India’s 1st Flex Fuel Car – भारत में गन्ने और अनाज से बनने वाले इथेनॉल (Ethanol) से गाड़ियां चलाने के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं। सरकार फ्लेक्स फ्यूल को काफी प्रमोट कर रही है। लेकिन हकीकत में इस योजना को पहला बड़ा झटका लग गया है।
देश की पहली फ्लेक्स-फ्यूल कार मारुति वैगनआर बायोफ्लैक्स (Maruti WagonR BioFlex) के लॉन्च होने के बाद शुरुआती हफ्तों में पूरे देश में इसके सिर्फ 3 रजिस्ट्रेशन हुए हैं, मतलब कि इसकी सिर्फ तीन यूनिट्स ही बिकी हैं…
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सिर्फ 3 कारें बिकने की सबसे बड़ी वजह
मारुति वेगनआर बायोफ्लैक्स को 4 जून 2026 को लॉन्च किया गया था और 17 जून से इसकी डिलीवरी शुरू हुई थी। सरकारी वाहन (Vahan) पोर्टल के मुताबिक 29 जून तक केवल 3 गाड़ियां रजिस्टर हुईं।
इसकी मुख्य वजहें ये हैं
1. तेल पंपों की कमी
यह कार E85 फ्यूल कंपैटिबल है, यानी कि यह 85% इथेनॉल मिक्स पेट्रोल पर चल सकती है। सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि पूरे देश में इस समय E85 पेट्रोल बेचने वाले सिर्फ 48 पेट्रोल पंप ही हैं, जिनमें से ज्यादातर दिल्ली-एनसीआर और मुंबई के आसपास ही हैं।
ऐसे में इन शहरों के बाहर रहने वाले ग्राहकों के लिए इस कार को खरीदना बेमतलब है।
2. महंगी कीमत
इस कार की एक्स-शोरूम कीमत ₹7.24 लाख है, जो इसके आम पेट्रोल मॉडल से करीब ₹74,000 ज्यादा महंगी है। अपनी कीमत में यह फ्लेक्स-फ्यूल कार पेट्रोल मॉडल से महंगी है।
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क्या वाकई इथेनॉल से पैसे बचते हैं?
ऐसे तो इथेनॉल बहुत फायदेमंद लगता है। E85 फ्यूल साधारण पेट्रोल से करीब ₹20 सस्ता है। लेकिन इसका एक दूसरा पहलू भी है।
- कम माइलेज: इथेनॉल में पेट्रोल के मुकाबले कम ऊर्जा होती है। इसका मतलब है कि जब कार ज्यादा इथेनॉल वाले तेल पर चलेगी, तो उसका माइलेज कम हो जाएगा।
- ग्राहकों को डर: मारुति सुजुकी ने अभी तक यह साफ नहीं किया है कि E85 तेल पर यह कार एक लीटर में कितने किलोमीटर चलेगी। इसलिए ग्राहकों को डर है कि तेल सस्ता होने के बाद भी कम माइलेज की वजह से उनको कोई खास फायदा नहीं होगा।
सिर्फ कार ही नहीं, बाइकें भी फ्लॉप
इथेनॉल या फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों की यह धीमी शुरुआत सिर्फ मारुति के साथ नहीं है, बल्कि बाइक कंपनियों का हाल भी ऐसा ही है।
- रिशलेन की रिपोर्ट के मुताबिक अक्टूबर 2024 में लॉन्च हुई होंडा की CB300F फ्लेक्स-फ्यूल बाइक की साल 2026 की पहली छमाही में 30 यूनिट्स से भी कम बिकी हैं।
- 2025 की शुरुआत में आई सुजुकी की Gixxer SF 250 FFV का तो अभी तक खाता भी नहीं खुला है।
- इससे पहले 2019 में टीवीएस ने 100% इथेनॉल वाली Apache RTR 200 Fi E100 मार्केट में उतारी थी, लेकिन देश में इथेनॉल पंप न होने के कारण वह भी पूरी तरह फ्लॉप हो गई।
मारुति सुजुकी का क्या कहना है?
मारुति सुजुकी का कहना है कि इस तकनीक को सिर्फ शुरुआती हफ्तों की बिक्री के आंकड़ों से नहीं आंका जाना चाहिए। भारत के लिए कच्चे तेल का आयात कम करना और किसानों की आय बढ़ाना एक राष्ट्रीय प्राथमिकता है।
ऐसी बड़ी तकनीकों को लंबा समय लगता है। जब सरकार, तेल कंपनियां और ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री मिलकर काम करेंगी, तब जाकर यह इकोसिस्टम मजबूत होगा।
निष्कर्ष
सरकार फ्लेक्स-फ्यूल को बढ़ावा दे रही है। कंपनियां भी मार्केट में फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियां ला रही हैं। ऐसे में यह देखना होगा कि मार्केट में इन गाड़ियों की बिक्री होती है या नहीं।
अगर E85 पेट्रोल पंपों की संख्या बढ़ती है, कीमतों में संतुलन आता है और माइलेज के बारे में साफ जानकारी मिलती है, तो फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों की बिक्री में धीरे-धीरे उम्मीद की नई रौनक आ सकती है। लेकिन अभी यह तकनीक ज्यादातर इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी की मार में है, न कि कार की तकनीक या कंपनी की मंशा की।
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