Uddhav Thackeray At Jantar Mantar – शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे मंगलवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंचे और CJP के आंदोलन को खुलकर समर्थन दिया। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक इस्तीफे का मामला नहीं है, बल्कि जब तक सरकार नहीं बदलेगी, तब तक युवाओं की हालत नहीं बदलेगी….
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ठाकरे ने क्या कहा?
उद्धव ठाकरे ने मंच से कहा कि “ये चिंगारी हम बुझने नहीं देंगे” और युवाओं को देश का भविष्य बताया। उनके अनुसार, जिस सरकार पर जवाबदेही नहीं है, उसके खिलाफ लड़ाई अब और तेज होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि युवाओं पर लाठी चलाने वाली सत्ता को समझना होगा कि यह सिर्फ प्रदर्शन नहीं, भविष्य की लड़ाई है।
ठाकरे ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन में युवाओं की भूमिका ऐतिहासिक रही है और आज भी उनके अधिकारों की रक्षा जरूरी है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि “मजहब की दीवार” तोड़कर देश को एक भाव से जोड़ना होगा।
एक इस्तीफे से काम नहीं चलेगा
उनका सबसे सख्त बयान यह था कि केवल एक इस्तीफे से बात नहीं बनेगी। ठाकरे के मुताबिक, जब तक व्यवस्था और सरकार नहीं बदलती, तब तक छात्रों और युवाओं के साथ अन्याय खत्म नहीं होगा।
यह बयान CJP के उस आंदोलन के समर्थन में आया है, जो NEET और अन्य परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों, पारदर्शिता की कमी और युवाओं के भविष्य से जुड़े सवालों पर केंद्रित है।
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आंदोलन को राजनीतिक समर्थन
रिपोर्टों के मुताबिक, ठाकरे पहले भी इस आंदोलन को समर्थन दे चुके हैं और उन्होंने अन्य विपक्षी दलों से भी दलगत राजनीति से ऊपर उठकर साथ आने की अपील की थी। उन्होंने राहुल गांधी से भी इस छात्र आंदोलन में शामिल होने की बात कही थी।
मंगलवार को जंतर-मंतर पर उनकी मौजूदगी ने आंदोलन को नया राजनीतिक वजन दिया। मौके पर प्रदर्शनकारियों में भी उत्साह देखा गया और विपक्षी एकजुटता का संदेश गया।
छात्रों के भविष्य पर हमला
ठाकरे ने रविवार को मुंबई में भी केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा था कि जो सरकार जवाबदेह नहीं है, उसे बदलने की लड़ाई शुरू होनी चाहिए। उन्होंने NEET में कथित अनियमितताओं और इससे जुड़ी छात्र आत्महत्याओं का जिक्र करते हुए सरकार पर युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ का आरोप लगाया था।
उनकी यह लाइन राजनीतिक रूप से भी अहम है, क्योंकि इससे मुद्दा सिर्फ परीक्षा अनियमितताओं तक सीमित नहीं रहता, बल्कि शासन की जवाबदेही पर सवाल बन जाता है।
विपक्ष की साझा लाइन
इस आंदोलन में उद्धव ठाकरे के अलावा शरद पवार और अरविंद केजरीवाल जैसे नेताओं की मौजूदगी ने भी विपक्षी एकजुटता को दिखाया। रिपोर्टों के अनुसार, इन नेताओं ने पुलिस कार्रवाई की आलोचना की और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली की मांग करने वालों के समर्थन की बात कही।
इससे साफ है कि CJP का मुद्दा अब केवल छात्र आंदोलन नहीं रहा, बल्कि केंद्र सरकार के खिलाफ विपक्षी नैरेटिव का हिस्सा बन गया है।
क्यों अहम है यह बयान
उद्धव ठाकरे का “एक इस्तीफे से काम नहीं चलेगा” वाला बयान सरकार पर सीधा राजनीतिक हमला है। यह संकेत देता है कि विपक्ष अब इस मामले को प्रतीकात्मक विरोध से आगे ले जाकर बड़े बदलाव की मांग के रूप में पेश कर रहा है।
उनके शब्दों ने आंदोलन को भावनात्मक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर मजबूती दी है। अब यह बहस सिर्फ प्रदर्शन की नहीं, बल्कि जवाबदेही, युवाओं के भविष्य और शासन की दिशा की भी है।

