Rahul Gandhi’s Tough Stance – लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने साफ कहा है कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद ही संसद में इस मुद्दे पर सार्थक चर्चा हो सकती है। संसद परिसर में मीडिया से बात करते हुए उन्होंने दावा किया कि जब वे बोलने के लिए खड़े हुए तो उन्हें रोका गया और माइक तक ले लिया गया….
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राहुल गांधी के मुताबिक छात्रों की तीन मुख्य मांगें हैं—शिक्षा मंत्री का इस्तीफा, पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई और प्रधानमंत्री की माफी। उन्होंने कहा कि इनमें सबसे अहम मांग धर्मेंद्र प्रधान का हटाया जाना है।
लोकसभा में क्या हुआ
शुक्रवार को लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जोरदार हंगामा किया। लगातार व्यवधान के कारण सदन पहले 12 बजे तक और फिर बाद में 27 जुलाई तक स्थगित कर दिया गया।
रिपोर्टों के मुताबिक विपक्ष ने संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू की चर्चा शुरू करने की अपील भी ठुकरा दी। सरकार की तरफ से कहा गया कि वह नीट पेपर लीक और शिक्षा सुधारों पर तुरंत चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन विपक्ष पहले मंत्री के इस्तीफे पर अड़ा रहा।
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विपक्ष की मांग
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी कहा कि निष्पक्ष और सार्थक चर्चा तभी संभव है जब शिक्षा मंत्री पद छोड़ें। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्र सबसे बड़ी मार झेल रहे हैं और सरकार ने शिक्षा संस्थानों को प्रचार का मंच बना दिया है।
विपक्षी नेताओं का कहना है कि जब तक धर्मेंद्र प्रधान जिम्मेदारी नहीं लेते, तब तक चर्चा का कोई अर्थ नहीं है। संसद परिसर में “वी वांट जस्टिस” के नारे लगाते हुए विपक्ष ने मकर द्वार पर प्रदर्शन किया।
सरकार का जवाब
संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष से अपील की कि वे चर्चा में भाग लें और सरकार को मुद्दे पर बहस करने दें। उनका कहना था कि विपक्ष चाहे तो अभी चर्चा शुरू हो सकती है और सरकार इसके लिए तैयार है।
रिजिजू ने यह भी कहा कि सोनम वांगचुक ने अपना अनशन समाप्त कर दिया है और सरकार कैबिनेट बैठक में एक सख्त कानून लाने की तैयारी कर रही है। सरकार की दलील है कि वह समाधान चाहती है, लेकिन विपक्ष राजनीतिक दबाव बना रहा है।
छात्रों का मुद्दा
इस टकराव की जड़ नीट पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताएं हैं। विपक्ष का कहना है कि छात्रों के साथ अन्याय हुआ है, इसलिए केवल औपचारिक जवाब नहीं, बल्कि नैतिक जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए।
खरगे ने यह भी कहा कि देश का युवा सड़कों पर इसलिए उतर रहा है क्योंकि पिछले वर्षों में शिक्षा व्यवस्था को नुकसान पहुंचाया गया है। यह बयान बताता है कि विपक्ष इस मुद्दे को केवल एक परीक्षा विवाद नहीं, बल्कि व्यापक शिक्षा संकट के तौर पर पेश कर रहा है।
राजनीतिक असर
राहुल गांधी का “माइक ले लिया” वाला दावा और इस्तीफे की शर्त ने टकराव को और तीखा बना दिया है। अब यह सिर्फ सदन की कार्यवाही का मामला नहीं, बल्कि सरकार बनाम विपक्ष की राजनीतिक लड़ाई बन चुका है।
दूसरी ओर, सरकार का कहना है कि विपक्ष चर्चा से भाग रहा है, जबकि विपक्ष का दावा है कि बिना मंत्री के हटे कोई चर्चा निष्पक्ष नहीं होगी। यही टकराव संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह माहौल गर्म कर रहा है।
आगे क्या
फिलहाल संकेत यही है कि विपक्ष धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़ा रहेगा और सरकार चर्चा के लिए दबाव बनाती रहेगी। जब तक दोनों पक्ष अपनी स्थिति नहीं बदलते, संसद में गतिरोध खत्म होने की संभावना कम दिखती है।
इस पूरे घटनाक्रम ने नीट विवाद को एक शैक्षणिक मुद्दे से ऊपर उठाकर राजनीतिक संकट का रूप दे दिया है।

