CM विजय का बड़ा बयान – पर्दे के ‘सुपरस्टार’ अब राजनीति के पक्के ‘खिलाड़ी’ बन चुके हैं। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थलापति विजय ने बुधवार को विधानसभा के पटल पर साबित कर दिया कि सत्ता का ‘फ्लोर टेस्ट’ कैसे जीता जाता है। 144 वोट, DMK का वॉकआउट, AIADMK का विभाजन — यह सब एक साथ हुआ और तमिलनाडु की राजनीति का एक नया अध्याय लिखा गया।
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फ्लोर टेस्ट का पूरा हिसाब — नंबरों में
तमिलनाडु की विजय सरकार ने बुधवार को फ्लोर टेस्ट पास कर लिया। सदन में वोटिंग के वक्त 172 विधायक मौजूद रहे। TVK के समर्थन में 144 वोट पड़े, जो फ्लोर बहुमत से 85 ज्यादा रहे।
जोसेफ विजय की TVK सरकार फ्लोर टेस्ट में पास हो गई है। वोटिंग के दौरान TVK के पक्ष में 144 वोट, जबकि विरोध में 22 वोट पड़े। इस दौरान विधानसभा में 5 MLA गैर मौजूद रहे।
पूरा गणित :
- 234 सदस्यीय विधानसभा में साधारण बहुमत: 118 सीटें
- TVK को मिले वोट: 144 — बहुमत से 26 ज्यादा
- विरोध में वोट: 22 (AIADMK के बचे विधायक)
- वॉकआउट: DMK (59 विधायक)
- न्यूट्रल: PMK (4) और BJP (1)
- स्पीकर ने वोट नहीं डाला
AIADMK में सेंधमारी — 25 बागी विधायक TVK के साथ
यह फ्लोर टेस्ट का सबसे बड़ा और चौंकाने वाला पल था।
कांग्रेस और वामदलों के साथ-साथ विपक्षी पार्टी AIADMK के बागी विधायकों का समर्थन हासिल कर विजय ने बहुमत परीक्षण में 144 का जादुई आंकड़ा छू लिया और DMK को सदन से वॉकआउट करने पर मजबूर कर दिया।
TVK को 47 विधायकों वाली AIADMK के 25 बागी विधायक के अलावा, कांग्रेस, CPI, CPI(M), VCK, IUML और AMMK से बागी विधायक ने समर्थन किया।
AIADMK के सीवी शनमुगम गुट के 24 विधायकों ने अपनी पार्टी की चेतावनी दरकिनार करते हुए TVK के पक्ष में मतदान किया।
AIADMK में विभाजन :
- पलानीस्वामी गुट: विरोध में रहा (22 वोट)
- CV शनमुगम गुट: TVK के पक्ष में (25 वोट)
- AIADMK अब दो हिस्सों में टूट गई है
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DMK का वॉकआउट — स्टालिन का दांव या मजबूरी?
DMK ने सदन से वॉकआउट कर दिया। DMK नेता ने कहा — “जिन लोगों ने आपको वोट दिया था, उन्हें लगने लगा है कि उन्होंने बहुत बड़ी गलती की है। लगभग 65% लोगों ने विजय को CM के तौर पर रिजेक्ट कर दिया है। उनमें से ज्यादातर ने उन्हें वोट नहीं दिया, यह सरकार कितने समय तक चलेगी, लोग यही सोच रहे हैं।”
DMK के बाहर जाने के बाद सदन में बहुमत का आंकड़ा कम होकर सिर्फ 88 रह गया, जिससे विजय सरकार के लिए रास्ता और भी आसान हो गया।
यानी DMK के वॉकआउट ने उल्टा विजय की मदद कर दी।
मद्रास हाई कोर्ट का झटका और एक बागी विधायक
फ्लोर टेस्ट से ठीक पहले TVK को कानूनी झटका भी लगा था। मद्रास हाई कोर्ट ने तिरुपत्तूर सीट से जीते TVK विधायक श्रीनिवासा सेतुपति को वोट देने से रोका क्योंकि DMK ने कोर्ट में उनकी जीत को चुनौती दी थी।
विजय त्रिची ईस्ट और पेरम्बूर से दोनों सीटें जीते थे। सीएम बनने के बाद उन्होंने पेरम्बूर से इस्तीफा दिया। इस तरह सदन में TVK विधायकों की संख्या 106 रह गई।
