20 Rebel TMC MPs – TMC (तृणमूल कांग्रेस) के 20 बागी सांसदों ने नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में विलय कर लिया है। ये सभी बागी टीएमसी सांसद 14 जून, रविवार को सबसे पहले केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र सिंह से मिले।

इसके बाद लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात की। इसके कुछ ही घंटों के बाद टीएमसी के विद्रोही गुट ने नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में खुद का विलय कर दिया। इसके बाद उन्होंने लोकसभा में एनडीए को समर्थन देने का ऐलान भी किया है।


20 Rebel TMC MPs – बागी गुट की लीडर काकोली घोष दस्तीदार

बागी गुट की लीडर काकोली घोष दस्तीदार ने कहा कि उनके साथ टीएमसी के 20 बागी सांसदों ने लोकसभा स्पीकर से मुलाकात की।

काकोली का बयान:

विवरणजानकारी
मुलाकातलोकसभा स्पीकर से
चिट्ठीटीएमसी से अलग बैठने की अपील
संख्यादो तिहाई के आंकड़े से ज्यादा
विलयएनसीपीआई में अपना विलय
एनडीएपीएम मोदी के नेतृत्व में काम करने की बात

उन्हें लोकसभा में टीएमसी से अलग बैठने की व्यवस्था करने की अपील करते हुए एक चिट्ठी सौंपी। दस्तीदार ने कहा कि उनकी संख्या दो तिहाई के आंकड़े से ज्यादा है और वो एनसीपीआई में अपना विलय कर रहे हैं। उन्होंने पीएम मोदी के नेतृत्व में एनडीए के साथ काम करने की भी बात कही।

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असली टीएमसी की मांग

बागी गुट की लीडर काकोली घोष दस्तीदार ने कहा कि उनके साथ टीएमसी के 20 बागी सांसदों ने लोकसभा स्पीकर से मुलाकात की।

असली टीएमसी की मांग:

सांसदमांग
जगदीश चंद्र बर्मा बसुनियाएसोसिएटल टीएमसी के रूप में मान्यता
सुदीप बंद्योपाध्यायटीएमसी नाम के लिए कानूनी रास्ता

बता दें कि इससे पहले माना जा रहा था कि बागी सांसद अपने गुट को असली टीएमसी होने का दावा करेंगे। बागी सांसदों में से एक जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया ने कहा भी था कि उनका गुट सोमवार, 15 जून को लोकसभा स्पीकर से मुलाकात करते हुए ‘असली टीएमसी’ के रूप में मान्यता प्राप्त करने की मांग करेगा।

टीएमसी के एक अन्य बागी सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय ने इशारा किया है कि उनका गुट ‘टीएमसी’ नाम के लिए कानूनी रास्ता अपनाएगा। उन्होंने कहा कि जब आप पार्टी के दो-तिहाई हिस्से के साथ निकलते हैं, तो आप पहले ही दिन उस पार्टी का नाम नहीं मांग सकते।

जुलाई में वो मांग करेंगे कि उन्हें असली तृणमूल दी जाए क्योंकि उनके पास तृणमूल कांग्रेस से दो-तिहाई बहुमत है।


पार्टी में विलय क्यों करना पड़ा?

पार्टी में विलय क्यों करना पड़ा? सवाल ये है कि बागी गुट को एनडीए का समर्थन करने के लिए किसी पार्टी में विलय क्यों करना पड़ा?

संविधान के जानकार:

विवरणजानकारी
संविधान10वीं अनुसूची
दलबदलदलबदल को रोकने की व्यवस्था
अयोग्यलोकसभा या विधानसभा सदस्यता समाप्त
रास्ताकिसी पार्टी में विलय

संविधान के जानकार बताते हैं कि अयोग्य करार दिए जाने और सांसदी बचाने के लिए टीएमसी के बागियों ने अपने गुट का विलय एनसीपीआई में किया है।

द प्रिंट को लोकसभा के पूर्व महासचिव पीडीटी आचार्य ने बताया कि संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत बागी सांसद अयोग्य करार दिए जा सकते थे।

इस अनुसूची में दलबदल को रोकने की व्यवस्था है, जिसके तहत दलबदलुओं की लोकसभा या विधानसभा सदस्यता समाप्त करने का प्रावधान है।

टीएमसी के बागियों के पास इससे बचने के लिए सिर्फ एक रास्ता था कि वो किसी पार्टी में अपने गुट का विलय कर दें। [टेक्स्ट स्रोत]

