Nepal Great Flood – नेपाल में अचानक एक बड़ी त्रासदी आई, जिसने कुछ ही घंटों में पहाड़ों से लेकर बस्तियों तक तबाही का मंजर खड़ा कर दिया। नेपाल-चीन (तिब्बत) सीमा से लगे रसुवा और नुवाकोट जिलों में अचानक आई फ्लैश फ्लड ने घरों, होटलों, सड़कों, पुलों और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स को भारी नुकसान पहुंचाया।

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इस आपदा में 163 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 750 से ज्यादा लोग अभी भी लापता हैं। इनमें मानसरोवर यात्रा और ट्रैकिंग पर निकले कमोबेश 140 भारतीय तीर्थयात्री भी शामिल हैं।

1. तिब्बत में भूकंप, ग्लेशियर टूटा और भोटेकोशी बनी मौत का सैलाब

इस महातबाही की शुरुआत नेपाल से नहीं, बल्कि तिब्बत के ऊंचे बर्फीले पहाड़ों से हुई। जियोलॉजिस्ट और सैटेलाइट डेटा के मुताबिक, 26 अगस्त की सुबह 8:37 बजे तिब्बत क्षेत्र में 5.2 तीव्रता का भूकंप आया। इस भूकंप के झटके से ल्हेंदे नदी के कैचमेंट इलाके में ग्लेशियर का एक बड़ा हिस्सा टूटकर नीचे आ गया।

लाखों टन बर्फ, पानी और मलबा पहाड़ से नीचे आया। इससे पहाड़ों के बीच कुछ समय के लिए पानी और मलबे का बड़ा जमाव बन गया। पानी का दबाव बढ़ने के बाद यह प्राकृतिक बांध टूट गया। करीब सुबह 9 बजे मलबे से भरा सैलाब नेपाल की भोटेकोशी नदी में पहुंच गया।

इसके बाद भोटेकोशी नदी का रूप पूरी तरह बदल गया। आम दिनों में संकरी दिखने वाली यह नदी कई जगह अपने सामान्य पाट से 8 से 10 गुना तक चौड़ी हो गई। पानी मटमैला था, क्योंकि उसमें सिर्फ पानी नहीं बल्कि भारी गाद, पत्थर, कंक्रीट और पेड़ों का मलबा भी बह रहा था।

कई जगह करीब 30 फीट तक ऊंची लहरें उठने की बात सामने आई। रसुवागढ़ी और स्याफ्रुबेसी के आसपास नदी का यह रौद्र रूप किनारे की बस्तियों को अपनी चपेट में ले गया।

2. नुवाकोट में बस्तियां बनीं मलबे का ढेर, घरों में घुसा 6 फीट तक कीचड़

रसुवा से नीचे आने पर भोटेकोशी का पानी त्रिशूली नदी तंत्र से जुड़ता है। इसके आसपास नुवाकोट जिला आता है, जिसकी आबादी करीब 2.7 लाख है। यह इलाका नेपाल और चीन के बीच व्यापार के लिहाज से बेहद अहम है। इसलिए यहां बाजार, होटल, घर और दूसरी व्यावसायिक इमारतें बड़ी संख्या में मौजूद हैं।

त्रिशूली बाजार और बेत्रावती इस तबाही से सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में शामिल रहे।

अचानक आए पानी और मलबे ने लोगों को संभलने तक का मौका नहीं दिया। पानी की रफ्तार करीब 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे तक बताई गई। निचले इलाकों में देखते ही देखते पानी भर गया। कई बहुमंजिला घरों के ग्राउंड फ्लोर और पहली मंजिल पानी और कीचड़ में डूब गए।

जान बचाने के लिए लोग तीन और चार मंजिला इमारतों की छतों पर पहुंच गए। जिन बाजारों में कुछ घंटे पहले तक दुकानें, होटल और लोगों की आवाजाही थी, वहां अब कीचड़ और मलबा जमा था।

कई घरों के अंदर करीब 6 फीट तक गाढ़ी गाद और कीचड़ भर गया। बेडरूम, किचन और दूसरे कमरों में रखा सामान पूरी तरह बर्बाद हो गया। कई परिवारों के सामने एक साथ घर, सामान और रोजी-रोटी गंवाने का संकट खड़ा हो गया।

3. ताश के पत्तों की तरह ढहे घर, 13 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स पर भी संकट

