Anti Paper Leak Bill – राज्यसभा में एंटी-पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान मल्लिकार्जुन खरगे के “मनुस्मृति” वाले बयान ने जोरदार हंगामा खड़ा कर दिया। सत्ता पक्ष ने उनके कथन को तथ्यों से परे बताते हुए आपत्ति जताई, जबकि सभापति ने विवादित हिस्सों को कार्यवाही से हटाने का आदेश दिया…
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क्या कहा खरगे ने
खरगे ने बिल पर बोलते हुए केंद्र सरकार, आरएसएस और शिक्षा व्यवस्था को लेकर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों में अच्छे शिक्षक और वीसी आने चाहिए, लेकिन सिलेबस में ऐसी बातें जोड़ी जा रही हैं जो मनुस्मृति से जुड़ी हैं, जैसे शूद्र के वेद सुनने पर दंड या वेद मंत्र उच्चारण पर सजा।
उनका कहना था कि वे ऐसी सामग्री की निंदा करते हैं और उसे सिलेबस से हटाया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालयों में आरएसएस से जुड़े लोग भरे जा रहे हैं।
नड्डा ने क्यों टोका
नेता सदन जेपी नड्डा ने खरगे के कथन पर कड़ी आपत्ति जताई और कहा कि जो बातें कही गई हैं वे तथ्यात्मक रूप से गलत हैं। नड्डा ने कहा कि “मनुस्मृति का ओरिजिनल टेक्स्ट ऑथेंटिकेट करें,” यानी जो उद्धरण दिया जा रहा है, उसकी प्रामाणिकता साबित की जाए।
यही टिप्पणी सदन में तनाव बढ़ाने वाली बनी, क्योंकि सत्ता पक्ष ने इसे बिना प्रमाण के आरोप माना, जबकि विपक्ष इसे वैचारिक आलोचना के रूप में देख रहा था।
हंगामा क्यों बढ़ा
खरगे ने अपने भाषण में NEET-UG प्रदर्शन, छात्र आंदोलन, लाठीचार्ज, आंसू गैस, पैलेट गन और इंटरनेट बंदी का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों पर हुए हमलों की जिम्मेदारी गृह मंत्री अमित शाह की बनती है और यदि वे जवाब नहीं दे सकते तो इस्तीफा दें।
उनका कहना था कि छात्रों ने शांतिपूर्ण मार्च किया था, लेकिन जवाब में उन्हें हिंसा झेलनी पड़ी। इस पर विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई।
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सत्ता पक्ष का जवाब
गिरिराज सिंह ने खरगे से माफी की मांग की। उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता को संसद में इस्तेमाल किए जाने वाले शब्दों की समझ होनी चाहिए और वे जानबूझकर ऐसे शब्द बोल रहे थे जिनसे विवाद पैदा हो। .
सत्ता पक्ष के सांसदों का तर्क था कि यह पेपर-लीक बिल पर चर्चा थी, इसलिए मनुस्मृति या आरएसएस जैसे विषयों को लाना चर्चा का दायरा भटकाने जैसा है।
रिकॉर्ड से हटाया गया हिस्सा
राज्यसभा के सभापति ने खरगे के विवादित हिस्सों को कार्यवाही से हटाने का फैसला लिया। रिपोर्टों के अनुसार, मनुस्मृति से जुड़ी टिप्पणी को सदन के रिकॉर्ड से एक्सपंज किया गया।
यह कदम इसलिए लिया गया ताकि कार्यवाही में असंसदीय या विवादास्पद सामग्री दर्ज न रहे।
राजनीतिक मायने
यह विवाद सिर्फ एक बयान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पेपर-लीक बिल, शिक्षा नीति, छात्र आंदोलन और आरएसएस-सिलेबस बहस को एक साथ जोड़ गया।
कांग्रेस जहां इसे शिक्षा और सामाजिक न्याय से जोड़ रही है, वहीं बीजेपी इसे तथ्यहीन, भड़काऊ और असंसदीय बता रही है। यही वजह है कि राज्यसभा में सामान्य विधेयक पर बहस अचानक वैचारिक टकराव में बदल गई।
निष्कर्ष
संक्षेप में, मल्लिकार्जुन खरगे के मनुस्मृति संदर्भ ने राज्यसभा में हंगामा खड़ा कर दिया, क्योंकि सत्ता पक्ष ने इसे गलत और भड़काऊ माना, जबकि विपक्ष ने इसे सिलेबस और सामाजिक न्याय पर वैचारिक टिप्पणी बताया। सभापति ने विवादित अंश हटाकर बहस को आगे बढ़ाने की कोशिश की।
