Raghav On Anti-Paper Leak Bill – राज्यसभा में एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान राघव चड्ढा ने साफ कहा कि छात्रों का आंदोलन किसी “फ्लॉप पार्टी के कमबैक” का मंच नहीं है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि NEET पेपर लीक और छात्रों का गुस्सा सिर्फ छात्रों के लिए है, न कि किसी राजनीतिक दल के प्रचार-प्रसार के लिए…
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राघव ने क्या कहा
राघव चड्ढा ने अपने भाषण की शुरुआत में ही बताया कि वे अब तक चुप क्यों थे। उनके मुताबिक, जब वे विपक्ष में थे तब सवाल उठाना उनकी जिम्मेदारी थी, लेकिन अब सत्ता पक्ष में होने के कारण उनका काम केवल आलोचना करना नहीं, बल्कि समाधान देना है।
उन्होंने कहा कि वे “कैमरों के सामने बयान” देने के बजाय एक स्थायी समाधान का इंतजार कर रहे थे। अब जबकि सरकार एंटी-पेपर लीक बिल लेकर आई है, वे उसी समाधान की बात कर रहे हैं।
AAP पर निशाना
राघव चड्ढा के बयान का सबसे बड़ा राजनीतिक मतलब आम आदमी पार्टी पर कटाक्ष था। उन्होंने इशारा किया कि छात्र आंदोलन के दौरान ग्राउंड पर मौजूद रहकर कोई दल खुद को फिर से प्रासंगिक दिखाने की कोशिश न करे।
उनकी यह टिप्पणी साफ बताती है कि वे नहीं चाहते कि छात्रों के दर्द और परीक्षा विवाद को कोई पार्टी अपने राजनीतिक पुनर्जागरण के लिए इस्तेमाल करे।
पेपर लीक को बीमारी बताया
राघव ने पेपर लीक को सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि “क्रॉनिक डिजीज” और “पैन-इंडिया ऑर्गेनाइज्ड क्राइम” बताया। उनके अनुसार, इस समस्या को किसी एक राज्य या एक पार्टी के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि परीक्षा में धोखाधड़ी और पेपर लीक एक ऐसा नेटवर्क बन चुका है जो देशभर के युवाओं का भविष्य खराब कर रहा है। इसलिए इसका इलाज राजनीतिक शोर नहीं, संस्थागत सुधार है।
सरकार का समाधान क्या है
राघव चड्ढा के मुताबिक, सरकार अब कड़ा कानून ला रही है, फास्ट ट्रैक कोर्ट में तेज कार्रवाई कर रही है और भविष्य में NEET को OMR की जगह CBT फॉर्मेट में कराने की दिशा में बढ़ रही है।
उनका दावा है कि सरकार ने 75 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल कर दी और अब ऐसी व्यवस्था बनाने की कोशिश है जिससे नकल माफिया को रोकना आसान हो।
पंजाब का उदाहरण
अपने भाषण को मजबूत बनाने के लिए राघव चड्ढा ने पंजाब की फार्मेसी ऑफिसर भर्ती परीक्षा का उदाहरण दिया। उनके मुताबिक, 19 जुलाई 2026 को वहां ब्लूटूथ डिवाइस के जरिए नकल कराने और 13-13 लाख रुपये वसूलने जैसी घटनाएं सामने आई थीं।
हालांकि पुलिस जांच की शुरुआती रिपोर्ट में कहा गया था कि परीक्षा से पहले पेपर लीक के सबूत नहीं मिले, बल्कि नकल परीक्षा के दौरान रियल-टाइम में कराई गई।
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राघव का राजनीतिक संदेश
राघव ने साफ कहा कि पेपर लीक को लेकर राजनीतिक मतभेद बाद में, लेकिन युवाओं के भरोसे की रक्षा पहले आनी चाहिए। उन्होंने सभी दलों से अपील की कि इस कानून को समर्थन दें ताकि परीक्षा प्रणाली में विश्वास बहाल हो।
यही वजह है कि उनका भाषण केवल विरोध का नहीं, बल्कि सरकार के साथ खड़े होकर समाधान देने की भाषा में था।
क्यों अहम है यह बयान
यह बयान इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि राघव चड्ढा पहले आक्रामक विपक्षी आवाज माने जाते थे। अब सत्ता पक्ष में होने के बाद उन्होंने यह संकेत दिया है कि सवाल पूछने का दौर पूरा हुआ, अब जवाबदेह समाधान देने का समय है।
इसने AAP, कांग्रेस, छात्र आंदोलन और सरकार—सभी को एक नए राजनीतिक फ्रेम में ला खड़ा किया है।
निष्कर्ष
संक्षेप में, राघव चड्ढा ने संसद में कहा कि छात्रों का आंदोलन किसी दल के कमबैक का मंच नहीं है और पेपर लीक की बीमारी का इलाज राजनीतिक नारे नहीं, बल्कि स्थायी संस्थागत सुधार हैं। उन्होंने AAP पर परोक्ष निशाना भी साधा और सरकार के नए एंटी-पेपर लीक बिल का समर्थन करते हुए इसे जरूरी कदम बताया।

