Crude Oil Price In The Global Market – वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमत लगातार चढ़ रही है। ब्रेंट क्रूड का रेट लगातार तीसरे दिन भी तेज है और यह 5 फीसदी की तेजी के बाद 90 डॉलर प्रति बैरल के बेहद करीब पहुंच गया है। ईरान के साथ तनाव बढ़ने से कच्चे तेल का भाव उबल रहा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर ईरान से अतीत के संघर्षों में मारे गए लोगों के लिए मुआवजे की नई मांग रख दी है। ट्रंप की इस नई शर्त ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने की उम्मीदों को धूमिल कर दिया है….
Contents
तेल की कीमतें क्यों बढ़ रही हैं?
आज ब्रेंट क्रूड 5 फीसदी चढ़कर 87.77 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है। वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) भी 5.22 फीसदी महंगा होकर 82.21 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है। अमेरिकी बाजार जानकारों का कहना है कि अगर अमेरिका-ईरान में गतिरोध बना रहता है तो आने वाले दिनों में ब्रेंट क्रूड की कीमत में 10 से 15 डॉलर प्रति बैरल का और इजाफा हो सकता है।
तेल की कीमतों में इस तेजी के पीछे मुख्य कारण मध्य पूर्व में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव है। होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की आपूर्ति में रुकावट और ग्लोबल ऑयल इन्वेंट्री में तेजी से गिरावट आने से बाजार में घबराहट बढ़ गई है।
Also Read – अरुणाचल पर भारत के 27 नामों से चीन नाराज, जानिए क्यों अहम है यह कदम…
होर्मुज खुलने के आसार कम
ट्रंप ने अमेरिकी अधिकारियों से कहा है कि ईरान के साथ भविष्य की किसी भी बातचीत में उनके मुआवजे की मांग को प्रमुखता से उठाया जाए। खास बात यह है कि ईरान खुद युद्ध से हुए नुकसान के लिए 300 अरब डॉलर के मुआवजे पर अड़ा हुआ है। ईरान के पुनर्वास के लिए 300 अरब डॉलर का यह फंड उसी 14-सूत्रीय समझौते (MoU) का हिस्सा है, जिस पर ट्रंप ने जून में फ्रांस में G7 सम्मेलन के दौरान हस्ताक्षर किए थे।
दूसरी ओर, ईरान के विदेश मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि जब तक अमेरिका अपने नौसैनिक जहाजों से ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी नहीं हटाता, तब तक होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा नहीं खोला जाएगा। इससे वैश्विक तेल बाजार में अनिश्चितता और बढ़ गई है।
होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों अहम है?
होर्मुज जलडमरूमध्य विश्व के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। इससे रोजाना लाखों बैरल कच्चा तेल गुजरता है। वर्तमान तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से रोजाना सिर्फ 5 जहाज ही गुजर पा रहे हैं। आपूर्ति ठप होने से ग्लोबल ऑयल इन्वेंट्री में तेजी से गिरावट आ रही है।
टीडी सिक्योरिटीज के एक्सपर्ट बार्ट मेलेक का मानना है कि बंद पड़े जलडमरूमध्य और गिरते तेल भंडार के कारण बाजार में शॉर्ट पोजीशन रखने वाले निवेशक तेजी से कवरिंग करेंगे। सप्लाई सामान्य स्तर से काफी नीचे होने की वजह से कच्चे तेल की कीमतें मौजूदा स्तर से 10 से 15 डॉलर प्रति बैरल और ऊपर जा सकती हैं।
ट्रंप की नीति का असर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान के प्रति सख्त नीति का सीधा असर तेल बाजार पर पड़ रहा है। ट्रंप ने पहले भी ईरान को सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दी थी, जिसके बाद कच्चे तेल की कीमतों में जोरदार उछाल आया था।
पिछले महीनों में भी ट्रंप के बयानों के बाद कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर से ऊपर जा चुकी हैं। अप्रैल 2026 में ट्रंप की चेतावनी के बाद ब्रेंट क्रूड 110 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था।
आगे क्या हो सकता है?
विश्लेषकों का मानना है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत नहीं होती और होर्मुज जलडमरूमध्य बंद रहता है, तो कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल को पार कर सकती हैं। DBS बैंक का अनुमान है कि आने वाले दिनों में ब्रेंट क्रूड 80 से 100 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में रह सकता है।
OPEC+ भी अक्टूबर से कुछ समय के लिए उत्पादन बढ़ाने की योजना टाल सकता है, जिससे आपूर्ति पर और दबाव पड़ेगा। वहीं, अगर तनाव कम होता है और होर्मुज खुलता है, तो कीमतों में गिरावट आ सकती है।
भारत पर क्या असर होगा?
भारत अपनी तेल जरूरतों का ज्यादातर हिस्सा आयात से पूरा करता है। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से रुपये की कीमत पर दबाव पड़ सकता है और महंगाई बढ़ सकती है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी इजाफा हो सकता है, जिससे आम उपभोक्ताओं पर बोझ बढ़ेगा।
निष्कर्ष
कच्चे तेल की कीमतें अमेरिका-ईरान तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में रुकावट के कारण तेजी से बढ़ रही हैं। ट्रंप की नई मुआवजे की मांग ने बातचीत की उम्मीदों को और कमजोर कर दिया है।
अगर यह गतिरोध बना रहता है, तो ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल को पार कर सकता है। निवेशकों और उपभोक्ताओं को आने वाले दिनों में बाजार में उतार-चढ़ाव के लिए तैयार रहना चाहिए।

