Rs 4000 Cr for Auto Sector – ऑटो सेक्टर के लिए सरकार का 4,000 करोड़ रुपये का यह प्लान साफ दिखाता है कि Auto-PLI अब शुरुआती निवेश वाले चरण से निकलकर वास्तविक भुगतान वाले चरण में पहुंच गया है। कंपनियों की उत्पादन क्षमता बढ़ने और इंक्रीमेंटल सेल्स सामने आने के साथ FY27 में इंसेंटिव डिस्बर्समेंट तेज होने की उम्मीद है…
Contents
क्या है पूरा प्लान
सरकार का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026-27 में ऑटोमोबाइल और ऑटो पार्ट्स के लिए प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम के तहत लगभग 4,000 करोड़ रुपये बांटे जाएंगे। ये भुगतान उन कंपनियों को मिलेगा जिन्होंने तय शर्तों के मुताबिक अतिरिक्त बिक्री, निवेश और डोमेस्टिक वैल्यू एडिशन के लक्ष्य पूरे किए हैं।
यह योजना सितंबर 2021 में 25,938 करोड़ रुपये के कुल बजट आवंटन के साथ शुरू की गई थी। अब शुरुआती कैपेक्स और प्लांट सेटअप के बाद कंपनियों से कमर्शियल प्रोडक्शन मिलने लगा है, इसलिए भुगतान तेजी से बढ़ रहा है।
क्यों बढ़ रहा है भुगतान
Auto-PLI का मकसद केवल निवेश खींचना नहीं था, बल्कि भारत में एडवांस्ड ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी, EV पार्ट्स और लोकल कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ाना भी था। अब जब कई कंपनियां उत्पादन के स्तर पर पहुंच गई हैं, तो सरकार को इंसेंटिव क्लेम्स का बड़ा हिस्सा चुकाना पड़ रहा है।
रिपोर्टों में कहा गया है कि लाभार्थी कंपनियों ने अब तक 32,879 करोड़ रुपये की बिक्री हासिल की है। यही बिक्री अब इंसेंटिव भुगतान को ऊपर ले जा रही है।
Also Read – What Is China’s Xianglong – चीन ने पहाड़ पर खड़ी की दुनिया की पहली राक्षसी मशीन….
बजाज ऑटो को फायदा
सबसे पहले इंसेंटिव पाने वाली कंपनियों में बजाज ऑटो का नाम आया है। रिपोर्टों के मुताबिक, कंपनी को इस वित्त वर्ष में लगभग 750 करोड़ रुपये मिल चुके हैं, जो लगभग 6,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त बिक्री से जुड़े हैं।
बजाज ऑटो ने पहले ही बताया था कि उसे Auto-PLI के तहत 13 वाहनों के लिए मंजूरी मिली है। इनमें दो-पहिया और तीन-पहिया दोनों सेगमेंट शामिल हैं।
बजट में बड़ा प्रावधान
वित्त वर्ष 2027 के बजट में इस योजना के लिए 5,939.87 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो पिछले वित्त वर्ष के 2,091.26 करोड़ रुपये से लगभग तीन गुना ज्यादा है।
इस बढ़ोतरी से साफ है कि सरकार इस स्कीम को केवल कागजी प्रोत्साहन नहीं, बल्कि ऑटो इंडस्ट्री की उत्पादन-श्रृंखला को बदलने वाला टूल मान रही है।
किसे फायदा होगा
इस योजना का सबसे बड़ा फायदा उन कंपनियों को होगा जो EVs, एडवांस्ड कंपोनेंट्स, बैटरी-संबंधित पार्ट्स, और हाई-टेक ऑटो पार्ट्स बनाती हैं। यह योजना घरेलू निर्माण को मजबूत करने के साथ-साथ आयात पर निर्भरता भी घटाती है।
सरकार के मुताबिक, Auto-PLI से मेक इन इंडिया और ग्लोबल वैल्यू चेन में भारत की हिस्सेदारी दोनों को बल मिलता है।
आम ग्राहकों पर असर
सीधे-सीधे ग्राहक को कैश में फायदा नहीं मिलेगा, लेकिन लंबे समय में यह योजना EV और ऑटो कंपोनेंट्स की लोकल सप्लाई बढ़ा सकती है। इससे उत्पादन लागत घट सकती है और नए मॉडल भारतीय बाजार के लिए ज्यादा किफायती हो सकते हैं।
साथ ही, घरेलू मैन्युफैक्चरिंग मजबूत होने से सप्लाई चेन कम जोखिम वाली होगी और कंपनियों को भारत में नए निवेश का भरोसा मिलेगा।
सरकार क्या संदेश दे रही है
Auto-PLI के जरिए सरकार यह संदेश दे रही है कि वह सिर्फ EV अपनाने की बात नहीं कर रही, बल्कि उसके लिए उत्पादन-आधार भी तैयार कर रही है। यह उन नीतियों में से है जो शुरुआत में खर्च जैसी लगती हैं, लेकिन बाद में उद्योग के विस्तार और नौकरियों के रूप में वापसी देती हैं। यानी यह सिर्फ सब्सिडी नहीं, बल्कि एक रणनीतिक औद्योगिक नीति है।
निष्कर्ष
संक्षेप में, ऑटो सेक्टर की “बल्ले-बल्ले” इसलिए कही जा रही है क्योंकि Auto-PLI स्कीम अब तेज रफ्तार से भुगतान चरण में प्रवेश कर चुकी है और FY27 में इसका डिस्बर्समेंट 4,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। बजाज ऑटो जैसे बड़े खिलाड़ियों को फायदा मिलना शुरू हो गया है और आने वाले समय में बाकी योग्य कंपनियां भी भुगतान की कतार में होंगी।

