Prime Minister’s Video Messages – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वीडियो मैसेज के बाद CJP ने एक बार फिर केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर सीधा हमला बोला है। संगठन का कहना है कि पेपर लीक और परीक्षा गड़बड़ी के खिलाफ सरकार की सबसे सख्त कार्रवाई यही होगी कि धर्मेंद्र प्रधान को हटाया जाए…
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क्या कहा CJP ने?
CJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रंका ने प्रधानमंत्री के संदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “मोदी जी, धर्मेंद्र प्रधान को हटा दीजिए. यही सबसे सख़्त कार्रवाई है जो आप कर सकते हैं.” CJP का तर्क है कि अगर सरकार वास्तव में परीक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर है, तो जिम्मेदारी तय करनी चाहिए।
पार्टी के इस बयान से साफ है कि वे सिर्फ जांच या नए कानून की घोषणा से संतुष्ट नहीं हैं। उनका पूरा फोकस केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर है।
पीएम मोदी ने क्या कहा?
प्रधानमंत्री मोदी ने घोषणा की कि पेपर लीक के खिलाफ सख्त प्रावधान वाला बिल अगले हफ्ते संसद में लाया जाएगा। सरकार का दावा है कि NEET मामले के बाद फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने जैसे कदम उठाए जा चुके हैं और दोषियों को गिरफ्तार भी किया गया है।
यानी सरकार की तरफ से संदेश यह था कि सिस्टम में सुधार और तेज कार्रवाई के जरिए समस्या को सुलझाया जाएगा। लेकिन CJP ने इसे अधूरा जवाब बताते हुए इसे खारिज कर दिया।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी
CJP ने साफ कहा है कि सोनम वांगचुक के 26 दिन के अनशन के खत्म होने से उन्हें राहत जरूर मिली है, लेकिन दिल्ली के जंतर-मंतर पर उनका शांतिपूर्ण विरोध तब तक जारी रहेगा जब तक धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते।
संगठन का दावा है कि यह आंदोलन सिर्फ एक परीक्षा विवाद नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य और जवाबदेही का सवाल है। इसी वजह से वे इसे केवल प्रतीकात्मक प्रदर्शन नहीं, बल्कि लंबी लड़ाई के रूप में देख रहे हैं।
दिपके का तंज
CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने भी प्रधानमंत्री की घोषणा पर तंज कसते हुए एक तस्वीर साझा की, जिसमें एक व्यक्ति बिना बाउंड्री वॉल वाले कंपाउंड के गेट पर ताला लगाता दिख रहा है। इस पोस्ट को प्रस्तावित कानून पर प्रतीकात्मक कटाक्ष माना जा रहा है।
दिपके ने सोनम वांगचुक को भी उनके 26 दिन के अनशन और त्याग के लिए धन्यवाद दिया और कहा कि उनकी वजह से पूरे देश की अंतरात्मा जागी है।
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सोनम वांगचुक की भूमिका
रिपोर्टों के मुताबिक, केंद्र सरकार ने वांगचुक को भरोसा दिलाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होगी। साथ ही परीक्षा सुधार और प्रभावित छात्रों के लिए मुआवजे जैसे मुद्दों पर विचार करने की बात भी कही गई। इसके बाद वांगचुक ने अपनी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल समाप्त की।
CJP ने इसे आंशिक राहत माना, लेकिन कहा कि जब तक शिक्षा मंत्री की जिम्मेदारी तय नहीं होती, आंदोलन खत्म नहीं होगा।
राजनीतिक संदेश
इस पूरे विवाद में CJP का संदेश बहुत साफ है: वे सिर्फ कानून या घोषणाओं से नहीं, बल्कि जवाबदेही से संतुष्ट होंगे। इसलिए उनका फोकस अब भी धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर है।
प्रधानमंत्री के वीडियो संदेश के जवाब में दिया गया यह तंज, सरकार पर दबाव बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा लगता है। इससे साफ है कि पेपर लीक का मुद्दा अब सिर्फ परीक्षा सुधार का नहीं, बल्कि सीधा राजनीतिक टकराव बन चुका है।
निष्कर्ष
फिलहाल स्थिति यह है कि सरकार नए बिल और कड़े प्रावधानों की बात कर रही है, जबकि CJP कह रहा है कि असली कार्रवाई धर्मेंद्र प्रधान को हटाना होगी। जंतर-मंतर का आंदोलन अभी थमा नहीं है और विपक्षी तंज भी लगातार तेज हो रहे हैं।
यानी मामला अब सिर्फ NEET या पेपर लीक तक सीमित नहीं, बल्कि सरकार की जवाबदेही और राजनीतिक नैरेटिव की लड़ाई बन गया है।

