JPSC-JSSC Recruitment Controversy – झारखंड में JPSC-JSSC समेत विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार जारी है। रांची में प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों का कहना है कि विवाद केवल 14वीं JPSC संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्य की पूरी भर्ती व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो गए हैं। छात्र परीक्षा रद्द करने, स्वतंत्र जांच कराने और भविष्य की भर्ती प्रक्रिया में व्यापक सुधार की मांग कर रहे हैं….
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छात्र प्रतिनिधिमंडल ने सरकार के सामने अपनी मांगों का विस्तृत प्रस्ताव रखा है। इसमें CBI और ED से जांच कराने तथा 90 दिनों के भीतर जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग प्रमुख है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि राज्य की जांच एजेंसियों की मौजूदा कार्रवाई से उनका भरोसा पूरी तरह बहाल नहीं हुआ है, इसलिए केंद्रीय एजेंसियों या स्वतंत्र न्यायिक पैनल से जांच कराई जानी चाहिए।
किन परीक्षाओं को रद्द करने की मांग?
छात्रों की मांग है कि TDPL एजेंसी द्वारा पिछले चार वर्षों में आयोजित सभी भर्ती परीक्षाओं की समीक्षा कर उन्हें रद्द किया जाए। जिन परीक्षाओं में TDPL के मार्केटिंग मैनेजर अभय कुमार तिवारी की कथित भूमिका या संबद्धता रही है, उन्हें भी निरस्त करने की मांग की गई है। हालांकि, इन आरोपों की जांच अभी जारी है और किसी व्यक्ति की भूमिका को अंतिम रूप से साबित नहीं माना जा सकता।
प्रदर्शनकारी 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा को रद्द कर दोबारा कराने की मांग भी कर रहे हैं। इसके अलावा JSSC-CGL समेत अन्य विवादित परीक्षाओं की स्वतंत्र जांच और आवश्यकता पड़ने पर पुनर्परीक्षा कराने की मांग रखी गई है। कुछ छात्र संगठनों ने पिछले सात वर्षों में JPSC और JSSC की ओर से आयोजित सभी भर्ती परीक्षाओं की जांच की मांग भी की है।
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छात्रों का कहना है कि यदि किसी परीक्षा की प्रक्रिया, OMR शीट, परीक्षा संचालन या चयन सूची पर गंभीर संदेह हो, तो केवल कुछ अभ्यर्थियों या अधिकारियों पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं होगी। पूरी प्रक्रिया की समीक्षा करके यह तय किया जाना चाहिए कि परीक्षा निष्पक्ष तरीके से हुई थी या नहीं।
CBI और ED जांच की मांग
छात्र प्रतिनिधिमंडल ने पूरे मामले की CBI और ED से जांच कराने की मांग की है। उनका आरोप है कि कथित अनियमितताओं में केवल परीक्षा संचालन ही नहीं, बल्कि पैसों के लेनदेन और प्रभावशाली लोगों की संभावित भूमिका की भी जांच जरूरी है।
प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि जांच 90 दिनों के भीतर पूरी हो और रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। उनका तर्क है कि लंबे समय तक चलने वाली जांच से अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटक जाता है। हालांकि, किसी भी जांच को जल्दबाजी में पूरा करने के बजाय निष्पक्ष तरीके से सभी दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन की जांच करना भी जरूरी है।
परीक्षा सुधार से जुड़ी मांगें
छात्रों ने केवल पुराने मामलों में कार्रवाई की मांग नहीं की, बल्कि भर्ती व्यवस्था में संस्थागत सुधार का प्रस्ताव भी रखा है। उनकी प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:
- सरकार नियमित अकादमिक और भर्ती कैलेंडर जारी करे, ताकि अभ्यर्थियों को परीक्षा, परिणाम और नियुक्ति की संभावित तारीखों की स्पष्ट जानकारी मिल सके।
- भर्ती घोटालों और परीक्षा संबंधी विवादों के त्वरित निपटारे के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया जाए।
- एक हाई लेवल कमेटी बनाई जाए, जो पिछली परीक्षाओं में हुई अनियमितताओं की जांच करके भविष्य के सुधारों पर रिपोर्ट दे।
- JPSC और JSSC में पारदर्शी तथा निष्पक्ष छवि वाले अधिकारियों की नियुक्ति की जाए।
- परीक्षा प्रक्रिया के अलग-अलग चरणों के लिए अलग एजेंसियों का चयन किया जाए, ताकि पूरी प्रक्रिया का नियंत्रण किसी एक निजी एजेंसी के पास न रहे।
- परीक्षा संचालन के लिए विश्वसनीय एजेंसी का चयन GEM पोर्टल के माध्यम से किया जाए।
कुछ प्रदर्शनकारी OMR शीट में ‘नॉट अटेम्प्टेड’ यानी प्रश्न का उत्तर नहीं देने का पांचवां विकल्प शामिल करने की मांग भी कर रहे हैं। उनका कहना है कि इससे खाली छोड़े गए प्रश्न और गलत तरीके से भरे गए विकल्पों को लेकर होने वाली गड़बड़ी की संभावना कम हो सकती है।
प्रतिनिधिमंडल में कौन-कौन शामिल?
