CM विजय के एक फैसले से कांग्रेस में हड़कंप – तमिलनाडु के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने हाल ही में मुल्लिवैक्काल स्मृति दिवस के मौके पर एक सोशल मीडिया पोस्ट साझा की। इस पोस्ट के बाद देश की सियासत गरमा गई है। सरकार बनते ही 24 घंटे के भीतर विजय के एक फैसले ने कांग्रेस के गठबंधन में दरार की आशंका पैदा कर दी है।


क्या था वह विवादित फैसला?

मुख्यमंत्री विजय ने मुल्लिवैक्काल स्मृति दिवस पर एक सोशल मीडिया पोस्ट साझा की जिसमें LTTE प्रमुख वेलुपिल्लई प्रभाकरण को याद किया गया।

यह मुल्लिवैक्काल दिवस हर साल 18 मई को मनाया जाता है — यह वह दिन है जब 2009 में श्रीलंकाई सेना ने LTTE के खिलाफ अंतिम युद्ध में जीत हासिल की थी। तमिलनाडु में श्रीलंकाई तमिलों के प्रति गहरी भावनात्मक एकता रही है — इसीलिए यहां के नेता इस दिन को याद करते हैं।

लेकिन LTTE — यानी लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम — वही संगठन है जिसने 1991 में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की बम से हत्या की थी।


BJP का हमला — राहुल गांधी को घेरा

जैसे ही मुख्यमंत्री विजय की यह पोस्ट सामने आई, BJP ने इसे एक बड़ा मुद्दा बना लिया। BJP नेता राजीव चंद्रशेखर और IT सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने इसके बहाने सीधे कांग्रेस नेता राहुल गांधी को निशाने पर लिया। मालवीय ने तंज कसते हुए लिखा कि जिस संगठन ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की बेरहमी से हत्या की थी, उसके प्रमुख को तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री याद कर रहे हैं।

BJP का सवाल था — जो सरकार राजीव गांधी के हत्यारे संगठन के नेता को श्रद्धांजलि दे रही है, उसके साथ कांग्रेस कैसे खड़ी रह सकती है?


कांग्रेस में हड़कंप — राहुल चुप, चिदंबरम ने तोड़ी चुप्पी

यह वह पल था जब कांग्रेस के लिए एक बड़ा राजनीतिक संकट खड़ा हो गया। राहुल गांधी — जिनके पिता राजीव गांधी की LTTE ने हत्या की थी — ने इस पर कोई बयान नहीं दिया।

लेकिन वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने कड़े शब्दों में कहा — “किसी भी आतंकी संगठन के नेता की महिमामंडन करना स्वीकार्य नहीं है। LTTE एक प्रतिबंधित संगठन है और इसके नेता का स्मरण किसी भी लोकतांत्रिक सरकार को शोभा नहीं देता।”


सहयोगी VCK की नाराजगी — वंदे मातरम का मुद्दा

यह विवाद अकेला नहीं था। तमिलनाडु में नई सरकार के शपथ ग्रहण होने के 24 घंटे के अंदर ही विजय सरकार में तकरार शुरू हो गई। विजय की पार्टी TVK को समर्थन देने वाली VCK नाराज हो गई। नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में ‘वंदे मातरम’ को ‘तमिल थाई वलथु’ से पहले बजाने को लेकर सहयोगी पार्टी VCK नाराज हो गई।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विजय ने यह कदम सिर्फ औपचारिकता के तहत नहीं उठाया। यह एक संकेत भी हो सकता है कि उनकी सरकार केंद्र के साथ टकराव की राजनीति नहीं, बल्कि संतुलन की रणनीति अपनाएगी। दिलचस्प बात यह भी रही कि मंच पर विजय के साथ राहुल गांधी भी मौजूद थे — राहुल गांधी वही नेता हैं जिन्होंने हाल के दिनों में केंद्र सरकार पर ‘वंदे मातरम’ को लेकर राजनीति करने का आरोप लगाया था।

यानी एक तरफ वंदे मातरम पर VCK नाराज, दूसरी तरफ LTTE पर BJP और कांग्रेस का दबाव — विजय पहले ही दिन से कई मोर्चों पर घिर गए।

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CM विजय के एक फैसले से कांग्रेस में हड़कंप
CM विजय के एक फैसले से कांग्रेस में हड़कंप

विजय की 2009 की कांग्रेस से दूरी — याद आई पुरानी कहानी

एक्टर विजय साल 2009 में ही कांग्रेस जॉइन करने वाले थे, लेकिन राहुल गांधी की शर्त को मानने से उन्होंने मना कर दिया था। उस वक्त यूपीए सरकार की सहयोगी पार्टी DMK भी एक्टर विजय का विरोध कर रही थी।

विजय को राहुल गांधी की शर्त मंजूर नहीं थी — और वे वापस फिल्मों में लौट गए। लेकिन किसे पता था कि 17 साल बाद वही विजय नई पार्टी बनाकर पहले चुनाव में मुख्यमंत्री बनेंगे और राहुल गांधी उनके शपथ ग्रहण में मुख्य अतिथि होंगे।


इतिहास की विडंबना — राजीव के बेटे के सामने LTTE का सम्मान

यह तमिलनाडु की राजनीति की सबसे बड़ी जटिलता है :

  • विजय श्रीलंकाई तमिलों के प्रति भावनात्मक कारणों से LTTE का उल्लेख करते हैं
  • कांग्रेस के साथ है — जिसके पूर्व PM को LTTE ने मारा
  • राहुल गांधी मौजूद हैं — जिनके पिता की हत्या LTTE ने की

यह गठबंधन की सबसे नाजुक परीक्षा है।


गठबंधन पर खतरा — क्या टूटेगी साझेदारी?

कांग्रेस के अंदरूनी सूत्र बताते हैं कि राहुल गांधी इस गठबंधन के पक्ष में थे, जबकि मल्लिकार्जुन खरगे चाहते थे कि अंतिम फैसला राज्य इकाई ले।

अब जब विजय ने LTTE नेता को याद किया है — कांग्रेस के लिए तीन विकल्प हैं:

पहला: चुप रहें और गठबंधन बचाए रखें — राजनीतिक मजबूरी दूसरा: विरोध करें और विजय से स्पष्टीकरण मांगें — नैतिक जिम्मेदारी तीसरा: गठबंधन से हट जाएं — सबसे कठिन लेकिन सबसे ईमानदार

चिदंबरम का बयान बताता है कि कांग्रेस दूसरे रास्ते पर चल रही है — विरोध तो किया, लेकिन गठबंधन नहीं छोड़ा।


निष्कर्ष

CM विजय के पहले 24 घंटे ने बता दिया कि तमिलनाडु की राजनीति आसान नहीं होगी। वंदे मातरम से VCK नाराज, LTTE पोस्ट से कांग्रेस असहज, और BJP के हमले जारी — तीन मोर्चों पर एक साथ दबाव।

श्रीलंका में रहने वाले तमिलों और तमिलनाडु के बीच एक गहरा भावनात्मक रिश्ता है। यह भावना समझ में आती है — लेकिन एक मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी सिर्फ भावनाओं की नहीं, संवैधानिक मर्यादाओं की भी होती है।

विजय जल्दी यह सीखेंगे कि पर्दे पर हीरो होना अलग है और असल राजनीति में संतुलन बनाना अलग।

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