दुनिया में सबसे ज्यादा यूरेनियम कहां है – परमाणु ऊर्जा, परमाणु बम और दुनिया की सबसे बड़ी शक्तियों की दौड़ — इन सबके पीछे एक ही तत्व है: यूरेनियम। लेकिन यह यूरेनियम धरती के अंदर से कैसे निकाला जाता है? और क्यों कुछ खदानों में धरती के भीतर बर्फ की दीवारें बनाई जाती हैं? आज इस रोचक और चौंकाने वाली दुनिया में चलते हैं।
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यूरेनियम है क्या और क्यों है इतना जरूरी
यूरेनियम एक भारी रेडियोधर्मी धातु है जिसकी खोज 1789 में क्लाप्रोट ने पिचब्लेंड नामक अयस्क से की थी। उन्होंने नए तत्व का नाम यूरेनस ग्रह के आधार पर यूरेनियम रखा।
यूरेनियम का उपयोग :
- परमाणु बिजलीघरों में ईंधन के रूप में
- परमाणु हथियारों में
- चिकित्सा में रेडियोधर्मी थेरेपी में
- रक्षा उद्योग में
खनन से प्राप्त यूरेनियम का लगभग पूरी तरह से परमाणु संयंत्रों में ईंधन के रूप में प्रयोग होता है।
दुनिया में यूरेनियम सबसे ज्यादा कहां है
पूरी दुनिया में 63% उत्पादन मात्र तीन देशों — कजाकिस्तान, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया — में होता है।
ऑस्ट्रेलिया में दुनिया के ज्ञात यूरेनियम संसाधनों का लगभग एक तिहाई हिस्सा है। ज्ञात संसाधनों वाले अन्य देशों में रूसी संघ, संयुक्त राज्य अमेरिका, दक्षिण अफ्रीका, नामीबिया, नाइजर, ब्राजील और यूक्रेन शामिल हैं।
शीर्ष यूरेनियम उत्पादक देश 2025 :
- कजाकिस्तान: दुनिया का 45% उत्पादन — नंबर 1
- कनाडा: 13% हिस्सेदारी — नंबर 2
- ऑस्ट्रेलिया: 12% — नंबर 3
- नामीबिया, नाइजर, रूस, उज्बेकिस्तान, चीन: बाकी
भारत की स्थिति: भारत में यूरेनियम का भंडार सीमित है। झारखंड के जादूगुड़ा में देश की सबसे बड़ी यूरेनियम खदान है, लेकिन परमाणु जरूरत के लिए भारत काफी हद तक आयात पर निर्भर है।
दुनिया की सबसे बड़ी यूरेनियम खदान — McArthur River
McArthur River दुनिया की सबसे बड़ी उच्च-ग्रेड यूरेनियम खदान है। इसमें खनन 530 से 640 मीटर की गहराई पर होता है।
1988 में खोजी गई और 600 मीटर से ज्यादा गहरी स्थित McArthur River दुनिया की सबसे समृद्ध खदान है, जिसकी उत्पादन क्षमता 6,900 टन यूरेनियम प्रति वर्ष है। यूरेनियम की बेहद ऊंची मात्रा के कारण यहां खनन में विशेष तकनीकें इस्तेमाल होती हैं ताकि अयस्क और खनिकों के बीच सीधा संपर्क न हो।
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धरती में छेदकर बर्फ की दीवार — यह क्या है और क्यों जरूरी है?
यह इस पूरी कहानी का सबसे चौंकाने वाला हिस्सा है।
McArthur River में खनन के दौरान खदान के चारों ओर एक अभेद्य बर्फ की दीवार (Freeze Wall) बनाई जाती है। इससे पानी को खदान में घुसने से रोका जाता है और कमजोर चट्टानों को स्थिर रखा जाता है।
यह कैसे काम करता है?
