Jharkhand Student Protest – झारखंड लोक सेवा आयोग यानी JPSC की 14वीं प्रारंभिक परीक्षा समेत अन्य भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच अब प्रवर्तन निदेशालय यानी ED तक पहुंच गई है। केंद्रीय एजेंसी ने मनी लॉन्ड्रिंग के संदेह में ECIR दर्ज की है। यह कार्रवाई CID में दर्ज FIR संख्या 16/26 के आधार पर की गई है। ED की एंट्री के बाद अब जांच केवल परीक्षा संचालन, OMR और चयन प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि कथित आर्थिक लेन-देन और पैसों के नेटवर्क की भी पड़ताल होगी….

इसी बीच रांची में प्रदर्शनकारी छात्र सोमवार को विधानसभा मार्च के लिए जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से निकल गए। छात्रों का आंदोलन दो सप्ताह से अधिक समय से जारी है। उनकी मांग है कि 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा और अन्य विवादित भर्ती परीक्षाओं की स्वतंत्र जांच कराई जाए, दोषियों पर कार्रवाई हो और भर्ती प्रक्रिया में व्यापक सुधार किया जाए।

ECIR दर्ज होने का मतलब क्या है?

ECIR को सामान्य भाषा में ED की जांच की शुरुआती रिपोर्ट माना जाता है। यह पुलिस की FIR जैसी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध दस्तावेज नहीं होती, लेकिन इसके आधार पर ED मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े पहलुओं की जांच शुरू कर सकती है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि कथित परीक्षा धांधली में पैसे का इस्तेमाल हुआ या नहीं, रकम किससे ली गई, किसके खातों में पहुंची और उसे आगे कहां निवेश या ट्रांसफर किया गया।

महत्वपूर्ण बात यह है कि ECIR दर्ज होना किसी व्यक्ति को दोषी साबित नहीं करता। यह जांच की शुरुआत है। दोष सिद्ध होने के लिए एजेंसी को आर्थिक लेन-देन, दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्य अदालत के सामने पेश करने होंगे।

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Jharkhand Student Protest
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पांच सदस्यीय टीम पहुंची रांची

मामले की जांच के लिए ED की रांची यूनिट से पांच सदस्यीय टीम पहुंची है। इस टीम में एक असिस्टेंट डायरेक्टर और चार इंस्पेक्टर शामिल हैं। टीम कथित परीक्षा घोटाले से जुड़े वित्तीय दस्तावेज, बैंक खातों, संपत्ति, कंपनियों और संदिग्ध लेन-देन की जांच कर सकती है।

ED जरूरत पड़ने पर CID से केस डायरी, गिरफ्तार आरोपियों के बयान, जब्त डिजिटल उपकरणों और वित्तीय रिकॉर्ड की जानकारी ले सकती है। एजेंसी उन लोगों से भी पूछताछ कर सकती है, जिनके नाम कथित तौर पर पैसे के लेन-देन या परीक्षा में मदद दिलाने के नेटवर्क से जुड़े हैं।

सरकार के आश्वासन से पहले ED की एंट्री

रविवार को सरकार के प्रतिनिधियों ने छात्रों के प्रतिनिधिमंडल से बातचीत की थी। बातचीत के दौरान सरकार ने कहा था कि मामले की जांच CID कर रही है और अगर वित्तीय घोटाले से जुड़ा कोई ठोस पहलू सामने आता है तो ED से जांच कराने का अनुरोध किया जाएगा।

लेकिन सरकार के इस आश्वासन से पहले ही ED ने ECIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी। इससे मामले की गंभीरता और राजनीतिक महत्व दोनों बढ़ गए हैं। छात्रों का कहना है कि वे केवल राज्य एजेंसी की जांच से संतुष्ट नहीं हैं और केंद्रीय एजेंसियों से निष्पक्ष जांच की मांग लंबे समय से कर रहे हैं।

19 आरोपी गिरफ्तार

JPSC की 14वीं PT परीक्षा में कथित गड़बड़ी को लेकर अब तक 19 आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई है। CID की जांच में परीक्षा संचालन से जुड़े लोगों, कथित बिचौलियों, अभ्यर्थियों और निजी एजेंसी से जुड़े व्यक्तियों की भूमिका की पड़ताल की जा रही है।

