम में जोड़ती है।

रिपोर्टों के अनुसार, जब यह मशीन बेहद कठोर चट्टानों से टकराती है, तो यह जरूरत के मुताबिक ब्लास्टिंग मोड में चली जाती है और फिर मलबा हटाकर आगे बढ़ती है। इसी वजह से इसे “hybrid tunneling solution” कहा जा रहा है।

Also Read – पाक को नहीं पचा, विरोध प्रदर्शन की खबरें कवर करने वाली कई वेबसाइट्स पर लगाई रोक….

कितना फायदा

सरकारी और मीडिया रिपोर्टों का दावा है कि इस मशीन से बेहद कठोर चट्टानों में सुरंग खोदने की क्षमता लगभग 30% तक बढ़ सकती है

यह खास तौर पर उन परियोजनाओं के लिए उपयोगी बताई जा रही है जहां पहाड़ बहुत सख्त हों, दरारें हों या भूगर्भीय स्थिति जटिल हो। चीन इसे रेल, जलविद्युत और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए बड़ी उपलब्धि मान रहा है।

क्यों चर्चा में है

इस मशीन को लेकर दुनिया भर में चर्चा इसलिए है क्योंकि यह TBM और blasting—दोनों को जोड़ने वाला पहला ऐसा सिस्टम होने का दावा करती है। आम तौर पर इन दोनों तकनीकों को अलग-अलग इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन शियांगलोंग उन्हें एक संयुक्त ढांचे में लेकर आई है।

इसके पहले ट्रायल को हेनान प्रांत के एक pumped-storage hydropower project में इस्तेमाल किए जाने की बात कही गई है।

खतरा क्यों माना जा रहा

तकनीकी रूप से यह बड़ी उपलब्धि है, लेकिन सुरक्षा विशेषज्ञों की चिंता भी वाजिब है। जब एक मशीन के भीतर ड्रिलिंग, बिजली और controlled blasting तीनों हों, तो जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।

रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि पहाड़ों के भीतर मीथेन जैसी ज्वलनशील गैसें मिल सकती हैं, और गलत समय पर चिंगारी या तकनीकी खराबी से यह बड़ा हादसा बन सकती है।

चीन इसे क्यों बढ़ा रहा

चीन अपने पहाड़ी, सीमावर्ती और दुर्गम इलाकों में बुलेट ट्रेन, डैम और सुरंगों का बड़ा नेटवर्क बना रहा है। तिब्बत और भारत से सटे हिमालयी क्षेत्रों में निर्माण बेहद कठिन है, इसलिए ऐसी मशीनें उसकी रणनीतिक जरूरत भी हैं।

यानी शियांगलोंग केवल इंजीनियरिंग नवाचार नहीं, बल्कि चीन की तेज़-तर्रार इन्फ्रास्ट्रक्चर और भू-रणनीतिक योजना का हिस्सा भी है।

निष्कर्ष

संक्षेप में, शियांगलोंग एक दुनिया की पहली hybrid tunnel boring and blasting machine है, जो कठिन पहाड़ी चट्टानों में सुरंग बनाने की रफ्तार बढ़ाने के लिए बनाई गई है। यह चीन के लिए तकनीकी चमत्कार मानी जा रही है, लेकिन सुरक्षा के लिहाज से इसे जोखिमभरी मशीन भी कहा जा रहा है।

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *