14 साल के लड़के का मर्डर – उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से एक ऐसी खौफनाक वारदात सामने आई है जिसने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है।
यहां एक महिला ने महज चंद रुपयों की खातिर अपनी सबसे करीबी सहेली के 14 साल के बेटे का अपहरण कर उसकी निर्मम हत्या कर दी। इस घटना ने सवाल खड़े कर दिए हैं — क्या अब विश्वास करने लायक कोई रिश्ता बचा है?
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पूरी घटना — क्या हुआ था उस दिन?
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जनपद के थाना सिटी कोतवाली क्षेत्र में यह वारदात हुई।
14 साल के अंशुमन की हत्या के मामले में पुलिस ने आरोपी महिला पूजा को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी। इस वारदात का खुलासा सीसीटीवी फुटेज के जरिए हुआ।
अंशुमन के घर न लौटने पर परिजनों ने अनहोनी की आशंका जताते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने जब इलाके के सीसीटीवी फुटेज खंगाले, तो पूजा उसे अपनी स्कूटी पर ले जाती हुई कैद मिली।
15 साल की दोस्ती — और फिर खून का खेल
पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी पूजा और मृतक की मां ज्योति के बीच लगभग 15 साल पुरानी दोस्ती थी। दोनों परिवारों के बीच लंबे समय से घनिष्ठ संबंध थे और एक-दूसरे के घर आना-जाना भी था। लेकिन पिछले कुछ महीनों से पैसों के लेन-देन और आपसी विवाद के चलते रिश्तों में खटास आ गई थी। इसी रंजिश के चलते आरोपी महिला ने कथित तौर पर बदला लेने की योजना बनाई।
CCTV ने खोला राज — पूजा ने कबूल किया जुर्म
पुलिस पूछताछ के दौरान शुरुआत में पूजा ने लगातार अपने बयान बदलकर पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की, लेकिन जब उसके सामने सीसीटीवी फुटेज रखे गए तो वह टूट गई और उसने पूरी सच्चाई उगल दी।
पूछताछ के दौरान पुलिस टीम ने उसे थानाभवन, देवबंद, सरसावा और बड़गांव सहित कई स्थानों पर ले जाकर पूछताछ की, जिसके बाद उसने अंबाला रोड स्थित पूर्वी यमुना नहर का संकेत दिया।
उसने कबूल किया कि उसने अंशुमन को अंबाला रोड स्थित पूर्वी यमुना नदी में फेंक दिया था।
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42 घंटे की तलाश — नहर से मिला शव
करीब 42 घंटे की तलाश के बाद किशोर का शव अंबाला रोड स्थित पूर्वी यमुना नहर से बरामद किया गया।
कड़ाई से पूछताछ करने पर पूजा टूट गई और अपना जुर्म कबूल कर लिया। रविवार सुबह गोताखोरों और पुलिस की टीम ने 14 घंटे के लंबे सर्च ऑपरेशन के बाद बच्चे का शव बरामद किया।
परिजनों का आरोप है कि आरोपी ने बच्चे को पहले प्रताड़ित किया और फिर उसे नदी में डुबो-डुबोकर मार डाला।
पुलिस की कार्रवाई
एसएसपी दिनेश कुमार सिंह ने बताया कि आरोपी महिला के खिलाफ हत्या और साक्ष्य छिपाने की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उसे जेल भेज दिया गया है।
अंशुमन के शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है, जिसकी रिपोर्ट आने के बाद ही घटना के कारणों का पूरी तरह खुलासा हो सकेगा।
परिवार और इलाके में आक्रोश
इस घटना के बाद परिवार में मातम पसरा हुआ है और पूरे इलाके में आक्रोश है। परिजन आरोपी के लिए कड़ी सजा, यहां तक कि फांसी की मांग कर रहे हैं।
यह अकेला मामला नहीं — UP में बच्चों पर हमलों की बढ़ती घटनाएं
सहारनपुर की यह घटना UP में बच्चों के खिलाफ अपराध की बढ़ती श्रृंखला का हिस्सा है।
अमरोहा — ऑनर किलिंग का दर्द: 26 अप्रैल 2026 को अमरोहा में 14 साल की आफरीन को उसकी अपनी मां और नाबालिग भाई ने इसलिए मार डाला क्योंकि वह पड़ोस के लड़के जैद से प्यार करती थी। मां नाजो को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। आफरीन का नाबालिग भाई बाल सुधार गृह भेजा गया।
अंबेडकरनगर — पांच साल की बेबसी: अंबेडकरनगर में एक मां गासिया खातून ने अपने चार बच्चों की हत्या कर दी। पति सऊदी अरब में था और उसने दूसरी शादी कर ली थी। मानसिक तनाव में टूटी मां ने अपने ही बच्चों की जान ले ली।
समाज के लिए सबक — क्या बदलना होगा?
यह घटना सिर्फ एक अपराध की कहानी नहीं है। यह कई गंभीर सवाल उठाती है:
पहला सवाल — पैसों का विवाद और रिश्तों की मौत: 15 साल की दोस्ती पैसों के लेन-देन के विवाद में खत्म हो गई — और एक मासूम की जान चली गई। क्या हम अपने वित्तीय विवादों को कानूनी रास्ते से नहीं सुलझा सकते?
दूसरा सवाल — बच्चों की सुरक्षा: अंशुमन को अपनी मां की सबसे करीबी सहेली पर भरोसा था। वह बेझिझक उनके साथ चला गया। माता-पिता को बच्चों को यह जरूर सिखाना चाहिए कि किस पर और कितना भरोसा करना है।
तीसरा सवाल — CCTV की भूमिका: इस केस में CCTV ने न्याय की राह आसान की। अगर CCTV नहीं होता तो शायद आरोपी बच निकलती। सार्वजनिक स्थानों पर CCTV कितना जरूरी है, यह इस घटना ने साबित किया।
निष्कर्ष
इस घटना के बाद परिवार पूरी तरह टूट चुका है और इलाके में भारी आक्रोश फैल गया है। लोग आरोपी के लिए कड़ी से कड़ी सजा, यहां तक कि फांसी की मांग कर रहे हैं।
14 साल का अंशुमन अब इस दुनिया में नहीं है। उसकी मां ज्योति के लिए यह दर्द शायद कभी कम न हो — क्योंकि उसकी सबसे पुरानी दोस्त ने ही उसके जिगर के टुकड़े को छीन लिया। यह घटना याद दिलाती है कि अपराध के पीछे हमेशा कोई बड़ा कारण नहीं होता — कभी-कभी छोटी-सी रंजिश भी एक मासूम की जान ले लेती है।
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