गोरखपुर में हैरान करने वाला खुलासा – उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। जीएसटी टीम जब 100 करोड़ सालाना टर्नओवर वाली फर्म और 28 करोड़ रुपए टैक्स बकाया वाले शख्स की जांच करने पहुंची, तो सामने आया कि वह कथित बिजनेस मैन असल में पंचर की दुकान चलाने वाला निकला…
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घटना के बाद स्थानीय पुलिस ने थाने में तहरीर लेकर मुकदमा दर्ज कराया है। पुलिस मामले की जांच में जुटी है, जबकि जीएसटी की टीम भी आगे की कार्रवाई में लगी हुई है। फिलहाल आरोपी फरार बताया जा रहा है।
क्या है मामला
यह मामला एम्स थाना क्षेत्र के रामपुर में बुजुर्ग गांव का बताया जा रहा है। यहां रहने वाले राज प्रजापति को केंद्रीय जीएसटी विभाग की तरफ से कुछ दिनों पहले एक सम्मन मिला था, जिसमें लिखा था कि उनकी फर्म का 28 करोड़ रुपए टैक्स बकाया है और समय रहते रकम जमा कर दी जाए, वरना कार्रवाई होगी।
इसके बाद शनिवार को जीएसटी विभाग की टीम अचानक उसके घर पहुंची और जांच शुरू की। जांच के दौरान टीम को यह पता चला कि जिस शख्स के नाम पर यह बड़ा टैक्स बकाया दिख रहा है, वह तो एक पंचर की दुकान चलाता है। यह जानकर जीएसटी टीम भी हैरान रह गई और राज प्रजापति से पूछताछ शुरू की।
कैसे खुला फर्जीवाड़ा
बताया गया कि जीएसटी विभाग की टीम को वर्ष 2025 में यह पता चला था कि गोरखपुर की एक फर्म का 100 करोड़ का टर्नओवर है और उस पर 28 करोड़ रुपए जीएसटी बकाया है। इसके बाद फर्म के मालिक के नाम सम्मन जारी किया गया।
जब कुछ दिनों तक कोई जवाब नहीं आया, तो टीम शनिवार को उसके घर पहुंची। पूछताछ में राज ने बताया कि 2024 में उसने अपनी बहन की शादी के लिए गांव के एक व्यक्ति से कर्ज लिया था। कर्ज के नाम पर उस व्यक्ति ने उससे आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक पासबुक सहित कई दस्तावेज जमा करा लिए थे। साथ ही दो कागजों पर सिग्नेचर कराए गए और एक वीडियो भी बनाया गया।
राज के अनुसार, उसे इस बात का अंदाजा नहीं था कि उसके दस्तावेजों का इस्तेमाल किस काम में होने वाला है। उसे लगा कि कर्ज लेने के लिए ही ये कागजात लिए जा रहे हैं।
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कंपनी खोलकर हुआ खेल
पूछताछ के बाद जीएसटी विभाग ने पूरा मामला समझ लिया। जांच में सामने आया कि जिन दस्तावेजों के आधार पर राज प्रजापति की पहचान इस्तेमाल की गई, उसी के नाम से मेसर्स गढ़ प्राइवेट लिमिटेड टेक्सटाइल नाम की कंपनी खोल दी गई। इसी कंपनी पर 28 करोड़ रुपए जीएसटी बकाया दिखाया गया।
इसके बाद विभाग की आगे की जांच में यह भी पता चला कि जिस व्यक्ति ने राज के दस्तावेज लेकर यह फर्जी कंपनी खड़ी की थी, वह कमाई करने के बाद कंपनी बंद कर फरार हो चुका है। जीएसटी वसूली के लिए जब टीम राज के घर पहुंची, तब जाकर यह पूरा फर्जीवाड़ा सामने आया।
पुलिस में शिकायत, जांच जारी
इस घटना के बाद राज प्रजापति ने स्थानीय पुलिस थाने में तहरीर देकर मुकदमा दर्ज कराया है। पुलिस अब मामले की जांच कर रही है। एम्स थाने के प्रभारी के मुताबिक, पीड़ित की तहरीर पर जांच-पड़ताल जारी है।
फिलहाल आरोपी फरार है और उसकी तलाश की जा रही है। यह मामला दिखाता है कि किसी के दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल कर बड़ा वित्तीय फर्जीवाड़ा किया जा सकता है, इसलिए पहचान से जुड़े कागजात किसी को देने से पहले सावधानी बेहद जरूरी है।
क्या सीख मिलती है
ऐसे मामलों में सबसे बड़ी सीख यही है कि आधार, पैन, बैंक पासबुक जैसे दस्तावेज कभी भी किसी अनजान या संदिग्ध व्यक्ति को बिना पूरी जानकारी के नहीं देने चाहिए। एक बार दस्तावेज गलत हाथों में चले जाएं, तो उसका इस्तेमाल गंभीर फर्जीवाड़े में किया जा सकता है।
इस घटना ने यह भी साफ कर दिया है कि टैक्स और कंपनी रजिस्ट्रेशन से जुड़े मामलों में पहचान की जांच बेहद जरूरी होती है, वरना किसी निर्दोष व्यक्ति को भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
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