Pellet Guns In CJP Protest – दिल्ली पुलिस ने CJP के जंतर-मंतर प्रदर्शन में पैलेट गन के इस्तेमाल से इनकार किया है। पुलिस का कहना है कि न तो नई दिल्ली DCP ने ऐसा आदेश दिया, न RAF की उस कंपनी ने पैलेट गन चलाई; साथ ही आयोजकों पर भीड़ नियंत्रण में लापरवाही और तय क्षमता से ज्यादा लोग जुटाने का आरोप लगाया गया है…
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पुलिस का दावा क्या है
पुलिस के मुताबिक, ऐसे आयोजनों से पहले एक तय फॉर्मेट पर ब्रीफिंग होती है, जिसमें टियर गैस, लाठी, बैरिकेड जैसे विकल्पों पर साइन कराए जाते हैं, लेकिन इस मामले में पैलेट गन वाला आदेश नहीं था। पुलिस सूत्रों का यह भी कहना है कि फील्ड में हालात के हिसाब से फैसले लिए जाते हैं और बाद में कागजी कार्रवाई की जाती है।
पुलिस ने यह भी कहा कि CJP आयोजकों ने भीड़ प्रबंधन के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं की, स्पीकर और वालंटियर की मदद भी पूरी तरह उपलब्ध नहीं कराई गई, और जब भीड़ 1000 की क्षमता वाली जगह पर 5000 से ज्यादा पहुंच गई तो उन्हें रामलीला मैदान जाने के लिए कहा गया, लेकिन वे नहीं माने।
फिर सवाल क्यों उठा
विवाद इसलिए बढ़ा क्योंकि शुरू में कुछ रिपोर्टों में कहा गया था कि RAF ने आठ पैलेट शॉट चलाए थे। बाद में दिल्ली पुलिस और PIB फैक्ट-चेक ने इन दावों को झूठा और भ्रामक बताया, हालांकि पुलिस और केंद्रीय बलों की ओर से इस पर आधिकारिक और एकसमान स्पष्टीकरण नहीं आया।
इसी बीच कुछ मीडिया रिपोर्टों और मेडिकल रिकॉर्ड्स में घायल प्रदर्शनकारियों के शरीर में छर्रे जैसी चोटों का ज़िक्र भी सामने आया, जिससे शक और गहरा गया।
रिकॉर्ड क्या कहते हैं
बाद की खबरों में संसद मार्ग थाने की जनरल डायरी और अन्य दस्तावेजों का हवाला दिया गया, जिनमें कथित तौर पर DCP के आदेश पर पैलेट गन इस्तेमाल होने की बात दर्ज बताई गई। इन रिपोर्टों के अनुसार RAF ने भीड़ नियंत्रण के दौरान दो राउंड पैलेट गन चलाई थी।
अगर ये रिकॉर्ड सही माने जाएं, तो यह दिल्ली पुलिस के शुरुआती इनकार से सीधे टकराते हैं। यानी एक तरफ पुलिस का सार्वजनिक रुख है कि पैलेट गन नहीं चली, और दूसरी तरफ लिखित एंट्री व चोटों की रिपोर्ट्स हैं जो अलग कहानी कहती हैं।
आयोजकों पर आरोप
दिल्ली पुलिस का कहना है कि इस हिंसा में आयोजकों की बड़ी भूमिका थी। पुलिस के मुताबिक, उन्हें बार-बार वालंटियर्स और भीड़ नियंत्रण के इंतजाम करने को कहा गया, लेकिन कोई ठोस जवाब नहीं मिला।
पुलिस सूत्रों का दावा है कि स्थिति को संभालने के लिए उनके अपने वॉलंटियर्स भी प्रदर्शनकारियों के बीच भेजे गए थे ताकि लोग उग्र न हों, लेकिन भीड़ काबू में नहीं आई।
विपक्ष क्यों हमलावर है
विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार से जवाब मांग रहा है और संसद में गृह मंत्री अमित शाह से बयान की मांग उठ रही है। विपक्ष का तर्क है कि अगर भीड़ पर पैलेट गन चली, तो उसके आदेश, जिम्मेदारी और SOP को सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
दूसरी तरफ, पुलिस और सरकार का पक्ष यह है कि बिना पुष्टि के फैलाई गई खबरें माहौल बिगाड़ रही हैं। यही कारण है कि यह मामला अब सिर्फ एक सुरक्षा घटना नहीं, बल्कि राजनीतिक और प्रशासनिक भरोसे का प्रश्न बन गया है।
असली पहेली
सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर DCP ने आदेश नहीं दिया और RAF ने आधिकारिक रूप से इनकार किया, तो फिर घायल लोगों के रिकॉर्ड में पैलेट जैसी चोटें क्यों दर्ज हुईं और कुछ रिपोर्टों में पैलेट शॉट की बात क्यों आई?
यानी या तो दस्तावेजों, मेडिकल एंट्री और मीडिया रिपोर्टों में विरोधाभास है, या फिर प्रारंभिक आधिकारिक बयान पूरी तस्वीर नहीं बता रहे।
निष्कर्ष
संक्षेप में, दिल्ली पुलिस का दावा है कि CJP प्रोटेस्ट में पैलेट गन का इस्तेमाल नहीं हुआ, लेकिन बाद की कुछ रिपोर्टें और रिकॉर्ड इस दावे पर सवाल उठाते हैं। अभी तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है, इसलिए यह मामला जांच, दस्तावेजों और आधिकारिक जवाबों के बीच उलझा हुआ है।