McArthur River के भूमिगत हिस्से में ‘स्नोमेन’ (Snowmen) लगाए जाते हैं जो ठंडे नमकीन घोल (Brine) को चारों ओर प्रसारित करते हैं, जिससे अयस्क के आसपास की छिद्रयुक्त चट्टान जमी रहती है।
एक 800 टन क्षमता वाला सरफेस फ्रीज प्लांट -40°C तापमान पर ठंडा घोल तैयार करता है। इसे खनन शुरू होने से करीब 9 महीने पहले लगाया जाता है ताकि पर्याप्त जमी हुई दीवार बन सके।
सरल भाषा में: जमीन के नीचे पानी और कमजोर चट्टानें होती हैं। अगर खुदाई की जाए तो पानी अंदर घुस सकता है और खदान डूब सकती है। इसलिए खनन क्षेत्र के चारों ओर पाइप डालकर बेहद ठंडा घोल प्रसारित किया जाता है, जो जमीन को -40°C तक ठंडा कर देता है। यह बर्फ की दीवार पानी को बाहर रखती है और चट्टानों को मजबूत बनाती है।
Cigar Lake — दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी खदान और सबसे अनोखी तकनीक
Cigar Lake Mine कनाडा के उत्तरी Saskatchewan में Athabasca Basin में स्थित है। यह दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी उच्च-ग्रेड यूरेनियम खदान है।
Cigar Lake का यूरेनियम भंडार 150,000 टन है और अयस्क की ग्रेड बेहद ऊंची 7.8% है। इसे पारंपरिक तरीकों से नहीं खोदा जा सकता क्योंकि यहां विकिरण बेहद ज्यादा है और यह अस्थिर भूगर्भीय संरचना में 450 मीटर नीचे है। इसलिए एक नई तकनीक इस्तेमाल होती है जिसमें अयस्क और खनिकों का सीधा संपर्क नहीं होता — पहले अयस्क को कृत्रिम रूप से जमाया जाता है, फिर हाई-प्रेशर वाटर जेट से उसे निकाला जाता है।
Cigar Lake में Jet Boring System नाम की तकनीक इस्तेमाल होती है — जमाव और उच्च दबाव वाले पानी के छिड़काव से अयस्क को काटा जाता है।
खदान में पानी घुसने का खतरा — जब डूब गई पूरी खदान
2006 में Cigar Lake में पानी का भयावह बहाव आया और पूरी खदान डूब गई। फिर 2008 में खदान सूखाने की पहली कोशिश के दौरान दूसरी बार भी पानी घुस गया। 2010 में सफलतापूर्वक फिर से प्रवेश हो सका और 2014 में अयस्क उत्पादन शुरू हुआ।
यह दिखाता है कि यूरेनियम खनन कितना चुनौतीपूर्ण और खतरनाक काम है।
यूरेनियम निकालने के तरीके — कैसे होता है यह काम?
खुले खड्डे वाली विधि में उस स्थान पर खोदाई की जाती है या उस जगह को विस्फोट द्वारा उड़ाया जाता है, जिससे अयस्क का हिस्सा दिखने लगे। इस प्रक्रिया में लोडर और डंप ट्रकों का इस्तेमाल किया जाता है। विकिरण से बचने के लिए मजदूर ज्यादातर अपने केबिन में रहते हैं।
तीन मुख्य तरीके :
1. ओपन पिट माइनिंग: जमीन ऊपर से खोदकर 2. अंडरग्राउंड माइनिंग: जमीन के नीचे सुरंग बनाकर (McArthur River) 3. Jet Boring System: जमाई गई जमीन में हाई-प्रेशर पानी से काटकर (Cigar Lake)
यूरेनियम खनन के खतरे
यूरेनियम खनन दुनिया के सबसे खतरनाक कामों में से एक है:
- लगातार रेडियोधर्मी विकिरण का खतरा
- जमीन के नीचे पानी भर जाने का जोखिम
- रेडॉन गैस का खतरा (फेफड़ों का कैंसर)
- रेडियोधर्मी धूल के कण
- खदान दुर्घटनाओं का अत्यधिक खतरा
इसीलिए McArthur River और Cigar Lake में खनिक अयस्क को सीधे हाथ नहीं लगाते — रिमोट कंट्रोल मशीनें काम करती हैं।
भारत के लिए यूरेनियम का महत्व
भारत के पास 22 परमाणु रिएक्टर हैं और 2030 तक 10 नए बनाने की योजना है। ऐसे में यूरेनियम की जरूरत लगातार बढ़ रही है। भारत ने कजाकिस्तान, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और रूस से यूरेनियम आयात के समझौते किए हैं।
निष्कर्ष
यूरेनियम — जो परमाणु ऊर्जा और परमाणु ताकत की नींव है — उसे धरती से निकालना उतना आसान नहीं जितना लगता है। कनाडा की McArthur River और Cigar Lake जैसी खदानों में -40°C पर बर्फ की दीवारें बनाकर, हाई-प्रेशर वाटर जेट से खुदाई कर और रिमोट-कंट्रोल मशीनों का इस्तेमाल कर यह काम किया जाता है।
यह इंजीनियरिंग की सबसे बड़ी कामयाबियों में से एक है — और साथ ही यह याद दिलाती है कि दुनिया की ऊर्जा जरूरतें कितनी जटिल और चुनौतीपूर्ण हैं।
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