Nepal Flash Flood – नेपाल में भीषण फ्लैश फ्लड से अब तक 475 से अधिक लोगों की मौत और 600 से ज्यादा लापता होने की खबर है; इनमें 517 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। इतनी बड़ी तबाही के बावजूद काठमांडू ने भारत, चीन, अमेरिका, ब्रिटेन, जापान, दक्षिण कोरिया, श्रीलंका और बांग्लादेश समेत कई देशों की स्पेशलाइज्ड सर्च-एंड-रेस्क्यू टीमों के प्रस्ताव ठुकरा दिए हैं…
Contents
“हमारी अपनी एजेंसियां संभाल सकती हैं”
नेपाल के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लोक बहादुर छेत्री ने कहा, “मदद की पेशकश स्वाभाविक है, लेकिन हमारी सुरक्षा एजेंसियां सर्च-एंड-रेस्क्यू ऑपरेशन कर रही हैं; फिलहाल हमें इस तरह की मदद की जरूरत नहीं है।” सरकार ने अपने राजनयिक मिशनों को निर्देश दिया है कि वे विदेशी सहायता केवल ‘प्रधानमंत्री राहत कोष’ (Prime Minister Relief Fund) के जरिए ही लें।
वजह: 2015 के भूकंप का कड़वा अनुभव
अधिकारियों के मुताबिक, यह फैसला 2015 के गोरखा भूकंप के अनुभव से प्रेरित है। उस समय बड़ी संख्या में विदेशी रेस्क्यू टीमें आईं, जिससे:
- टीमों के बीच समन्वय की कमी और ओवरलैपिंग ऑपरेशन की समस्या हुई।
- लॉजिस्टिक्स, अनुमति और मैनेजमेंट में उलझनें बढ़ीं।
- स्थानीय क्षमताओं के बजाय बाहरी टीमों पर अत्यधिक निर्भरता का मुद्दा उठा।
इन सबक को देखते हुए नेपाली सेना और पुलिस ने सुझाव दिया कि मौजूदा ऑपरेशन घरेलू एजेंसियों से ही चलाया जाए।
Also Read – जब हिमालय दरका और भोटेकोशी बन गई मौत का सैलाब- 5 पॉइंट्स में पूरी कहानी…
‘वन-डोर मैकेनिज्म’: नकद मदद, न कि टीमें
नेपाल ने विदेशी रेस्क्यू टीमों को नहीं, पर आर्थिक सहायता को स्वीकार किया है। काठमांडू चाहता है कि:
- सभी वित्तीय योगदान एक ही चैनल—प्रधानमंत्री राहत कोष—के जरिए आए।
- इससे डुप्लिकेशन कम होगा और संसाधन जहां सबसे जरूरी हों, वहां लगाए जा सकेंगे।
- पुनर्वास व पुनर्निर्माण चरण में अतिरिक्त आर्थिक मदद और अन्य प्रकार की सहायता मांगी जाएगी।
कितने भारतीय और अन्य विदेशी फंसे/लापता?
नेपाल पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, बाढ़ में लापता विदेशियों में 178 भारतीय, 65 अमेरिकी, 51 मलेशियाई, 53 यूक्रेनी, 33 ब्रिटिश, 35 ऑस्ट्रेलियाई, 25 कनाडाई और कई अन्य देशों के नागरिक शामिल हैं। भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि 200 से अधिक भारतीय नागरिक बाढ़-प्रभावित इलाकों से निकलने में मदद चाहते हैं। चीन के अधिकारियों ने बताया कि कम से कम 100 चीनी नागरिकों से संपर्क नहीं हो पा रहा है।
सीमा पर रेस्क्यू रोका, नई बाढ़ का खतरा
चीन-नेपाल सीमा के पास छोछेन खोला और त्सांगपो नदी के संगम पर एक झील बन गई है, जिसका पानी लगातार बढ़ रहा है। चीन ने चेतावनी दी है कि यदि पानी का स्तर ऐसे ही बढ़ा तो फिर से घातक बाढ़ आ सकती है; इसी कारण तिब्बत-नेपाल बॉर्डर के पास कुछ रेस्क्यू अभियान रोक दिए गए हैं। नेपाली अधिकारियों ने भी लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और नए अलर्ट का पालन करने को कहा है
भारत का NDRF ऑफर: अभी लंबित?
कुछ रिपोर्ट्स में यह भी उठ रहा है कि भारत ने NDRF की टीम और विशेष उपकरण भेजने की पेशकश की थी और काठमांडू से अनुमति मांगी थी, लेकिन नेपाल ने अभी तक इसे मंजूरी नहीं दी है। वहीं, आधिकारिक बयानों में नेपाल का रुख स्पष्ट है: “फिलहाल विदेशी रेस्क्यू टीम की जरूरत नहीं।”
संक्षेप में: नेपाल ने 2015 के भूकंप के समन्वय-संकट से सीख लेते हुए विदेशी रेस्क्यू टीमों को नहीं, पर केंद्रीकृत ‘वन-डोर’ चैनल के जरिए नकद सहायता को प्राथमिकता दी है, ताकि बचाव कार्य में अव्यवस्था न हो और संसाधन बेहतर तरीके से लगें।

