Reliance Foundation’s Massive Donation – देश के बड़े कारोबारी समूहों की चर्चा अक्सर उनके कारोबार, संपत्ति और मुनाफे को लेकर होती है। लेकिन उनके सामाजिक कार्यों और उन पर खर्च होने वाली रकम के बारे में भी लोगों की दिलचस्पी रहती है। रिलायंस फाउंडेशन इसी तरह की एक संस्था है, जो स्वास्थ्य, शिक्षा, ग्रामीण विकास, खेल और आपदा राहत जैसे क्षेत्रों में काम करती है।
रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) की वित्त वर्ष 2025-26 की रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी ने कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के तहत कुल 2,248 करोड़ रुपये खर्च किए। कंपनी की रिपोर्ट यह भी बताती है कि रिलायंस फाउंडेशन की विभिन्न सामाजिक पहलों के माध्यम से अब तक 9.7 करोड़ से अधिक लोगों तक पहुंच बनाई गई है।
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लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। 2,248 करोड़ रुपये रिलायंस इंडस्ट्रीज का कुल CSR खर्च है, न कि केवल रिलायंस फाउंडेशन को दी गई रकम। आखिर इस संस्था को पैसा कहां से मिलता है, यह किन क्षेत्रों में खर्च होता है और 9.7 करोड़ लोगों तक पहुंचने के दावे का क्या अर्थ है? आइए विस्तार से समझते हैं।
रिलायंस फाउंडेशन क्या है और इसे कौन चलाता है?
रिलायंस फाउंडेशन की स्थापना वर्ष 2010 में रिलायंस इंडस्ट्रीज की सामाजिक विकास संबंधी पहलों को आगे बढ़ाने के लिए की गई थी। नीता एम. अंबानी इसकी संस्थापक-अध्यक्ष हैं।
संस्था का उद्देश्य सामाजिक और आर्थिक विकास से जुड़े क्षेत्रों में काम करना और जरूरतमंद समुदायों के लिए अवसरों को बढ़ाना है।
रिलायंस फाउंडेशन के प्रमुख कार्यक्षेत्रों में शामिल हैं:
- ग्रामीण विकास और किसानों की आजीविका
- स्वास्थ्य सेवाएं और स्वास्थ्य जागरूकता
- शिक्षा, छात्रवृत्ति और कौशल विकास
- खेल और युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहन
- महिला सशक्तिकरण
- आपदा के समय राहत और सहायता
- कला, संस्कृति और विरासत का संरक्षण
- पर्यावरण और पशु कल्याण से जुड़ी पहल
संस्था की आधिकारिक वेबसाइट पर इन कार्यक्रमों और उनसे संबंधित पहलों की जानकारी दी गई है।
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रिलायंस फाउंडेशन को पैसा कहां से मिलता है?
इस सवाल का जवाब समझने के लिए रिलायंस फाउंडेशन और रिलायंस इंडस्ट्रीज के बीच संबंध को देखना जरूरी है।
1. रिलायंस इंडस्ट्रीज का CSR खर्च
रिलायंस इंडस्ट्रीज सामाजिक जिम्मेदारी से जुड़े कार्यक्रमों पर खर्च करती है। कंपनी इन पहलों को रिलायंस फाउंडेशन सहित विभिन्न संस्थाओं, कार्यक्रमों और कार्यान्वयन भागीदारों के माध्यम से आगे बढ़ाती है।
वित्त वर्ष 2025-26 में रिलायंस इंडस्ट्रीज का कुल CSR खर्च 2,248 करोड़ रुपये रहा। यह आंकड़ा कंपनी की आधिकारिक वार्षिक रिपोर्ट में दर्ज है।
इस रकम को रिलायंस फाउंडेशन की अकेले की आय या बजट मानना सही नहीं होगा। कंपनी का CSR खर्च कई सामाजिक क्षेत्रों और कार्यक्रमों में जाता है।
2. फाउंडेशन को मिलने वाला संस्थागत सहयोग
रिलायंस फाउंडेशन को रिलायंस समूह से मिलने वाला सहयोग उसके सामाजिक कार्यक्रमों के लिए महत्वपूर्ण संसाधन है।
उदाहरण के लिए, रिलायंस इंडस्ट्रीज की वित्त वर्ष 2024-25 की समेकित वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, उस वर्ष कंपनी समूह के कुल 2,156 करोड़ रुपये के CSR खर्च में से 855 करोड़ रुपये रिलायंस फाउंडेशन को दिए गए थे।
यह आंकड़ा वित्त वर्ष 2024-25 का है। इसे वित्त वर्ष 2025-26 में फाउंडेशन को मिली रकम नहीं समझना चाहिए, क्योंकि दोनों वर्षों के वित्तीय आंकड़े अलग हैं।
3. दूसरी संस्थाओं के साथ साझेदारी
रिलायंस फाउंडेशन कई सामाजिक कार्यक्रमों में अन्य संगठनों के साथ साझेदारी भी करता है। इसकी आधिकारिक वेबसाइट पर भारतीय ओलंपिक संघ, एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया, बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन और अन्य संस्थाओं के साथ विभिन्न पहलों का उल्लेख है।
ऐसी साझेदारियां विशेषज्ञता, कार्यक्रमों के क्रियान्वयन और सामाजिक प्रभाव को बढ़ाने में मदद कर सकती हैं।
हालांकि, किसी संस्था के साथ साझेदारी का उल्लेख अपने आप में यह साबित नहीं करता कि उसने रिलायंस फाउंडेशन को कितनी रकम दी। प्रत्येक साझेदारी की वास्तविक वित्तीय व्यवस्था उसके संबंधित दस्तावेजों से ही स्पष्ट होती है।
₹2,248 करोड़ का आंकड़ा आखिर क्या बताता है?