विजय का ऐतिहासिक बयान — “अल्पसंख्यकों की सरकार”
तमिलनाडु विधानसभा में विश्वास मत हासिल करने के बाद मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने कहा — “ये अल्पसंख्यकों की सरकार है। उनकी सरकार अल्पसंख्यकों के लिए काम करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी सरकार सेक्युलर तरीके से घोड़े की रफ्तार से काम करेगी, न कि हॉर्स ट्रेडिंग में शामिल होगी। उनकी सरकार पिछली सरकार की सभी योजनाओं को जारी रखेगी।”
उन्होंने राज्य के अल्पसंख्यकों को भरोसा दिलाते हुए साफ किया कि उनकी सरकार पूरी तरह से एक ‘धर्मनिरपेक्ष (Secular) सरकार’ के रूप में काम करेगी और जनता के हर वर्ग की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
ज्योतिषी वाला विवाद — पहले नियुक्त, फिर हटाया
तमिलनाडु में फ्लोर टेस्ट पास करने के कुछ घंटे बाद ही मुख्यमंत्री विजय ने ज्योतिषी राधन पंडित को स्पेशल ड्यूटी ऑफिसर (OSD) पद से हटा दिया। विजय ने मंगलवार को उन्हें यह जिम्मेदारी दी थी, लेकिन विपक्ष और सहयोगी पार्टियों के विरोध के बाद फैसला वापस लेना पड़ा।
यह घटना बताती है कि विजय अभी भी सीख रहे हैं। पहले दिन बड़े फैसले, दूसरे दिन एक विवाद — और तुरंत सुधार। यह एक नए राजनेता की परिपक्वता की निशानी भी है।
पलानीस्वामी और PMK की प्रतिक्रिया
विधायकों को लुभाने की कोशिशों का आरोप लगाते हुए पलानीस्वामी ने दावा किया कि पार्टी को यह जानकारी मिली है कि कुछ सदस्यों को सरकार का समर्थन करने के बदले में मंत्री पद और बोर्ड के अध्यक्ष पद देने का प्रस्ताव दिया जा रहा है। EPS ने विधानसभा में कहा — ‘हम कोई दुश्मन पार्टी नहीं हैं; हम एक जिम्मेदार विपक्ष के तौर पर काम करना चाहते हैं।’
PMK विधायक सौम्या अंबुमणि ने सरकार पर BJP विरोधी राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विश्वास प्रस्ताव पर चर्चा शासन और जनता के मुद्दों पर होनी चाहिए थी, लेकिन इसे भाजपा विरोधी मंच बना दिया गया।
अब आगे क्या — सरकार सुरक्षित लेकिन चुनौतियां बाकी
इस जीत से न सिर्फ TVK का मनोबल बढ़ा है, बल्कि विपक्ष को भी तगड़ा झटका लगा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि फ्लोर टेस्ट में मिली जीत के बाद अब विजय सरकार राज्य में अपनी नीतियों और योजनाओं को ज्यादा मजबूती के साथ आगे बढ़ा सकेगी।
आगे की चुनौतियां :
- AIADMK के 25 बागी विधायकों को स्थायी रूप से साथ रखना
- DMK जैसे अनुभवी विपक्ष से लड़ना
- चुनावी वादे — 200 यूनिट मुफ्त बिजली, महिला सुरक्षा फोर्स — पूरा करना
- अल्पसंख्यकों के साथ-साथ बहुसंख्यकों का भी भरोसा जीतना
निष्कर्ष
144 बनाम 22 — यह सिर्फ वोटों का आंकड़ा नहीं, यह तमिलनाडु की जनता के उस जनादेश की जीत है जिसने 70 साल पुराने द्रविड़ राजनीति के एकाधिकार को तोड़ दिया। AIADMK का विभाजन, DMK का वॉकआउट और 144 वोटों की जीत — विजय ने साबित किया कि वे सिर्फ पर्दे पर नहीं, असल राजनीति में भी ‘मास्टर स्ट्रोक’ खेलना जानते हैं।
अब असली परीक्षा शुरू होती है — 5 साल का शासन कैसा होगा?
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