GST Deputy Commissioner Arrested – वाराणसी में विजिलेंस ने भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए GST विभाग की डिप्टी कमिश्नर अंबिका सिंह को 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है। आरोप है कि वह फाइल के निस्तारण के बदले पैसे मांग रही थीं। गिरफ्तारी के दौरान उन्होंने भागने की कोशिश की और महिला पुलिसकर्मियों से हाथापाई भी की….
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कैसे शुरू हुआ मामला?
यह मामला बजरडीहा निवासी अजय कुमार मौर्य से जुड़ा है, जो ब्लैक स्मिथ इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक हैं। उन्होंने वर्ष 2023 के GST रिटर्न और टैक्स से जुड़ी प्रक्रिया पूरी की थी, लेकिन कुछ आपत्तियों के कारण उनकी फाइल दोबारा जांच के लिए विभाग में पहुंची। इसके बाद यह फाइल डिप्टी कमिश्नर अंबिका सिंह के पास भेजी गई।
आरोप है कि फाइल को मंजूरी देने के बजाय अंबिका सिंह ने उसे खारिज करने की बात कही और निस्तारण के लिए 50 हजार रुपये की मांग की। व्यापारी ने पहले विरोध किया, लेकिन बाद में विजिलेंस की मदद से शिकायत दर्ज कराई।
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विजिलेंस ने कैसे बिछाया जाल?
शिकायत मिलने के बाद अजय कुमार मौर्य ने वाराणसी विजिलेंस कार्यालय में पूरे मामले की जानकारी दी। प्रारंभिक जांच में रिश्वत मांगने के आरोप सही पाए गए, जिसके बाद ट्रैप प्लान तैयार किया गया। बुधवार शाम करीब 6:30 बजे डिप्टी कमिश्नर को भेलूपुर क्षेत्र के दादा रेस्टोरेंट में पैसे लेने के लिए बुलाया गया।
जैसे ही उन्होंने 50 हजार रुपये से भरा लिफाफा लिया, पहले से मौजूद विजिलेंस टीम ने उन्हें मौके पर ही पकड़ लिया। इसके बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और लोगों की भीड़ जमा हो गई।
भागने की कोशिश और हाथापाई
रंगेहाथ पकड़े जाने के बाद अंबिका सिंह ने मौके से भागने की कोशिश की। इस दौरान उन्हें रोकने के लिए आगे आईं चार महिला पुलिसकर्मियों के साथ उन्होंने धक्का-मुक्की और हाथापाई की। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, अधिकारी खुद को फंसाए जाने की बात कहती रहीं, लेकिन विजिलेंस टीम ने उन्हें हिरासत में ले लिया।
भीड़ बढ़ने पर उन्हें सरकारी वाहन से थाने ले जाया गया। पूरे घटनाक्रम के दौरान क्षेत्र में तनाव और हंगामे जैसा माहौल बना रहा।
क्या कार्रवाई हुई?
गिरफ्तारी के बाद अंबिका सिंह के खिलाफ वाराणसी विजिलेंस थाने में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। अब विजिलेंस टीम उनके कार्यकाल के दौरान निस्तारित अन्य फाइलों और मामलों की भी जांच करेगी।
अधिकारियों का कहना है कि यह पता लगाया जाएगा कि कहीं अन्य मामलों में भी अनियमितता या रिश्वतखोरी तो नहीं हुई। इससे मामला सिर्फ एक ट्रैप तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उनके पुराने कामकाज की भी जांच होगी।
मामला क्यों अहम है?
यह गिरफ्तारी इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इसमें एक वरिष्ठ राजस्व अधिकारी पर सीधे रिश्वत लेने का आरोप है। GST जैसे विभाग में फैसलों का असर कारोबार, टैक्स अनुपालन और उद्योगों की रफ्तार पर पड़ता है। ऐसे में किसी अधिकारी पर भ्रष्टाचार का आरोप प्रशासनिक भरोसे पर भी सवाल उठाता है।
इस घटना ने यह भी दिखाया कि शिकायत मिलने के बाद अगर तेजी से जांच और ट्रैप कार्रवाई हो, तो भ्रष्टाचार पर रोक लगाई जा सकती है। अब निगाहें आगे की जांच पर हैं कि क्या यह सिर्फ एक अकेला मामला था या इसके पीछे किसी बड़े पैटर्न के संकेत मिलते हैं।
नतीजा
वाराणसी की यह कार्रवाई भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त संदेश देती है। 50 हजार रुपये की कथित रिश्वत लेते रंगेहाथ पकड़ी गई डिप्टी कमिश्नर अब कानूनी कार्रवाई का सामना करेंगी। जांच आगे बढ़ने पर यह साफ होगा कि विभाग के भीतर और किन मामलों में अनियमितताएं हुईं।