छात्र प्रतिनिधिमंडल में रविंद्र पासवान, पीयूष कुमार सिंह, रविंद्र कुमार रवि, राजेश प्रसाद, नीतू कुजूर, कार्तिक सोरेन, संदीप कुमार और शालू सिंह शामिल हैं। अभिभावकों की ओर से पत्रकार प्रतिनिधि शंभूनाथ चौधरी और विकास वर्मा तथा कानूनविद अजीत कुमार भी प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा रहे।
छात्र नेताओं का कहना है कि आंदोलन केवल कुछ संगठनों या नेताओं का नहीं, बल्कि उन हजारों अभ्यर्थियों का है जिन्होंने सरकारी नौकरी की तैयारी में वर्षों लगाए हैं। उनके मुताबिक, परीक्षा में देरी या कथित गड़बड़ी का सीधा असर उम्र सीमा, आर्थिक स्थिति और करियर पर पड़ता है।
10 अगस्त को विधानसभा घेराव की चेतावनी
प्रदर्शनकारी छात्रों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक फैसला नहीं लेती है, तो 10 अगस्त को हजारों छात्र विधानसभा का घेराव करेंगे। छात्र नेता राधे कुमार ने कहा कि उनकी मुख्य मांग JPSC, JSSC-CGL और TDPL के जरिए आयोजित विवादित भर्ती परीक्षाओं को रद्द करना है।
रांची में छात्र पहले से ही अनिश्चितकालीन धरने और सत्याग्रह पर बैठे हैं। कुछ अभ्यर्थियों ने मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने और भूख हड़ताल करने की भी चेतावनी दी है।
BJP विधायकों का प्रदर्शन
इस विवाद ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। गुरुवार को BJP विधायकों ने झारखंड विधानसभा के बाहर राज्य सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। BJP विधायक आलोक चौरसिया ने कहा कि पार्टी JPSC, JSSC और अन्य भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ आंदोलन कर रहे छात्रों के साथ खड़ी है।
BJP ने आरोप लगाया कि भर्ती प्रक्रियाओं में भ्रष्टाचार के कारण छात्रों का भविष्य संकट में पड़ गया है। दूसरी ओर, सरकार ने छात्रों से बातचीत के लिए समिति गठित की है और समाधान खोजने की बात कही है।
निष्कर्ष
JPSC-JSSC विवाद अब केवल परीक्षा रद्द करने की मांग तक सीमित नहीं रहा। छात्र स्वतंत्र जांच, समयबद्ध कार्रवाई, परीक्षा कैलेंडर, फास्ट ट्रैक कोर्ट और पारदर्शी भर्ती व्यवस्था चाहते हैं। सरकार के सामने चुनौती है कि वह जांच को निष्पक्ष रखते हुए अभ्यर्थियों का भरोसा भी बहाल करे। अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा, लेकिन इतना स्पष्ट है कि भर्ती प्रक्रिया में व्यापक सुधार के बिना यह आंदोलन आसानी से समाप्त होने वाला नहीं है।

