Major Action By Chandigarh Police – चंडीगढ़ पुलिस का यह मामला दिखाता है कि कैसे एक कथित घोटाले का आरोपी “मेडिकल चेकअप” के बहाने अस्पताल के बजाय होटल पहुंच गया और फिर वहां से पुलिस की ही टीम पकड़ी गई। शुरुआती जांच में ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई, जिसके बाद विभाग ने तुरंत कार्रवाई की….
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क्या हुआ था
रिपोर्टों के मुताबिक, 661 करोड़ रुपये के कथित बैंक/फंड घोटाले के आरोपी विक्रम वधवा को बुडैल जेल से मेडिकल जांच के लिए बाहर लाया गया था। नियमों के अनुसार उसे जीएमएसएच-16 अस्पताल ले जाना था, लेकिन रास्ता बदलकर वह सेक्टर-17 के एक होटल में पहुंचा दिया गया।
होटल पहुंचने के बाद वह काफी देर तक रुका रहा और उसके साथ परिवार के लोग भी मौजूद थे। सूचना मिलने पर पुलिस की टीम ने होटल में छापेमारी की और उसे मौके से पकड़ लिया।
किस-किस पर कार्रवाई
इस मामले में चंडीगढ़ पुलिस ने एसआई जगमेहर, एएसआई सुरेश/सुरेंद्र, विक्रम वधवा के बेटे और दो अन्य लोगों सहित कुल पांच लोगों को गिरफ्तार किया है।
पुलिस का मानना है कि यह पूरी घटना बिना अंदरूनी मिलीभगत के संभव नहीं थी। इसलिए अब यह जांच की जा रही है कि किसने होटल जाने की योजना बनाई, किसने अनुमति दी, और ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों की भूमिका क्या थी।
होटल तक कैसे पहुंचा
रिपोर्टों में कहा गया है कि वधवा को दो पुलिसकर्मियों की निगरानी में जेल से अस्पताल ले जाया जाना था, लेकिन वे उसे सरकारी वाहन से वापस ले जाने के बजाय निजी कार में सेक्टर-17 के होटल ले गए।
कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि आरोपी होटल के कमरे में आराम कर रहा था और उसके बेटे भी वहां मौजूद थे। इसी दौरान पुलिस को सूचना मिली और तुरंत रेड की गई।
आरोपी कौन है
विक्रम वधवा चंडीगढ़-आधारित रियल एस्टेट डेवलपर और होटल कारोबारी हैं। वे IDFC First Bank और सरकारी खातों से जुड़े कथित बड़े वित्तीय घोटाले के प्रमुख आरोपियों में शामिल बताए जाते हैं।
उन पर हरियाणा सरकार, चंडीगढ़ नगर निगम, CREST और Smart City जैसे खातों से पैसे निकालने और उसे रियल एस्टेट निवेशों में लगाने के आरोप हैं।
जांच किस दिशा में
पुलिस अब यह देख रही है कि क्या आरोपी को जानबूझकर भगाने की योजना थी या सिर्फ होटल में “आराम” कराने की कोशिश। कुछ रिपोर्टों में तो यह भी कहा गया है कि होटल में उसके साथ खाना-पीना और मुलाकात का माहौल बनाया गया था।
दूसरी तरफ, पुलिसकर्मियों की भूमिका पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और बीएनएस की धाराओं के तहत केस दर्ज हुआ है। इससे साफ है कि मामला केवल जेल से बाहर निकलने का नहीं, बल्कि आधिकारिक पद के दुरुपयोग का भी है।
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क्यों बड़ा है यह मामला
यह घटना इसलिए गंभीर है क्योंकि इसमें एक विचाराधीन आरोपी को सुरक्षा-प्रक्रिया के दौरान कथित तौर पर विशेष सुविधा दी गई। जेल से अस्पताल जाने की अनुमति को होटल-स्टे में बदल देना न सिर्फ नियमों का उल्लंघन है, बल्कि व्यवस्था पर भरोसे को भी चोट पहुंचाता है।
पुलिस विभाग के लिए यह जांच अब प्रतिष्ठा का सवाल बन गई है। अगर अंदरूनी मिलीभगत साबित होती है, तो और भी अफसरों या कर्मियों पर गाज गिर सकती है।
आगे क्या
फिलहाल सभी गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है। वरिष्ठ अधिकारियों ने रिपोर्ट तलब कर ली है और यह पता लगाया जा रहा है कि होटल ले जाने के पीछे किसका दिमाग था और क्या इससे फरार होने की योजना जुड़ी थी।
संक्षेप में, यह मामला एक होटल स्टे भर नहीं, बल्कि जेल, पुलिस, नियम और कथित घोटाले—चारों के बीच बने खतरनाक गठजोड़ की कहानी बन गया है।

