Sikkim Tunnel Accident : सिक्किम के नामची जिले में निर्माणाधीन समारदुंग सुरंग में हुए भूस्खलन और गैस रिसाव ने राहत और बचाव अभियान को बेहद मुश्किल बना दिया है। अब तक 8 मजदूरों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 12 मजदूरों को जिंदा बाहर निकाला गया है; कई और लोगों के भीतर फंसे होने की आशंका बनी हुई है….

हादसा कैसे हुआ?

यह हादसा सोमवार दोपहर करीब 3:09 बजे उस समय हुआ, जब तीस्ता स्टेज-6 जलविद्युत परियोजना के तहत बन रही सुरंग के भीतर अचानक लैंडस्लाइड हुआ। इससे सुरंग का रास्ता बंद हो गया और अंदर काम कर रहे मजदूर बाहर नहीं निकल पाए।

स्थिति तब और खराब हो गई जब टनल के भीतर मीथेन गैस का रिसाव शुरू हो गया। इसी गैस रिसाव की वजह से बचावकर्मियों के लिए सुरंग में घुसना जोखिम भरा हो गया और रेस्क्यू ऑपरेशन बार-बार बाधित हुआ।

राहत कार्य में दिक्कतें

रेस्क्यू के दौरान कुछ बचावकर्मी भी अंदर जाकर चक्कर खाकर बेहोश हो गए, जिसके बाद उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला गया। NDRF, SDRF, सिक्किम पुलिस और फायर एंड इमरजेंसी सर्विसेज की टीमें लगातार अभियान में जुटी हैं।

जिला प्रशासन के मुताबिक, सुरंग के भीतर हालात इतने खराब थे कि बिना विशेष सुरक्षा उपकरणों के अंदर जाना लगभग नामुमकिन था। इसी कारण पश्चिम बंगाल से विशेष गैस-प्रोटेक्शन उपकरणों वाली टीमों को भी बुलाया गया।

मृतकों और फंसे लोगों की स्थिति

अब तक बरामद शवों को सिंगतम जिला अस्पताल, STNM अस्पताल गंगटोक और नामची जिला अस्पताल भेजा गया है। प्रशासन ने कहा है कि SSDMA स्थिति पर बारीकी से नजर रखे हुए है।

फंसे मजदूरों की सही संख्या को लेकर अभी भी पूरी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। शुरुआती अनुमान में करीब 27 मजदूर अंदर फंसे होने की बात सामने आई थी, जबकि कुछ रिपोर्टों में यह संख्या अलग-अलग बताई गई है।

रेस्क्यू क्यों मुश्किल है?

सुरंग के भीतर मीथेन जैसी गैस का रिसाव बचाव दल के लिए सबसे बड़ी बाधा बन गया है। गैस के कारण न सिर्फ दृश्यता और सांस लेने में दिक्कत हो रही है, बल्कि अंदर और ज्यादा समय तक रहना भी खतरनाक साबित हो रहा है।

इसके अलावा लगातार बारिश, भूस्खलन के बाद अस्थिर जमीन और टनल के भीतर संरचनात्मक नुकसान ने बचाव कार्य को और पेचीदा बना दिया है। इसलिए बचाव दल को बार-बार रणनीति बदलनी पड़ रही है।

Also Read – मारो मुझे मारो” वीडियो ने संसद मार्च की बहस और तेज कर दी…

Sikkim Tunnel Accident
Sikkim Tunnel Accident

प्रशासन और सरकार की नजर

नामची की जिला कलेक्टर अनुपा तामलिंग ने कहा है कि जैसे ही घटना की जानकारी मिली, NDRF और SDRF की टीमें तुरंत मौके पर भेजी गईं। मुख्यमंत्री भी हालात पर लगातार नजर रखे हुए हैं और सभी जरूरी संसाधन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

सरकारी एजेंसियों का फोकस अब बाकी बचे मजदूरों तक सुरक्षित पहुंच बनाना और सुरंग के अंदर और नुकसान को रोकना है। फिलहाल प्राथमिकता यह है कि गैस-प्रभावित हिस्सों में सुरक्षित प्रवेश का रास्ता तैयार किया जाए।

अभी क्या साफ है?

अब तक की जानकारी के अनुसार, हादसा भूस्खलन और गैस रिसाव के मिश्रित संकट में बदल गया। 8 मौतों की पुष्टि, 12 लोगों के जीवित निकाले जाने और कई अन्य के फंसे होने की आशंका ने स्थिति को बेहद गंभीर बना दिया है।

आगे की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि टनल के अंदर बचे लोगों को कैसे सुरक्षित निकाला जाए, क्योंकि हर मिनट के साथ जोखिम बढ़ता जा रहा है।

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *