Full Privatization of IDBI Bank – भारत सरकार ने IDBI बैंक की रणनीतिक बिक्री को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद बैंक का नियंत्रण निजी हाथों में चला जाएगा और यह पूरी तरह प्राइवेट सेक्टर बैंक बन जाएगा।

हालांकि, इस फैसले के बाद सबसे बड़ा सवाल IDBI बैंक के कर्मचारियों की नौकरी, सेवा शर्तों और पेंशन को लेकर उठ रहा है। इस पर सरकार ने साफ तौर पर कहा है कि मौजूदा कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के हित पूरी तरह सुरक्षित रखे गए हैं।

निवेश और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग, यानी DIPAM के सचिव अरुणिश चावला ने कहा है कि शेयर खरीद समझौते की शर्तों में कर्मचारियों की सेवा शर्तों और पेंशन लाभों की सुरक्षा सुनिश्चित की गई है। उनके मुताबिक, IDBI बैंक को एक ‘गोइंग कंसर्न’ यानी चालू इकाई के रूप में पुनर्गठित किया जा रहा है।

IDBI बैंक की बिक्री में क्या मंजूर हुआ?

केंद्र सरकार ने 14 अक्टूबर को IDBI बैंक में 60.72% हिस्सेदारी की बिक्री को मंजूरी दी है। इसमें भारत सरकार अपनी 30.48% हिस्सेदारी बेचेगी, जबकि LIC अपनी 30.24% हिस्सेदारी बेचेगी। इस तरह कुल 60.72% हिस्सेदारी नए निवेशक को दी जाएगी।

रिपोर्ट्स के अनुसार, यह सौदा कनाडा की Fairfax Financial Holdings की इकाई Canada Inc को करीब ₹53,000 करोड़ यानी लगभग 5.6 अरब डॉलर में हो सकता है। प्रस्तावित सौदे की कीमत प्रति शेयर ₹81 रखी गई है

सौदा पूरा होने से पहले भारतीय रिजर्व बैंक, यानी RBI की मंजूरी भी जरूरी होगी। DIPAM सचिव के मुताबिक, RBI की मंजूरी के बाद शेयर खरीद समझौते पर हस्ताक्षर होंगे और इसके बाद सौदे को पूरा किया जा सकेगा।

क्या कर्मचारियों की नौकरी सुरक्षित रहेगी?

IDBI बैंक के कर्मचारियों की सबसे बड़ी चिंता नौकरी और सेवा शर्तों को लेकर है। इस पर DIPAM सचिव अरुणिश चावला ने स्पष्ट किया है कि शेयर खरीद समझौते के तहत मौजूदा कर्मचारियों की सेवा शर्तें पूरी तरह सुरक्षित रहेंगी।

उन्होंने बताया कि IDBI बैंक आज भी एक बैंकिंग कंपनी है और यह अन्य राष्ट्रीयकृत बैंकों से अलग है। बैंक का प्रबंधन RBI की मंजूरी से नियुक्त होता है और कर्मचारियों की सेवा शर्तें बोर्ड द्वारा संबंधित कर्मचारी संघों से परामर्श करके तय की जाती हैं।

सरकार का कहना है कि नया प्रमोटर आने के बाद भी IDBI बैंक एक बैंकिंग कंपनी के रूप में ही काम करेगा। बैंक को कंपनी कानून और श्रम कानूनों के तहत संचालित किया जाएगा तथा प्रबंधन और कर्मचारी संघों के बीच बातचीत व भरोसे के जरिए मामलों का समाधान किया जाएगा।

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Full Privatization of IDBI Bank
Full Privatization of IDBI Bank

पेंशनभोगियों की पेंशन पर क्या असर?