स्याफ्रुबेसी और त्रिशूली बाजार के आसपास भी ऐसा ही नजारा दिखाई दिया। इस पूरे कॉरिडोर में 60 से ज्यादा पक्के बहुमंजिला मकान और होटल ढहकर नदी की धारा में समा गए। कई घर अपनी जगह से 10 से 15 मीटर तक खिसक गए और बाद में मलबे में बदल गए।

तबाही का असर नेपाल के हाइड्रोपावर सेक्टर पर भी पड़ा। चिलिमे, रसुवागढ़ी और त्रिशूली-3A समेत करीब 13 बड़े हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स बाढ़ से प्रभावित हुए। कई पावरहाउस और 220-kV सबस्टेशन पानी में डूब गए।

कई जगह बिजली के बड़े ट्रांसमिशन टावर भी बाढ़ और मलबे की चपेट में आ गए। इसके चलते मध्य नेपाल और काठमांडू के कई हिस्सों में बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई और ब्लैकआउट हो गया।

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4. भूस्खलन ने काटा संपर्क, मितेरी पुल और सड़कें भी तबाह

नेपाल में तबाही सिर्फ नदी के किनारे तक सीमित नहीं रही। तेज बहाव ने पहाड़ों के निचले हिस्सों की मिट्टी और चट्टानों को भी काट दिया। जब पहाड़ का आधार कमजोर हुआ तो ऊपरी हिस्सों से मिट्टी और चट्टानें नीचे गिरने लगीं। इससे कई जगह बड़े पैमाने पर भूस्खलन हुआ। नतीजा यह हुआ कि सड़कें बंद हो गईं। कई प्रभावित इलाकों का संपर्क बाकी हिस्सों से टूट गया।

नेपाल और चीन को जोड़ने वाला ऐतिहासिक मितेरी पुल यानी फ्रेंडशिप ब्रिज भी इस आपदा की चपेट में आया। इसके अलावा गल्छी-नुवाकोट-रसुवा राजमार्ग पर 50 से ज्यादा जगहों पर भारी भूस्खलन हुआ। कई सड़कों पर कई टन वजनी पत्थर और मलबा जमा हो गया।

टिमुरे इलाके में सेना का हेलीपैड भी भूस्खलन की चपेट में आकर बुरी तरह प्रभावित हुआ। इसका सीधा असर राहत और बचाव अभियान पर पड़ा। नेपाल सेना और सशस्त्र पुलिस बल के हेलीकॉप्टर को प्रभावित इलाकों तक पहुंचने में मुश्किल हुई।

5. पानी उतरा तो सामने आया असली खौफ, मलबे में दबे वाहन और लापता लोग

गुरुवार की सुबह कुछ इलाकों में पानी का स्तर 3 से 4 फीट तक कम हुआ। इसके बाद जो तस्वीर सामने आई, वह और भी डरावनी थी। जहां पहले सड़कें, बस स्टॉप, दुकानें और हरे-भरे खेत दिखाई देते थे, वहां अब 5 से 8 फीट तक गहरी गाद, मलबा और नुकीले पत्थर जमा थे।

इस मलबे में चीन से आयात किए गए सैकड़ों इलेक्ट्रिक वाहन और सामान से लदे कंटेनर ट्रक भी पलटे या दबे दिखाई दिए। नेपाल पुलिस और सेना की टीमें लगातार मलबा हटाकर लोगों और शवों की तलाश कर रही हैं।

कई शव बहकर नीचे के जिलों, खासकर धादिंग और चितवन, तक पहुंचने की खबर है। वहीं, 750 से ज्यादा लोगों के लापता होने से चिंता और बढ़ गई है। इनमें 133 से ज्यादा भारतीय तीर्थयात्री भी शामिल हैं, जो मानसरोवर यात्रा और ट्रैकिंग के लिए नेपाल-तिब्बत क्षेत्र में गए थे।

निष्कर्ष

नेपाल में 26 अगस्त 2026 को आई भीषण बाढ़ ने तबाही मचाई है, जिसमें 163 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और 750 से ज्यादा लोग लापता हैं। तिब्बत में ग्लेशियर टूटने से भोटेकोशी नदी में बाढ़ आई, जिसने घरों, सड़कों, पुलों और 13 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स को भारी नुकसान पहुंचाया। भारत ने नेपाल की मदद के लिए राहत अभियान शुरू किया है और 10 टन से ज्यादा मानवीय सहायता भेजी गई है।

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