Blackmailing Via Dating Apps – प्रयागराज में डेटिंग ऐप और सोशल मीडिया के जरिए लोगों को कथित तौर पर प्रेम जाल में फंसाकर ब्लैकमेल करने का मामला सामने आया है। पल्लवी सिंह राजपूत नाम की महिला पर आरोप है कि वह अलग-अलग नामों से पुरुषों से दोस्ती करती थी, मुलाकात के दौरान उनकी निजी तस्वीरें और वीडियो बनाती थी और बाद में उन्हीं के आधार पर पैसे मांगती थी….
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यह मामला एक शिकायत के आधार पर सामने आया है और पुलिस इसकी जांच कर रही है। शिकायतकर्ता पक्ष का दावा है कि इस कथित नेटवर्क के जरिए अब तक छह करोड़ रुपये से अधिक की वसूली की गई। हालांकि, इन आरोपों की अभी अदालत में पुष्टि नहीं हुई है। किसी भी आरोपी को दोषी तभी माना जा सकता है, जब जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद आरोप साबित हों।
डेटिंग ऐप से दोस्ती और फिर ब्लैकमेलिंग
शिकायत के अनुसार, महिला Tinder और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अलग-अलग नामों से प्रोफाइल बनाकर पुरुषों से संपर्क करती थी। रिपोर्टों में ‘स्वीटी तिवारी’ जैसे नामों के इस्तेमाल का भी दावा किया गया है। कथित तौर पर वह पहले सामान्य बातचीत करती, फिर वीडियो कॉल और निजी मुलाकातों के जरिए संबंधों को नजदीकी में बदल देती थी।
आरोप है कि मुलाकात के दौरान पुरुषों की निजी तस्वीरें या वीडियो उनकी जानकारी के बिना रिकॉर्ड किए जाते थे। इसके बाद कथित तौर पर वही सामग्री उन्हें भेजकर बड़ी रकम की मांग की जाती थी। जो लोग पैसे देने से इनकार करते या पुलिस से शिकायत करने की बात कहते, उन्हें बलात्कार या हत्या के प्रयास जैसे गंभीर मामलों में फंसाने की धमकी दी जाती थी।
पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ऐसे कितने लोगों से संपर्क किया गया, कितने मामलों में रकम मांगी गई और पैसे का लेन-देन किन बैंक खातों या माध्यमों से हुआ।
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शिकायतकर्ता ने लगाए गंभीर आरोप
मामले में शिकायत करने वाले इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक अधिवक्ता का दावा है कि महिला की शिकायतों के बाद कई लोगों को जेल जाना पड़ा। NDTV की रिपोर्ट के अनुसार, शिकायतकर्ता पक्ष का कहना है कि आरोपी महिला की शिकायतों के आधार पर कम से कम पांच लोग जेल जा चुके हैं।
एक अन्य रिपोर्ट में छह लोगों के खिलाफ कथित झूठी शिकायत दर्ज कराने और उन्हें जेल भिजवाने का आरोप लगाया गया है। इन दावों की पुष्टि के लिए पुलिस को संबंधित FIR, केस डायरी, अदालत के रिकॉर्ड और जेल भेजे गए लोगों के मामलों की स्वतंत्र जांच करनी होगी।
यह भी महत्वपूर्ण है कि किसी शिकायत का झूठा या सही होना केवल आरोप लगाने से तय नहीं होता। पुलिस को यह देखना होगा कि शिकायतों में लगाए गए आरोपों के समर्थन में क्या साक्ष्य थे और क्या किसी मामले में जांच के दौरान विरोधाभास सामने आया।
संगठित गिरोह की आशंका
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि कथित वसूली का काम अकेले नहीं किया जा रहा था। उसके अनुसार, दो अन्य महिलाएं और दो पुरुष भी इस नेटवर्क में मददगार थे। आरोप है कि ये लोग पीड़ितों को डराने, पैसों की मांग करने और रकम के लेन-देन में भूमिका निभाते थे।
पुलिस अब कथित सहयोगियों की पहचान, मोबाइल फोन, बैंक खातों, चैट रिकॉर्ड और कॉल डिटेल की जांच कर सकती है। यदि पैसों का लेन-देन कई लोगों के खातों में हुआ है, तो इससे कथित नेटवर्क की संरचना समझने में मदद मिल सकती है।