पीडीटी आचार्य कहते हैं कि अगर किसी पार्टी में फूट पड़ती है तो बागी गुट खुद को असली पार्टी बताते हुए भारतीय चुनाव आयोग के पास जा सकता है।

लेकिन इसका मतलब विलय नहीं होता है। विलय के लिए उन्हें अपने आपको किसी पार्टी में मिलाना ही होगा। अयोग्यता से बचने का उनके पास यही तरीका है।


एनसीपीआई किसकी पार्टी है

एनसीपीआई किसकी पार्टी है? टीएमसी के बागियों ने जिस पार्टी में विलय किया है, उसका नाम नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ़ इंडिया (NCPI) है।

NCPI का विवरण:

विवरणजानकारी
साल2023 में बनी
मुख्य मौजूदगीपश्चिम बंगाल, हावड़ा इलाके
पूर्वोत्तरत्रिपुरा, असम
फोकससोशल वेलफेयर, गरीबों की मदद
त्रिपुरा चुनाव2023, दो लोग चुनाव लड़े
रुखTMC विरोधी

फेसबुक पर इस पार्टी का एक पेज है, जिस पर बताया गया है कि इसकी मुख्य मौजूदगी पश्चिम बंगाल खासतौर पर हावड़ा इलाके और त्रिपुरा, असम जैसे कुछ पूर्वोत्तर राज्यों में है।

यह खासतौर पर सोशल वेलफेयर के कामों पर फोकस करती है और गरीबों की मदद को अपना मकसद बताती है।

इंडिया टुडे से जुड़े तन्मय चक्रवर्ती और इंद्रजीत की रिपोर्ट के मुताबिक, नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ़ इंडिया साल 2023 में बनी थी। साल 2023 के त्रिपुरा चुनाव में इस पार्टी से दो लोग ने चुनाव लड़ा था।

एक: उनाकोटी जिले के कैलाशहर से जहांगीर अली
दूसरे: धलाई जिले के चावमानु से बरजेदा

त्रिपुरा में शांतनु साहा और कोलकाता में तरुण कुमार रॉय पार्टी को संभाल रहे हैं।

NCPI के नेशनल ऑर्गनाइजिंग सेक्रेटरी: शांतनु डे उन्होंने इंडिया टुडे से फोन पर बातचीत में दावा किया कि वो RSS कार्यकर्ता और समाज सेवक हैं।

वह पार्टी के संस्थापक सदस्य भी हैं लेकिन बागी TMC सांसदों के NCPI में शामिल होने के फैसले से नाखुश हैं। डे ने कहा कि उनकी पार्टी ने त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में TMC के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी।


TMC 20 बागी सांसद Vs NCPI

पहलूविवरण
बागी सांसद20 टीएमसी सांसद
विलय पार्टीनेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI)
लीडरकाकोली घोष दस्तीदार
मुलाकातभूपेंद्र सिंह, ओम बिरला
समर्थनलोकसभा में एनडीए
संख्यादो तिहाई से ज्यादा
PI साल2023 में बन
मौजूदगीपश्चिम बंगाल, हावड़ा, त्रिपुरा, असम
फोकससोशल वेलफेयर, गरीबों की मदद
रुखTMC विरोधी
विलय वजहसंविधान की 10वीं अनुसूची, अयोग्यता से बचने

निष्कर्ष

TMC के 20 बागी सांसदों ने नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में विलय कर लिया।

मुख्य तथ्य:

पहलूविवरण
बागी सांसद20
विलयNCPI में
लीडरकाकोली घोष दस्तीदार
समर्थनएनडीए
PI साल2023
मौजूदगीपश्चिम बंगाल, त्रिपुरा, असम
रुखTMC विरोधी
विलय वजह10वीं अनुसूची, अयोग्यता से बचने

14 जून, रविवार को भूपेंद्र सिंह, ओम बिरला से मुलाकात, NCPI में विलय, एनडीए का समर्थन। काकोली घोष दस्तीदार: दो तिहाई से ज्यादा संख्या, पीएम मोदी के नेतृत्व में एनडीए के साथ काम। NCPI: 2023 में बनी, पश्चिम बंगाल, हावड़ा, त्रिपुरा, असम, सोशल वेलफेयर, TMC विरोधी। संविधान की 10वीं अनुसूची: दलबदल रोक, अयोग्यता से बचने का रास्ता, किसी पार्टी में विलय।

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