करोड़ों की साइबर ठगी – सूरत पुलिस ने करोड़ों की साइबर ठगी वाले एक हाईटेक रैकेट को खुलासा किया है, जिसमें 150 महिला टेलीकॉलर और 20 लड़के डॉक्टर बनकर पीड़ितों को फंसाते थे। पूरा नेटवर्क गुरुग्राम से कंट्रोल होता था और बाहर से यह एक हेल्थ एंड वेलनेस कंपनी ‘क्यूरेस्ट साइंस एंड वेलनेस प्राइवेट लिमिटेड’ दिखता था, लेकिन अंदर से यह एक पूरी तरह से स्क्रिप्टेड फ्रॉड फैक्ट्री थी…
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कैसे शुरू होता था ठगी का खेल
महिला ने जैसे ही फेसबुक पर “30 दिन में वजन कम करें, बिना एक्सरसाइज और बिना डाइटिंग” वाले विज्ञापन पर क्लिक किया और अपना मोबाइल नंबर डाला, कुछ ही मिनटों में वॉट्सऐप पर मैसेज और कॉल आने शुरू हो जाते। दूसरी तरफ बैठी टेलीकॉलर खुद को हेल्थ एडवाइजर या डॉक्टर की असिस्टेंट बताती।
बातों-बातों में भरोसा जीत लिया जाता। फिर फोन किसी ‘डॉक्टर’ को ट्रांसफर कर दिया जाता। लेकिन यही ‘डॉक्टर’ असल में कॉल सेंटर में बैठा कोई दूसरा कर्मचारी होता था। कभी वह डॉ. एम.के. खन्ना बन जाता, कभी डॉ. आकाश मल्होत्रा। आवाज बदलना, मेडिकल भाषा बोलना और कॉन्फिडेंस के साथ सलाह देना… यही उसकी सबसे बड़ी चालाकी थी।
फर्जी मेडिकल फाइल और दवाओं की बिक्री
पीड़ित के लिए फर्जी मेडिकल फाइल बनाई जाती। बॉडी प्रोफाइल तैयार होती। वजन, BMI, मेटाबॉलिज्म और न जाने कितने मेडिकल शब्दों से भरी रिपोर्ट भेजी जाती। सब कुछ इतना प्रोफेशनल लगता कि सामने वाले को शक ही नहीं होता।
फिर शुरू होती थी दवाओं की बिक्री। एक किट खत्म हुई नहीं कि दूसरी की सलाह। फिर तीसरी। हर बार कहा जाता- बस यह आखिरी स्टेप है, इसके बाद रिजल्ट दिखने लगेगा। और इसी तरह लाखों रुपये निकलते चले जाते।
कैश का खेल और फ्लाइट के जरिए मिलते थे नोट
साइबर ठगी करने के बावजूद यह लोग ऑनलाइन पैसे लेने से बचते थे। बैंक खाते में सिर्फ नाम भर का पैसा आता था। बाकी करोड़ों रुपये कैश में लिए जाते थे। इसके लिए गैंग के सदस्य फ्लाइट पकड़कर दिल्ली से दूसरे शहर पहुंचते, कथित दवा का पैकेट देते और बदले में नोटों से भरा बैग लेकर वापस लौट जाते।
सूरत की एक महिला इसी जाल में फंस गई। पांच महीने में उससे 1.77 करोड़ रुपये वसूले गए। जब उससे 81.50 लाख रुपये और मांगे गए और कहा गया कि पैसे नहीं दिए तो दवा का साइड इफेक्ट होगा, तब उसे शक हुआ।
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पुलिस ने कैसे जाल बिछाया
महिला ने सूरत साइबर क्राइम पुलिस से संपर्क किया। पुलिस ने भी जाल बिछाना शुरू कर दिया। महिला से कहलवाया गया कि पैसे तैयार हैं। जैसे ही गिरोह का एक सदस्य कैश लेने पहुंचा, पुलिस ने उसे दबोच लिया।
उसकी निशानदेही पर गुरुग्राम के कॉल सेंटर में छापा पड़ा और पूरे नेटवर्क की परतें खुलने लगीं। जांच में पता चला कि कंपनी 2021 में रजिस्टर्ड हुई थी और 2022 से कथित तौर पर इसी मॉडल पर काम कर रही थी।
आरोपियों का रोल और गैंग की संरचना
एडीशनल कमिश्नर डॉ. करणराजसिंह वाघेला ने बताया कि सूरत पुलिस ने गुरुग्राम के 4 लोगों को पकड़ा है। आरोप है कि कंपनी ने फेसबुक पर विज्ञापन देकर देशभर में 80 करोड़ रुपये का घोटाला किया है।
- अर्सलान नाम का आरोपी आवाज बदलने में माहिर था। वह कभी डॉ. खन्ना तो कभी डॉ. मल्होत्रा बनकर अलग-अलग आवाजों में बात करती थी।
- कॉल सेंटर की टेलीकॉलर हेना तन्वी शर्मा बनकर बात करती थी।
- वहीं निशा कुमारी प्रिया गुप्ता बनकर बात करती थी।
इन दोनों ने महिला को यकीन दिला दिया था कि डॉक्टर उन्हें सही सलाह दे रहे हैं।
गैंग का खास सदस्य मोहम्मद हुसैन उर्फ राहुल राज और ओमप्रकाश रजाक दिल्ली से फ्लाइट के जरिए पार्सल लेकर सूरत आते थे। ये आरोपी महिला के घर जाकर दवा देते थे और बैग भरकर करोड़ों की नकदी फ्लाइट से दिल्ली ले जाते थे।
अब तक क्या बरामद हुआ और कौन अभी फरार है
टीम ने पुलिस ने इस गैंग के पास से लैपटॉप, मोबाइल और नकली दवाओं का जखीरा बरामद किया है। इस पूरे नेटवर्क को खड़ा करने वाली कंपनी के मुख्य डायरेक्टर अमित गौरव, चीफ एडमिनिस्ट्रेशन ऑफिसर पंकज शर्मा और मैनेजर दीपक अभी पुलिस की पकड़ से दूर हैं।
निष्कर्ष
यह केस एक साइबर कॉल सेंटर से नहीं, बल्कि एक पूरी तरह से स्क्रिप्टेड फ्रॉड फैक्ट्री का है। डॉक्टर से लेकर हेल्थ एक्सपर्ट तक, हर व्यक्ति की भूमिका तय थी। फेसबुक विज्ञापन से पीड़ित को फंसाया जाता, टेलीकॉलर और नकली डॉक्टरों से भरोसा जीतते, फर्जी मेडिकल रिपोर्ट दिखाते और करोड़ों की नकदी कैश में वसूल करते।
अगर आप भी फेसबुक या किसी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर “30 दिन में वजन कम करें” जैसे विज्ञापन देखते हैं, तो याद रखें कि ये नकली डॉक्टर और हेल्थ एडवाइजर हो सकते हैं। कभी भी किसी अनजान विज्ञापन पर क्लिक करके अपना मोबाइल नंबर न दें। और अगर कोई दवा लेने के लिए बार-बार पैसे मांग रहा हो, तो पहले साइबर क्राइम से संपर्क जरूर करें।
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