छात्रों का आरोप है कि भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताएं केवल परीक्षा केंद्रों तक सीमित नहीं हैं। उनका दावा है कि इसमें पैसे लेकर चयन कराने, प्रश्नपत्र या उत्तर उपलब्ध कराने और OMR या परिणाम प्रक्रिया में हेरफेर जैसे पहलू भी शामिल हो सकते हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

छात्र क्यों कर रहे विधानसभा मार्च?

प्रदर्शनकारी छात्र 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा रद्द करने, दोबारा परीक्षा कराने और पूरे मामले की CBI तथा ED से जांच की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा वे JSSC-CGL और TDPL एजेंसी से जुड़ी अन्य परीक्षाओं की भी समीक्षा चाहते हैं।

छात्रों का कहना है कि परीक्षा में कथित गड़बड़ी से लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित होता है। कई उम्मीदवार वर्षों तक तैयारी करते हैं, कोचिंग और रहने पर बड़ी रकम खर्च करते हैं। यदि परीक्षा प्रक्रिया पर संदेह पैदा हो जाए तो केवल परिणाम जारी कर देने से समस्या का समाधान नहीं होता।

छात्र प्रतिनिधिमंडल नियमित भर्ती कैलेंडर, फास्ट ट्रैक कोर्ट, स्वतंत्र हाई लेवल कमेटी और परीक्षा संचालन में पारदर्शिता की मांग भी कर रहा है। उनका कहना है कि निजी एजेंसी के चयन से लेकर प्रश्नपत्र, OMR, रिजल्ट और नियुक्ति तक हर चरण की निगरानी होनी चाहिए।

सुरक्षा व्यवस्था कड़ी

विधानसभा मार्च को देखते हुए झारखंड पुलिस ने विधानसभा परिसर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी है। प्रशासन ने निषेधाज्ञा लागू की है और प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात किए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, सोमवार को रांची में करीब 1,500 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई।

पुलिस और प्रशासन के सामने चुनौती यह है कि छात्रों के विरोध को शांतिपूर्ण तरीके से नियंत्रित किया जाए और किसी भी स्थिति में टकराव न हो। वहीं, प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर कायम हैं और सरकार से लिखित आश्वासन चाहते हैं।

राजनीतिक असर भी बढ़ा

JPSC-JSSC विवाद अब विधानसभा के मानसून सत्र में भी बड़ा मुद्दा बन सकता है। विपक्षी दल सरकार पर भर्ती प्रक्रिया में भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही के आरोप लगा रहे हैं। सरकार की ओर से बातचीत और जांच का भरोसा दिया जा रहा है, लेकिन छात्रों का कहना है कि उन्हें स्पष्ट समयसीमा और ठोस कार्रवाई चाहिए।

ED की जांच से राजनीतिक दबाव और बढ़ सकता है, क्योंकि अब कथित परीक्षा गड़बड़ी के साथ मनी ट्रेल का सवाल भी जुड़ गया है। अगर आर्थिक लेन-देन के ठोस साक्ष्य मिलते हैं तो जांच का दायरा और विस्तृत हो सकता है।

निष्कर्ष

JPSC-JSSC भर्ती विवाद में ED की ओर से ECIR दर्ज होना जांच का महत्वपूर्ण नया चरण है। अब एजेंसी यह पता लगाएगी कि कथित परीक्षा धांधली के पीछे पैसे का लेन-देन, अवैध कमाई या मनी लॉन्ड्रिंग का कोई नेटवर्क था या नहीं।

इधर छात्रों का विधानसभा मार्च सरकार पर कार्रवाई का दबाव बढ़ा रहा है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या जांच एजेंसियां कथित आर्थिक नेटवर्क का पर्दाफाश कर पाएंगी और क्या सरकार छात्रों की परीक्षा रद्द करने तथा भर्ती सुधारों से जुड़ी मांगों पर समयबद्ध फैसला लेगी।

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