थलपति विजय की पार्टी TVK – तमिलनाडु की राजनीति में थलपति विजय की पार्टी TVK अब सिर्फ मौजूदगी दर्ज कराने की नहीं, बल्कि विधानसभा में अपनी ताकत खुद के दम पर मजबूत करने की रणनीति पर काम करती दिख रही है। ताजा दलबदल, इस्तीफे और उपचुनावी समीकरणों के जरिए पार्टी ऐसा बहुमत बनाना चाहती है, जिससे वह गठबंधन सहयोगियों पर कम निर्भर रहे…
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क्या चल रहा है राजनीतिक खेल
चेन्नई में AIADMK के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री एमआर विजयभास्कर ने करूर से विधायक पद से इस्तीफा दे दिया है। माना जा रहा है कि वे जल्द ही विजय की पार्टी TVK में शामिल हो सकते हैं। इससे AIADMK की संख्या घटकर 41 रह जाएगी। यह घटनाक्रम उस समय हुआ है जब MDMK ने DMK के नेतृत्व वाले सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस से 9 साल बाद नाता तोड़ा है।
इन बदलावों ने तमिलनाडु विधानसभा के गणित को फिर से दिलचस्प बना दिया है। 234 सीटों वाली विधानसभा में जिन सीटों पर इस्तीफों की वजह से रिक्तियां बनी हैं, उन पर उपचुनाव की संभावना बढ़ गई है। TVK इन्हीं रिक्तियों को अपने लिए अवसर की तरह देख रही है।
बहुमत का गणित कैसे बन रहा है
अभी TVK की अपनी संख्या 107 बताई जा रही है, जो बहुमत के आंकड़े से बस थोड़ी कम है। अगर पार्टी उपचुनावों में खाली हुई सभी सीटें जीत लेती है, तो उसकी संख्या बढ़कर 114 हो जाएगी। यही वह आंकड़ा है जो उसे विधानसभा में बहुत मजबूत स्थिति दे सकता है।
विधानसभा की मौजूदा संख्या रिक्तियों के कारण घटकर 227 हो गई है, और इसी के साथ बहुमत का आंकड़ा भी बदल गया है। यही वजह है कि हर इस्तीफा और हर उपचुनाव अब TVK के लिए रणनीतिक महत्व रखता है।
विजय क्यों चाहते हैं मजबूत संख्या बल
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विजय गठबंधन सहयोगियों पर अपनी निर्भरता कम करना चाहते हैं। अभी उनकी सरकार या राजनीतिक ताकत कई छोटे सहयोगियों के समर्थन पर टिकी है। अगर आने वाले समय में कोई सहयोगी असहयोग करता है या समर्थन वापस लेता है, तो सरकार पर असर पड़ सकता है।
इसी जोखिम को देखते हुए TVK विधानसभा में ज्यादा मजबूत स्थिति बनाना चाहती है। पार्टी चाहती है कि भविष्य में अगर राजनीतिक समीकरण बदलें, तो वह अकेले दम पर ज्यादा सुरक्षित रहे। यह रणनीति सिर्फ सत्ता में बने रहने की नहीं, बल्कि लंबे समय तक नियंत्रण बनाए रखने की भी है।
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गठबंधन सहयोगियों की भूमिका
अभी TVK को कांग्रेस, VCK, IUML और वामपंथी दलों जैसे सहयोगियों का समर्थन हासिल है। इससे पार्टी को फ्लोर टेस्ट और विधानसभा की राजनीति में राहत मिली है। लेकिन समर्थन देने वाले ये दल कई मुद्दों पर अपनी अलग राय भी रखते हैं।
सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट जैसे कुछ सरकारी फैसलों पर गठबंधन सहयोगियों की असहमति पहले ही दिख चुकी है। ऐसे में TVK के लिए यह समझना जरूरी है कि समर्थन स्थायी नहीं होता। अगर किसी बड़े मुद्दे पर मतभेद बढ़े, तो सहयोगी दल दूरी बना सकते हैं।
दलबदल और इस्तीफों का असर
इससे पहले AIADMK के कुछ विधायक इस्तीफा देकर TVK में शामिल हो चुके हैं। इनमें के. मरागाथम कुमारवेल, पी. सत्यभामा, एस. जयकुमार और एसाक्की सुब्बैया जैसे नाम शामिल हैं। इससे AIADMK की ताकत कम हुई और TVK को राजनीतिक फायदा मिला।
AIADMK खेमे में यह आरोप भी लगा कि यह सब हॉर्स-ट्रेडिंग का हिस्सा है। पार्टी नेतृत्व ने स्पीकर के सामने एंटी-डिफेक्शन नियमों के तहत अर्जी भी दी है। यानी यह लड़ाई सिर्फ संख्या की नहीं, बल्कि राजनीतिक नैतिकता और कानूनी वैधता की भी है।
विजय की रणनीति क्या कहती है
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि विजय अपनी पार्टी को किसी बाहरी सहारे पर निर्भर नहीं रखना चाहते। इसलिए वे बहुत सोच-समझकर नियुक्तियां कर रहे हैं और अपने करीबी लोगों को ही जिम्मेदारी दे रहे हैं। इससे पार्टी का नियंत्रण भी मजबूत रहता है और किसी बाहरी पार्टी के प्रभाव की संभावना कम होती है।
अरुण कुमार जैसे विश्लेषकों का मानना है कि अगर TVK कोई ऐसा रुख लेती है जिससे BJP समर्थक नीति सामने आती है, तो VCK और वामपंथी दल दूरी बना सकते हैं। विजय भी यह समझते हैं, इसलिए वे संतुलन बनाकर चलना चाहते हैं।
विपक्ष की नजर भी टिकी है
दूसरी तरफ विपक्ष भी TVK पर नजर रखे हुए है। कानून-व्यवस्था, उद्योगों और शासन की दिशा को लेकर पार्टी पर हमला करने की तैयारी हो रही है। राजनीतिक विश्लेषक सुनील कुमार के मुताबिक, विजय किसी की दया पर निर्भर रहना नहीं चाहते। वे चाहते हैं कि पार्टी अपनी पहचान के दम पर बहुमत के करीब पहुंचे।
यानी यह पूरी लड़ाई सिर्फ सरकार बनाने या बचाने की नहीं है, बल्कि यह तय करने की भी है कि तमिलनाडु की राजनीति में असली ताकत किसके पास रहेगी—गठबंधन के पास या TVK के अपने दम पर।
निष्कर्ष
थलपति विजय और उनकी पार्टी TVK अब विधानसभा में सिर्फ सहयोगियों के सहारे नहीं रहना चाहती। दलबदल, इस्तीफे और उपचुनावों के जरिए पार्टी ऐसी स्थिति बनाना चाहती है, जहां वह आगे किसी पर निर्भर न रहे। अगर यह रणनीति सफल होती है, तो TVK तमिलनाडु में एक मजबूत और आत्मनिर्भर राजनीतिक ताकत बनकर उभर सकती है।
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