रिलायंस इंडस्ट्रीज की वित्त वर्ष 2025-26 की आधिकारिक रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी ने CSR गतिविधियों पर 2,248 करोड़ रुपये खर्च किए।
CSR का पूरा नाम कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी है। भारत में कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 135 और संबंधित नियमों के तहत पात्र कंपनियों पर सामाजिक जिम्मेदारी से जुड़े खर्च की व्यवस्था लागू होती है।
CSR के तहत स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण, ग्रामीण विकास और अन्य निर्धारित सामाजिक क्षेत्रों में कार्यक्रम चलाए जा सकते हैं।
रिलायंस के CSR कार्यक्रम भी विभिन्न क्षेत्रों में फैले हुए हैं। इसलिए 2,248 करोड़ रुपये का आंकड़ा कंपनी के कुल CSR खर्च को दर्शाता है, न कि केवल एक संस्था या एक योजना के खर्च को।
पिछले वित्त वर्ष से तुलना
रिलायंस इंडस्ट्रीज की वार्षिक रिपोर्टों के अनुसार:
| वित्त वर्ष | रिलायंस समूह का कुल CSR खर्च |
|---|---|
| 2024-25 | ₹2,156 करोड़ |
| 2025-26 | ₹2,248 करोड़ |
| अंतर | ₹92 करोड़ की वृद्धि |
इन आंकड़ों के अनुसार, कुल CSR खर्च में लगभग 4.3% की वृद्धि हुई।
यह तुलना कंपनी समूह के कुल CSR खर्च की है। इसे रिलायंस फाउंडेशन के व्यक्तिगत बजट में हुई वृद्धि के रूप में प्रस्तुत नहीं करना चाहिए।
9.7 करोड़ लोगों की मदद का दावा कितना सही है?
रिलायंस इंडस्ट्रीज की वित्त वर्ष 2025-26 की रिपोर्ट के अनुसार, रिलायंस फाउंडेशन की सामाजिक पहलों के माध्यम से स्थापना से लेकर मार्च 2026 तक 9.7 करोड़ से अधिक लोगों तक पहुंच बनाई गई।
रिलायंस की CSR रिपोर्ट में मार्च 2026 तक लगभग 9.69 करोड़ लोगों तक पहुंचने का विस्तृत आंकड़ा दिया गया है। इसमें ग्रामीण विकास, शिक्षा, खेल, स्वास्थ्य, आपदा प्रबंधन और अन्य पहलों के तहत पहुंच शामिल है।
यह संस्था की रिपोर्टिंग के अनुसार संचयी आंकड़ा है। इसका अर्थ यह नहीं है कि वित्त वर्ष 2025-26 में ही 9.7 करोड़ अलग-अलग लोगों को सहायता दी गई।
इसी तरह, किसी कार्यक्रम के तहत लोगों तक पहुंचने का अर्थ हर मामले में सीधे नकद सहायता मिलना भी नहीं होता। इसमें स्वास्थ्य सेवाएं, प्रशिक्षण, शिक्षा, जागरूकता, खेल कार्यक्रम और दूसरी तरह की सहायता शामिल हो सकती है।
किन क्षेत्रों में खर्च होता है पैसा?