कुछ रिपोर्टों में महिला के पति के भाई और अन्य लोगों पर दबंगई में शामिल होने का आरोप भी लगाया गया है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, इसलिए पुलिस जांच के बिना किसी व्यक्ति को गिरोह का हिस्सा मानना उचित नहीं होगा।
नोटों और हथियार वाली तस्वीरें
मामला चर्चा में आने के बाद सोशल मीडिया पर कुछ तस्वीरें भी प्रसारित हो रही हैं। एक तस्वीर में नोटों की गड्डियां दिखाई दे रही हैं, जबकि दूसरी तस्वीर को महिला और हथियार से जोड़कर साझा किया जा रहा है। लेकिन पुलिस या किसी स्वतंत्र जांच एजेंसी ने अभी तक इन तस्वीरों की प्रामाणिकता, तारीख और संदर्भ की पुष्टि नहीं की है।
सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरों को जांच का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता। यह पता लगाना जरूरी है कि तस्वीरें कब और कहां ली गईं, उनमें दिखाई देने वाली रकम किसकी है और क्या उनका इस मामले से कोई वास्तविक संबंध है।
पानी की टंकी पर चढ़ने का मामला
रिपोर्टों के अनुसार, मई में प्रयागराज के फाफामऊ इलाके में महिला पानी की टंकी पर चढ़ गई थी और अपने खिलाफ दर्ज धोखाधड़ी के मुकदमे को वापस लेने की मांग कर रही थी। इस घटना के बाद वहां भीड़ जमा हो गई थी और प्रशासन को हस्तक्षेप करना पड़ा।
बताया गया कि यह विवाद प्रेम विवाह और उसके बाद दर्ज कराए गए मुकदमे से जुड़ा था। हालांकि, इस मामले की पूरी कानूनी स्थिति और मुकदमे में लगाए गए आरोपों की जानकारी जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
पुलिस के सामने चुनौती
पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह पता लगाना है कि कथित तौर पर निजी तस्वीरें कैसे बनाई गईं, उन्हें किसे भेजा गया और पैसों की मांग का पूरा तरीका क्या था। इसके लिए डिजिटल फॉरेंसिक जांच, बैंकिंग रिकॉर्ड और संबंधित लोगों के बयान अहम होंगे।
अगर किसी व्यक्ति को निजी तस्वीरों के आधार पर धमकाया जाता है, तो उसे डरकर पैसे देने के बजाय सबूत सुरक्षित रखने चाहिए। चैट, कॉल रिकॉर्ड, भुगतान की रसीद और धमकी वाले संदेशों का बैकअप लेकर तुरंत साइबर सेल या पुलिस से संपर्क करना चाहिए।
डेटिंग ऐप इस्तेमाल करने वालों के लिए सावधानी
ऑनलाइन दोस्ती करते समय अपनी पहचान, पता, बैंक विवरण, OTP और निजी तस्वीरें साझा नहीं करनी चाहिए। पहली मुलाकात हमेशा सार्वजनिक स्थान पर होनी चाहिए और किसी भरोसेमंद व्यक्ति को इसकी जानकारी देनी चाहिए।
किसी भी व्यक्ति के दबाव में निजी तस्वीरें भेजना या पैसे ट्रांसफर करना जोखिम भरा हो सकता है। अगर कोई ब्लैकमेल करे तो बातचीत बंद करने से पहले उपलब्ध साक्ष्यों को सुरक्षित करें और पुलिस या साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें।
निष्कर्ष
प्रयागराज का यह मामला डेटिंग ऐप के दुरुपयोग और कथित ब्लैकमेलिंग से जुड़ा गंभीर आरोप है। पल्लवी सिंह राजपूत और अन्य लोगों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुलिस जांच कर रही है, जबकि छह करोड़ रुपये की वसूली और कई लोगों को जेल भेजने के दावे शिकायतकर्ता पक्ष की ओर से किए गए हैं।
फिलहाल मामले में अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। जांच पूरी होने के बाद ही पता चलेगा कि कथित नेटवर्क कितना बड़ा था, पैसों का वास्तविक लेन-देन कितना हुआ और किन लोगों की भूमिका साबित होती है।

