US-Iran Conflict Update – अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु जांच को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। ईरान का कहना है कि संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों को बमबारी वाली परमाणु साइटों पर जाने की कोई तय योजना नहीं है, जबकि अमेरिका दावा कर रहा है कि जांच को लेकर सब कुछ पहले से तय हो चुका है।
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क्या है विवाद
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने साफ कहा कि अमेरिकी हमलों में क्षतिग्रस्त हुई परमाणु साइटों पर जांच के लिए अभी कोई समय तय नहीं हुआ है। उन्होंने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के एक दिन पहले दिए बयान को भी खारिज कर दिया।
दूसरी तरफ डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान जांच के लिए तैयार नहीं हुआ तो बातचीत तुरंत बंद कर दी जाएगी। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि जांच शुरू करने में जल्दबाजी नहीं है। इसका मतलब साफ है कि दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी अभी भी बड़ी बाधा बनी हुई है।
स्विट्जरलैंड में चल रही बातचीत
यह विवाद उस समय सामने आया जब ईरान और अमेरिका की तकनीकी टीमें स्विट्जरलैंड में बातचीत कर रही थीं। इस बातचीत में प्रतिबंध हटाने, परमाणु मुद्दे, पुनर्निर्माण और निगरानी जैसे विषयों पर अलग-अलग समूह बनाए गए हैं।
ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण मकसद के लिए है, लेकिन उसके पास इतना ज्यादा एनरिच्ड यूरेनियम है कि उससे परमाणु हथियार बनाया जा सकता है। यही वजह है कि जांच और निगरानी का मुद्दा दोनों देशों के बीच सबसे संवेदनशील बना हुआ है।
पिछली डील और 60 दिन की समयसीमा
पिछले हफ्ते दोनों देशों के बीच एक डील हुई थी, जिसमें ईरान को अपने यूरेनियम स्टॉक को कम करना था और बदले में अमेरिका को प्रतिबंध हटाने थे। दोनों पक्षों को बड़ी डील तक पहुंचने के लिए 60 दिन का समय दिया गया है।
अब जांच को लेकर उठे ताजा विवाद ने इस पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अगर दोनों पक्ष जल्द किसी सहमति पर नहीं पहुंचे, तो यह डील भी खतरे में पड़ सकती है।
होर्मुज स्ट्रेट में फंसे जहाज
इस बीच अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन ने बताया है कि होर्मुज स्ट्रेट में फंसे करीब 11 हजार क्रू मेंबर्स को बाहर निकालने का प्लान शुरू हो गया है। यह कदम इसलिए अहम है क्योंकि यह इलाका वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद संवेदनशील माना जाता है।
अगर वहां हालात लंबे समय तक खराब रहते हैं, तो इसका असर न सिर्फ समुद्री आवागमन पर बल्कि तेल सप्लाई और अंतरराष्ट्रीय बाजार पर भी पड़ सकता है।
पेजेशकियान की पाकिस्तान यात्रा
इसी बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान पाकिस्तान पहुंचे, जहां उन्होंने राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी से मुलाकात की। यह जंग शुरू होने के बाद उनकी पहली पाकिस्तान यात्रा थी।
पेजेशकियान ने कहा कि अमेरिका-ईरान समझौते में मिसाइल कार्यक्रम का कोई जिक्र नहीं है। इस बयान से संकेत मिलता है कि ईरान अपने रक्षा कार्यक्रम को परमाणु मुद्दे से अलग रखने की कोशिश कर रहा है।
लेबनान में भी तनाव
वहीं दूसरी ओर लेबनान में इजरायल की फायरिंग में दो लोगों की मौत की खबर सामने आई है। इससे पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ गया है। अमेरिका, ईरान और इजरायल से जुड़ी घटनाएं एक साथ सामने आने से क्षेत्रीय स्थिति और नाजुक हो गई है।
कुल मिलाकर क्या हो रहा है
अभी स्थिति यह है कि अमेरिका ईरान से साफ जवाब चाहता है, खासकर परमाणु साइटों की जांच को लेकर। ईरान फिलहाल जांच की किसी तय टाइमलाइन से इनकार कर रहा है। दोनों पक्षों के बीच अविश्वास इतना गहरा है कि एक बयान, एक शर्त या एक जांच पूरी बातचीत को प्रभावित कर सकती है।
होर्मुज स्ट्रेट, पाकिस्तान यात्रा, स्विट्जरलैंड की बातचीत और लेबनान की हिंसा — ये सभी घटनाएं दिखाती हैं कि यह सिर्फ परमाणु विवाद नहीं, बल्कि पूरे पश्चिम एशिया की सुरक्षा और राजनीति से जुड़ा बड़ा संकट है।
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