रिलायंस फाउंडेशन के कार्यक्रम कई क्षेत्रों में फैले हुए हैं।
ग्रामीण विकास
ग्रामीण समुदायों की आजीविका बेहतर बनाने, किसानों को सहयोग देने और जलवायु से जुड़ी चुनौतियों के प्रति गांवों की तैयारी मजबूत करने के लिए विभिन्न कार्यक्रम चलाए जाते हैं।
स्वास्थ्य सेवाएं
स्वास्थ्य जागरूकता, स्वास्थ्य जांच, चिकित्सा परामर्श और समुदाय आधारित स्वास्थ्य कार्यक्रम संस्था के प्रमुख कार्यक्षेत्रों में शामिल हैं।
शिक्षा और कौशल विकास
संस्था छात्रवृत्ति, शिक्षा संबंधी पहल और युवाओं के कौशल विकास से जुड़े कार्यक्रमों के माध्यम से अवसर बढ़ाने का प्रयास करती है।
खेल और युवा प्रतिभाएं
खेलों में भागीदारी बढ़ाना, खिलाड़ियों को प्रशिक्षण और सहयोग देना तथा भारत में खेल संस्कृति को मजबूत करना भी इसके कार्यक्रमों का हिस्सा है।
आपदा राहत
प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत सामग्री, चेतावनी संबंधी जानकारी और प्रभावित समुदायों को सहायता पहुंचाने के कार्यक्रम चलाए जाते हैं।
इन क्षेत्रों के लिए खर्च की सटीक राशि जानने के लिए संबंधित वित्त वर्ष की CSR रिपोर्ट और फाउंडेशन की वार्षिक रिपोर्ट देखना जरूरी है। सभी क्षेत्रों में खर्च को एक ही आंकड़े के रूप में जोड़कर किसी एक संस्था के बजट का अनुमान लगाना उचित नहीं है।
क्या ₹2,248 करोड़ नीता अंबानी का निजी दान है?
नहीं। उपलब्ध आधिकारिक दस्तावेज इस रकम को रिलायंस इंडस्ट्रीज के वित्त वर्ष 2025-26 के कुल CSR खर्च के रूप में दर्ज करते हैं।
इसे नीता अंबानी की निजी संपत्ति से किया गया व्यक्तिगत दान बताने का आधार इन दस्तावेजों में नहीं मिलता।
नीता अंबानी रिलायंस फाउंडेशन की संस्थापक-अध्यक्ष हैं, जबकि CSR खर्च कंपनी की सामाजिक जिम्मेदारी से जुड़ा वित्तीय आंकड़ा है। दोनों बातों के बीच अंतर समझना जरूरी है।
रिलायंस फाउंडेशन के काम की जानकारी कहां देखें?
रिलायंस फाउंडेशन की आधिकारिक वेबसाइट पर उसकी वार्षिक रिपोर्ट, कार्यक्रमों और सामाजिक प्रभाव से जुड़ी जानकारी उपलब्ध है। वहीं रिलायंस इंडस्ट्रीज की वेबसाइट पर कंपनी की CSR रिपोर्ट और वार्षिक रिपोर्ट देखी जा सकती है।
इन दस्तावेजों को देखने से यह समझने में मदद मिलती है कि कंपनी का कुल CSR खर्च कितना है, किस तरह के कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं और संस्था कितने लोगों तक पहुंचने की रिपोर्ट देती है।
निष्कर्ष
रिलायंस फाउंडेशन के सामाजिक कार्यों को समझने के लिए दो आंकड़े खास हैं। पहला, रिलायंस इंडस्ट्रीज का वित्त वर्ष 2025-26 में 2,248 करोड़ रुपये का कुल CSR खर्च और दूसरा, संस्था की स्थापना से मार्च 2026 तक लगभग 9.69 करोड़ लोगों तक पहुंचने का रिपोर्टेड आंकड़ा।
लेकिन इन दोनों को एक ही बात नहीं समझना चाहिए। कंपनी का कुल CSR खर्च और रिलायंस फाउंडेशन को मिलने वाली राशि अलग-अलग वित्तीय आंकड़े हैं। इसी तरह, संस्था तक पहुंचने वाले लोगों की संचयी संख्या किसी एक साल में लाभ पाने वाले लोगों की संख्या के बराबर नहीं है।
सही तस्वीर जानने के लिए आधिकारिक वार्षिक रिपोर्ट, CSR रिपोर्ट और संबंधित वित्तीय दस्तावेजों को साथ पढ़ना सबसे उपयोगी तरीका है।
स्रोत: रिलायंस इंडस्ट्रीज की एकीकृत वार्षिक रिपोर्ट 2025-26, CSR रिपोर्ट 2025-26, एकीकृत वार्षिक रिपोर्ट 2024-25 और रिलायंस फाउंडेशन की आधिकारिक वेबसाइट।
अस्वीकरण: यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कंपनी और संस्था के दस्तावेजों पर आधारित जानकारी प्रस्तुत करता है। लोगों तक पहुंचने के आंकड़े संस्था की अपनी रिपोर्टिंग के अनुसार हैं।