Congress Protest : दिल्ली पुलिस को CRPF की जेड प्लस सुरक्षा से क्यों जूझना पड़ा? राहुल की हिरासत पर कैसा संघर्ष….
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हिरासत के दौरान क्या हुआ
रिपोर्ट के मुताबिक, प्रधानमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन के बाद राहुल गांधी को हिरासत में लिया गया। उस वक्त उन्हें पुलिस वैन तक ले जाने से लेकर मॉडल टाउन थाने तक पहुंचाने तक CRPF कमांडो उनके साथ रहे, ताकि सुरक्षा प्राप्त व्यक्ति को कोई शारीरिक नुकसान न पहुंचे।
बताया गया कि राहुल गांधी जमीन पर लेट गए थे इसलिए पुलिस को उन्हें उठाकर वैन में बैठाने में और दिक्कत हुई। CRPF कर्मी लगातार यह सुनिश्चित कर रहे थे कि पुलिस की कार्रवाई के दौरान धक्का-मुक्की या चोट की स्थिति न बने।
जेड प्लस सुरक्षा का मतलब
राहुल गांधी को CRPF की जेड प्लस सुरक्षा मिली हुई है, जो बहुत ऊंचे खतरे वाले व्यक्तियों को दी जाती है। इसमें हथियारबंद कमांडो, सुरक्षा प्रोटोकॉल, मूवमेंट की निगरानी और कई स्तर की सुरक्षा शामिल होती है।
2019 में गांधी परिवार से SPG सुरक्षा वापस लिए जाने के बाद CRPF को उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी दी गई थी। तब से राहुल गांधी को Z-plus ASL सुरक्षा के तहत संरक्षण मिल रहा है।
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पुलिस को क्यों संघर्ष करना पड़ा
जब किसी ऐसे व्यक्ति को हिरासत में लिया जाता है जिसकी सुरक्षा CRPF के पास हो, तो स्थानीय पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बल के बीच समन्वय जरूरी हो जाता है। इसी वजह से पुलिस को राहुल गांधी को संभालने, वैन तक ले जाने और थाने में बैठाने के दौरान अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ी।
सुरक्षा कर्मियों की प्राथमिकता यह रहती है कि गिरफ्तारी या हिरासत के दौरान व्यक्ति को कोई नुकसान न हो। इसलिए वे पुलिस की कार्रवाई के साथ-साथ सुरक्षा घेरे को भी बनाए रखते हैं।
थाने में भी साथ रहे कमांडो
रिपोर्ट के अनुसार, राहुल गांधी को थाने ले जाने के बाद भी CRPF कमांडो उनके साथ रहे। जहां उन्हें बैठाया गया, वहां भी सुरक्षा कर्मी मौजूद थे और पूरी प्रक्रिया पर नजर रखे हुए थे।
यह सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है, क्योंकि जेड प्लस सुरक्षा में संरक्षित व्यक्ति को हिरासत में लेने के बाद भी उसका सुरक्षा घेरा तुरंत खत्म नहीं होता।
SPG से Z-plus तक का बदलाव
गांधी परिवार की सुरक्षा पहले SPG के पास थी, लेकिन 2019 में केंद्र सरकार ने SPG सुरक्षा वापस लेकर CRPF के हवाले कर दी। इसके बाद उन्हें Z-plus सुरक्षा, ASL और अन्य सुरक्षा प्रावधान दिए गए।
इसी बदलाव के तहत उनके लिए बुलेटप्रूफ वाहन भी उपलब्ध कराए गए थे। CRPF के पास उस समय पर्याप्त बख्तरबंद वाहन नहीं थे, इसलिए SPG वाले वाहन कुछ समय तक इस्तेमाल किए गए।
निष्कर्ष
असल वजह यह थी कि राहुल गांधी सिर्फ एक राजनेता नहीं, बल्कि CRPF की उच्च स्तरीय सुरक्षा वाले Protected Person हैं। इसलिए दिल्ली पुलिस को हिरासत के दौरान सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करते हुए बेहद सावधानी बरतनी पड़ी।

