Major Cut In The Price of Key Crude Grades – सऊदी अरब ने अगस्त के लिए एशिया के ग्राहकों पर अपने मुख्य क्रूड ग्रेड की कीमत में 26 सालों की सबसे बड़ी कटौती की है। यह कदम इसलिए लिया गया है क्योंकि ग्लोबल सप्लाई बढ़ने से खरीदारों के बीच प्रतिस्पर्धा तेज हो गई है।
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कितनी बड़ी कटौती?
ब्लूमबर्ग की प्राइस लिस्ट के मुताबिक, सरकारी कंपनी सऊदी अरामको अगले महीने एशिया के लिए अपने अरब लाइट तेल की कीमत 11 डॉलर प्रति बैरल घटाएगी। यह कीमत अब रीजनल बेंचमार्क से 1.50 डॉलर डिस्काउंट पर होगी।
यह कटौती ब्लूमबर्ग सर्वे में अनुमानित 8 डॉलर की गिरावट से भी ज्यादा है।
भारत पर क्या असर पड़ेगा?
भारत अपनी जरूरत का 85% से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में सऊदी अरब की यह ऐतिहासिक कटौती भारत के लिए कई तरह से राहत ला सकती है।
- आयात बिल घट सकता है।
- करंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) पर दबाव कम हो सकता है।
- रुपये को कुछ मजबूती मिल सकती है।
- घरेलू स्तर पर पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों में कटौती की संभावना बढ़ सकती है।
अगर क्रूड लंबे समय तक सस्ता रहता है, तो इससे महंगाई कंट्रोल करने में भी मदद मिलेगी। साथ ही ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर भी सकारात्मक असर पड़ सकता है।
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जून से क्यों गिरे दाम?
जून के मध्य से तेल की कीमतों में तेज गिरावट आई है। इसकी बड़ी वजह यह रही कि अमेरिका और ईरान युद्ध रोकने और होर्मुज स्ट्रेट से आवाजाही फिर शुरू करने पर सहमत हुए।
ब्रेंट क्रूड गिरकर लगभग 72 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है, जो फरवरी के आखिर के स्तर के आसपास है।
मिडिल ईस्ट की सप्लाई फिर सक्रिय
मिडिल ईस्ट से क्रूड सप्लाई बढ़ने का दबाव एशियाई रिफाइनरों पर पड़ सकता है। एक समय सऊदी अरामको ने फारस की खाड़ी में रास तनूरा बंदरगाह से एक्सपोर्ट दोबारा शुरू करने के बाद अपने शिपमेंट को युद्ध-पूर्व स्तर के लगभग 90% तक बढ़ा दिया था।
युद्ध के दौरान उसने काफी हिस्सा यानबू की रेड सी फैसिलिटी की तरफ मोड़ दिया था, क्योंकि होर्मुज का रास्ता लगभग बंद हो गया था।
OPEC+ का क्या रुख है?
सऊदी अरब और रूस के नेतृत्व वाले OPEC+ समूह ने अगस्त में तेल कोटा में एक और मामूली बढ़ोतरी पर सहमति जताई है।
इससे संकेत मिलता है कि समूह फिलहाल उत्पादन को ज्यादा नहीं रोकना चाहता। यानी सप्लाई बढ़ने का दबाव आगे भी बना रह सकता है।
खाड़ी देशों जैसे सऊदी अरब, इराक और कुवैत के लिए अब उत्पादन बढ़ाने की कुछ गुंजाइश भी बन रही है, क्योंकि होर्मुज से आवाजाही पहले की तुलना में आसान हो गई है।
भारत के लिए आगे क्या संकेत?
यह फैसला भारत के लिए फिलहाल सकारात्मक माना जा सकता है, खासकर अगर क्रूड की कीमतें कुछ समय तक नीचे बनी रहती हैं।
लेकिन खुदरा पेट्रोल-डीजल की कीमतें तुरंत घटेंगी या नहीं, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि तेल कंपनियां कम दाम वाले क्रूड का असर खुदरा बाजार तक कितनी तेजी से पहुंचाती हैं।
कुल मिलाकर, सऊदी अरब की यह कटौती भारत के लिए तेल, महंगाई और रुपये—तीनों मोर्चों पर राहत का संकेत है।

