PNB Branch Audit Alert – पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की ग्रेटर नोएडा शाखा में ग्राहकों के खातों से कथित तौर पर करोड़ों रुपये के अनधिकृत ट्रांसफर का मामला सामने आने के बाद बैंक के अधिकारी संगठन ने देशभर की करीब 10,500 शाखाओं का ऑडिट कराने की मांग की है। संगठन का कहना है कि केवल कुछ कर्मचारियों को निलंबित करने से ऐसी घटनाओं की वजह सामने नहीं आएगी। बैंक को शाखाओं में स्टाफ की उपलब्धता, काम का बोझ, प्रशिक्षण और सुरक्षा व्यवस्था की भी समीक्षा करनी चाहिए…
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ऑल इंडिया पंजाब नेशनल बैंक ऑफिसर्स फेडरेशन (AIPNBOF) ने 30 अक्टूबर को बैंक के मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO को पत्र लिखकर यह मांग की। यह संगठन की मांग है; उपलब्ध रिपोर्टों में अभी यह पुष्टि नहीं है कि PNB प्रबंधन ने सभी शाखाओं के ऑडिट का फैसला कर लिया है।
क्या है ग्रेटर नोएडा PNB फ्रॉड का मामला?
ग्रेटर नोएडा के ऐच्छर गांव स्थित PNB शाखा में खाताधारकों ने शिकायत की थी कि उनके सेविंग अकाउंट और फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) से बिना अनुमति रकम ट्रांसफर की गई। शुरुआती शिकायतों में 21 खाताधारकों से जुड़े 11.24 करोड़ रुपये से अधिक के कथित नुकसान का उल्लेख हुआ। कुछ ग्राहकों ने इससे ज्यादा रकम प्रभावित होने का दावा भी किया है, लेकिन कुल नुकसान की अंतिम पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
बैंक के एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से आई रिपोर्ट में कहा गया था कि शुरुआती आकलन में रकम 10 करोड़ रुपये से कम थी। वहीं, खाताधारकों के दावों और शिकायतों में 11.24 करोड़ रुपये से अधिक का आंकड़ा सामने आया। कुछ ग्राहकों ने करीब 35 करोड़ रुपये तक प्रभावित होने की बात कही, लेकिन इस आंकड़े की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
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यूनियन ने 10,500 शाखाओं के ऑडिट की मांग क्यों की?
AIPNBOF ने PNB प्रबंधन से देशभर की लगभग 10,500 शाखाओं का व्यापक और निष्पक्ष ऑडिट कराने की मांग की है। संगठन के मुताबिक, समीक्षा में इन बिंदुओं को शामिल किया जाना चाहिए:
- प्रत्येक शाखा में स्वीकृत पदों और वास्तव में उपलब्ध कर्मचारियों की संख्या की तुलना।
- शाखा के कारोबार, ग्राहक संख्या, स्थान और काम के बोझ के हिसाब से स्टाफ की जरूरत का आकलन।
- मौजूदा स्टाफिंग नियमों की समीक्षा और यह जांच कि वे शाखाओं के कामकाज के लिए पर्याप्त हैं या नहीं।
- बैंकिंग सिस्टम, कैश मैनेजमेंट, सुरक्षा और फ्रॉड रोकने से जुड़ी कर्मचारियों की ट्रेनिंग का मूल्यांकन।
- कॉरपोरेट, जोनल और सर्किल कार्यालयों की निगरानी, मार्गदर्शन और संसाधन उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी की समीक्षा।
यूनियन का कहना: जवाबदेही हर स्तर पर तय हो
फेडरेशन ने कहा है कि वह किसी भी कर्मचारी को बचाने की कोशिश नहीं कर रहा। अगर किसी कर्मचारी की लापरवाही, गलत काम या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो कार्रवाई होनी चाहिए। हालांकि, संगठन का कहना है कि जांच में केवल शाखा स्तर के कर्मचारियों तक सीमित न रहकर वरिष्ठ अधिकारियों और प्रशासनिक व्यवस्था की भूमिका भी देखी जानी चाहिए।
फेडरेशन ने यह भी कहा कि बिना व्यापक जांच के जल्दबाजी में की गई कार्रवाई से समस्या की जड़ सामने नहीं आएगी और भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने में मदद नहीं मिलेगी। संगठन ने ऑडिट के निष्कर्ष और जिम्मेदार पाए गए अधिकारियों पर की गई कार्रवाई की जानकारी साझा करने की मांग भी की है।
बैंक ने अब तक क्या कार्रवाई की?
ग्रेटर नोएडा शाखा के मामले में PNB ने कई कर्मचारियों को निलंबित किया है और जांच के लिए CBI से संपर्क किया है। रिपोर्टों के अनुसार, बैंक ने ग्राहकों की शिकायतों की जांच शुरू की और वास्तविक दावों का भुगतान करने का आश्वासन दिया। 30 अक्टूबर की रिपोर्ट में बैंक की ओर से तीन दावों के तहत कुल 43 लाख रुपये का निपटारा किए जाने की जानकारी दी गई थी।
पुलिस ने भी मामले में शिकायत दर्ज कर जांच शुरू की है। कथित अनधिकृत ट्रांसफर, संबंधित कर्मचारियों की भूमिका और ग्राहकों के दावों की वास्तविक रकम की जांच जारी है। किसी व्यक्ति की जिम्मेदारी या कुल नुकसान को अंतिम रूप से तय करने के लिए जांच के निष्कर्षों का इंतजार करना होगा।
क्या सभी PNB शाखाओं का ऑडिट होगा?
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सभी करीब 10,500 शाखाओं का ऑडिट कराने की मांग अधिकारी संगठन ने की है। यह कहना जल्दबाजी होगी कि बैंक ने इस मांग को स्वीकार कर लिया है या देशव्यापी ऑडिट शुरू हो चुका है।
अगर प्रबंधन इस मांग पर फैसला करता है, तो ऑडिट का दायरा, समयसीमा और जांच के मानक बैंक की आधिकारिक घोषणा से स्पष्ट होंगे।
निष्कर्ष
ग्रेटर नोएडा की PNB शाखा में ग्राहकों के खातों से कथित अनधिकृत ट्रांसफर के मामले ने बैंक की आंतरिक निगरानी, स्टाफिंग और सुरक्षा प्रक्रियाओं पर सवाल खड़े किए हैं। AIPNBOF ने इसी पृष्ठभूमि में देशभर की करीब 10,500 शाखाओं का निष्पक्ष ऑडिट कराने की मांग की है।
अभी यह मांग है, न कि सभी शाखाओं के ऑडिट का पुष्ट निर्णय। ग्रेटर नोएडा मामले में जांच और ग्राहकों के दावों का सत्यापन जारी है।