IDBI बैंक के पूर्व कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही था कि निजीकरण के बाद उनकी पेंशन जारी रहेगी या नहीं। इस पर सरकार ने साफ आश्वासन दिया है कि मौजूदा पेंशनभोगियों के पेंशन लाभ पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे।

DIPAM सचिव के अनुसार, इस उद्देश्य के लिए एक समर्पित पेंशन फंड भी अलग रखा गया है। इसका मतलब है कि पेंशनभोगियों को पेंशन देने के लिए आवश्यक फंडिंग की व्यवस्था पहले से की गई है।[

सरकार का यह बयान उन कर्मचारियों और रिटायर्ड कर्मचारियों के लिए राहत की खबर है, जिन्हें लगा था कि निजीकरण के बाद उनकी पेंशन या अन्य लाभों में कटौती हो सकती है।

IDBI बैंक पहले से प्राइवेट क्यों है?

कई लोगों को लगता है कि IDBI बैंक अभी सरकारी बैंक है, लेकिन नियामकी रूप से यह 2019 से ही प्राइवेट सेक्टर बैंक की श्रेणी में आता है। दरअसल, जनवरी 2019 में LIC ने IDBI बैंक में 51% हिस्सेदारी खरीद ली थी।

LIC के 51% हिस्सेदारी खरीदने के बाद सरकार की प्रत्यक्ष हिस्सेदारी 50% से नीचे चली गई। इसके बाद RBI ने 21 जनवरी 2019 से IDBI बैंक को नियामकी उद्देश्यों के लिए प्राइवेट सेक्टर बैंक के रूप में वर्गीकृत कर दिया।

हालांकि, LIC खुद एक सरकारी संस्था है, इसलिए बैंक पर असली नियंत्रण अप्रत्यक्ष रूप से सरकार के पास ही माना जाता रहा। अब जब LIC और सरकार दोनों अपनी हिस्सेदारी बेचेंगे, तो बैंक का प्रबंधन नियंत्रण पूरी तरह निजी कंपनी के पास चला जाएगा।

बैंक यूनियनों का विरोध

IDBI बैंक के निजीकरण के फैसले का बैंक यूनियनों ने विरोध किया है। यूनियनों का आरोप है कि निजी या विदेशी निवेशक को बैंक की हिस्सेदारी बेचने से सार्वजनिक क्षेत्र की बैंकिंग व्यवस्था कमजोर हो सकती है।

यूनियनों ने सरकार से इस फैसले को वापस लेने की मांग भी की है। उनका कहना है कि बैंक कर्मचारियों के रोजगार, सेवा की स्थिरता और ग्राहकों के हितों पर इसका असर पड़ सकता है

निजीकरण से क्या बदलेगा?

IDBI बैंक के पूर्ण निजीकरण के बाद बैंक की रणनीति, प्रबंधन और व्यावसायिक निर्णयों पर नए प्रमोटर का नियंत्रण होगा। इससे बैंक की कार्यप्रणाली में बदलाव, डिजिटल निवेश, ग्राहक सेवा में सुधार और नए बिजनेस मॉडल की संभावना बन सकती है।

लेकिन सरकार के मुताबिक, मौजूदा कर्मचारियों की सेवा शर्तें और पेंशनभोगियों के लाभ इस सौदे की शर्तों में सुरक्षित हैं। यानी निजीकरण का असर सबसे पहले बैंक के स्वामित्व और प्रबंधन नियंत्रण पर पड़ेगा, न कि सीधे तौर पर कर्मचारियों के मौजूदा अधिकारों पर।

निष्कर्ष

IDBI बैंक की बिक्री भारतीय बैंकिंग क्षेत्र के निजीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। सरकार ने कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की चिंताओं को दूर करने की कोशिश की है और कहा है कि उनके हित पूरी तरह सुरक्षित रखे गए हैं।

हालांकि, बैंक यूनियनों का विरोध जारी है और सौदे को अंतिम रूप देने से पहले RBI की मंजूरी भी चाहिए। अगले कुछ महीनों में यह स्पष्ट होगा कि IDBI बैंक का निजीकरण किस तरह पूरा होता है और कर्मचारियों के लिए इसका व्यावहारिक असर क्या रहता है।

Disclaimer : यह लेख केवल जानकारी के लिए है। किसी भी निवेश निर्णय से पहले SEBI-रजिस्टर्ड वित्तीय सलाहकार से परामर्श लें।

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