3000 Protesters Detained – AAP सांसद संजय सिंह ने दावा किया था कि संसद मार्च के दौरान करीब 3000 प्रदर्शनकारियों को दिल्ली पुलिस ने देर रात तक हिरासत में रखा। लेकिन दिल्ली पुलिस ने इस दावे को झूठा और भ्रामक बताते हुए साफ कहा कि ऐसी कोई घटना नहीं हुई…
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पुलिस ने क्या कहा?
दिल्ली पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान बार-बार चेतावनी और कानूनी निर्देश दिए गए थे, लेकिन प्रदर्शनकारी निषेधाज्ञा का उल्लंघन करते हुए आगे बढ़ते रहे। पुलिस का कहना है कि भीड़ ने पुलिस बैरिकेड तोड़ने की कोशिश की, पथराव किया, सरकारी वाहनों और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया, इसलिए कार्रवाई करनी पड़ी।[
पुलिस ने यह भी कहा कि जिन लोगों को हिरासत में लिया गया, उनकी पहचान और व्यक्तिगत विवरण की जांच की जा रही है। एक रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि पुलिस ने साफ किया है कि हिरासत में लिए गए लोग छात्र नहीं हैं।
संजय सिंह का आरोप क्या था?
संजय सिंह ने एक्स पर लिखा था कि CJP प्रोटेस्ट के दौरान दिल्ली पुलिस ने करीब 3000 छात्र-छात्राओं, युवाओं और महिलाओं पर लाठीचार्ज किया और फिर उन्हें सोमवार दोपहर 2 बजे से देर रात तक विभिन्न थानों और स्टेडियमों में रखा गया। उन्होंने इसे संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन बताया और सभी युवाओं को तत्काल रिहा करने की मांग की।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधते हुए पूछा था कि क्या छात्राओं और महिलाओं को पुलिस स्टेशनों और स्टेडियम में रखना कानून का मखौल नहीं है।
दिल्ली पुलिस की दलील क्यों अलग है?
दिल्ली पुलिस का कहना है कि संजय सिंह के आरोप फर्जी हैं और उनकी ओर से बताई गई संख्या व परिस्थितियां सही नहीं हैं। पुलिस के मुताबिक, मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों ने आक्रामक रुख अपनाया, पथराव किया और अन्य वस्तुओं से ह���ला किया, जिससे कई पुलिसकर्मी घायल हुए।
रिपोर्टों के अनुसार, झड़पों में स्पेशल कमिश्नर, जॉइंट कमिश्नर, एडिशनल कमिश्नर, डीसीपी और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों सहित कई पुलिसकर्मी घायल हुए, और महिला पुलिसकर्मी भी चोटिल हुईं।
घटना की पृष्ठभूमि क्या थी?
यह पूरा घटनाक्रम CJP के संसद मार्च से जुड़ा है, जहां प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर से संसद की ओर बढ़ रहे थे। पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया, क्योंकि संसद के पास मार्च की अनुमति नहीं थी और इलाके में धारा 163 लागू बताई गई।
कुछ रिपोर्टों में यह भी बताया गया कि प्रदर्शनकारी संसद की ओर बैरिकेड तोड़कर आगे बढ़ने लगे थे, जिसके बाद सुरक्षा बलों ने सख्ती दिखाई।
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संख्या को लेकर भ्रम क्यों बना?
3000 का आंकड़ा दो अलग चीजों के लिए इस्तेमाल हो रहा था—एक तरफ प्रदर्शन में जुटी भीड़ के आकार के लिए, और दूसरी तरफ संजय सिंह के हिरासत संबंधी दावे के लिए। रिपोर्टों में यह भी बताया गया कि संसद मार्च में 3000 से अधिक प्रदर्शनकारी जुटे थे, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि इतने लोगों को हिरासत में लिया गया।
यही वजह है कि सोशल मीडिया पर भीड़ की संख्या और हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या को लेकर भ्रम पैदा हुआ। पुलिस ने इसी भ्रम को दूर करते हुए दावे को गलत बताया।
राजनीतिक प्रतिक्रिया क्यों तेज हुई?
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने पुलिस कार्रवाई को युवाओं की आवाज दबाने की कोशिश बताया, जबकि सरकार समर्थक और पुलिस पक्ष इसे कानून-व्यवस्था बनाए रखने की मजबूरी कह रहे हैं। इस तरह मामला सिर्फ प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक टकराव में बदल गया।
संजय सिंह के बयान के बाद विवाद इसलिए भी बढ़ा क्योंकि इसमें छात्राओं और महिलाओं को देर रात तक रोके जाने जैसे गंभीर आरोप शामिल थे। पुलिस के खंडन ने अब इस बहस को और तेज कर दिया है।
अभी क्या साफ है?
अभी तक उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह साफ है कि 3000 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने का दावा दिल्ली पुलिस ने खारिज किया है। पुलिस ने कहा है कि प्रदर्शन के दौरान हिंसा, पथराव और संपत्ति नुकसान हुआ था, इसलिए कार्रवाई करनी पड़ी।
मामले में सबसे अहम बात यह है कि हिरासत की वास्तविक संख्या, यदि कोई हुई हो, उसे लेकर आधिकारिक और विश्वसनीय आंकड़े ही अंतिम माने जाएंगे। फिलहाल पुलिस का रुख संजय सिंह के आरोपों के बिल्कुल विपरीत है।
