JPSC Exam Irregularities – झारखंड लोक सेवा आयोग यानी JPSC की 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित गड़बड़ी की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, मामले में नए और गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं। सीआईडी के अनुसार, गिरफ्तार किए गए अभय कुमार तिवारी ने पूछताछ में बताया है कि ब्लैकलिस्टेड एजेंसी टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड यानी TDPL को परीक्षा का काम दिलाने के लिए कथित तौर पर करोड़ों रुपये की ‘कट मनी डील’ हुई थी….
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जांच एजेंसी अब इस कथित डील, एजेंसी के चयन और परीक्षा प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों की भूमिका की जांच कर रही है। हालांकि, अभय तिवारी के बयान और उसके आधार पर लगाए गए आरोपों को अभी अदालत में साबित होना बाकी है। किसी भी अधिकारी या संस्था की भूमिका पर अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही निकलेगा।
ब्लैकलिस्टेड एजेंसी को कैसे मिला काम?
सीआईडी की जांच के अनुसार, TDPL को परीक्षा संचालन का जिम्मा ऐसे समय दिया गया, जब उसके खिलाफ पहले से गंभीर आपत्तियां मौजूद थीं। तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक ने कथित तौर पर आयोग के शीर्ष नेतृत्व को लिखित रूप से बताया था कि एजेंसी को झारखंड कर्मचारी चयन आयोग ने अनुबंध की शर्तों के उल्लंघन के कारण 20 मई 2025 को ब्लैकलिस्ट और डी-लिस्ट कर दिया था।
रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि TDPL पर उत्तर प्रदेश और कुछ अन्य राज्यों में परीक्षा संबंधी अनियमितताओं के आरोपों के कारण कार्रवाई हुई थी। इसके बावजूद एजेंसी को JPSC की एक बेहद संवेदनशील परीक्षा का काम सौंपा गया। जांच का अहम बिंदु यही है कि क्या आयोग के अधिकारियों को एजेंसी के पुराने रिकॉर्ड की जानकारी थी और यदि थी, तो उसे नजरअंदाज क्यों किया गया।
खुली निविदा के बजाय नॉमिनेशन
आरोप है कि TDPL को खुली निविदा प्रक्रिया के बजाय सीधे नॉमिनेशन के आधार पर काम दिया गया। आम तौर पर इतनी महत्वपूर्ण भर्ती परीक्षा के लिए एजेंसी का चयन पारदर्शी प्रक्रिया, तकनीकी जांच और पात्रता मानकों के आधार पर किया जाता है।
सीआईडी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि एजेंसी के चयन की फाइल किस स्तर पर तैयार हुई, किन अधिकारियों ने उस पर हस्ताक्षर किए और परीक्षा संचालन की जिम्मेदारी देने का अंतिम निर्णय किसने लिया। यदि किसी अधिकारी ने नियमों की अनदेखी की, तो उसकी भूमिका और संभावित लाभ की भी जांच की जाएगी।
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पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते से पूछताछ
TDPL के चयन को लेकर जांच का सबसे बड़ा फोकस JPSC के तत्कालीन अध्यक्ष और झारखंड के पूर्व मुख्य सचिव एल. खियांग्ते पर है। सीआईडी की टीम उनसे चार अलग-अलग चरणों में 30 घंटे से अधिक समय तक पूछताछ कर चुकी है। अधिकारियों से पूछताछ का उद्देश्य यह समझना है कि एजेंसी के चयन के समय उन्हें TDPL के ब्लैकलिस्टेड होने की जानकारी थी या नहीं।
पूछताछ के दौरान एल. खियांग्ते ने अपना बचाव करते हुए कथित तौर पर कहा कि चयन के समय आयोग को एजेंसी के ब्लैकलिस्टेड होने की आधिकारिक जानकारी नहीं थी। उन्होंने इसे प्रशासनिक चूक बताया है। अब सीआईडी इस दावे की जांच दस्तावेजों, फाइल नोटिंग और तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक की लिखित आपत्तियों से कर रही है।
यदि रिकॉर्ड से यह साबित होता है कि ब्लैकलिस्टिंग की जानकारी आयोग तक पहुंची थी, तो यह जांच का महत्वपूर्ण मोड़ होगा। इसके विपरीत, अगर आधिकारिक रिकॉर्ड में जानकारी नहीं होने की बात सही पाई जाती है, तो जिम्मेदारी का निर्धारण अलग तरीके से किया जाएगा।
अभय तिवारी की भूमिका
सीआईडी अभय कुमार तिवारी को इस कथित नेटवर्क का मुख्य संचालक मान रही है। जांच रिपोर्टों के अनुसार, वह TDPL से जुड़ा था और साथ ही सरकारी पद पर भी कार्यरत था। उस पर आरोप है कि उसने अभ्यर्थियों, एजेंसी से जुड़े लोगों और परीक्षा प्रक्रिया में प्रभाव रखने वाले व्यक्तियों के बीच संपर्क का काम किया।
पहले की जांच में यह भी सामने आया था कि अभय तिवारी ने कथित तौर पर नौकरी दिलाने के नाम पर उम्मीदवारों से बड़ी रकम वसूलने का नेटवर्क बनाया था। कुछ रिपोर्टों में पूरे रैकेट का संभावित कारोबार करीब 40 करोड़ रुपये बताया गया है। हालांकि, इस रकम और नेटवर्क के आकार की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, अभय तिवारी ने कई सरकारी नौकरी परीक्षाएं पास की थीं। सीआईडी ने अलग-अलग भर्ती एजेंसियों से उसके परीक्षा रिकॉर्ड और नियुक्ति से जुड़े दस्तावेज मांगे हैं। जांच एजेंसी यह पता लगाना चाहती है कि उसकी सफलता सामान्य थी या उसने किसी परीक्षा में अनुचित साधनों का इस्तेमाल किया।
कार्यालय सील, 19 आरोपी गिरफ्तार
सीआईडी ने TDPL के रांची और लखनऊ स्थित कार्यालयों को सील कर दिया है। वहां से कंप्यूटर, सर्वर, दस्तावेज, परीक्षा संबंधी रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल सामग्री जब्त किए जाने की बात सामने आई है। इन सामानों की फॉरेंसिक जांच से OMR शीट, अभ्यर्थियों के डेटा और परिणाम प्रक्रिया में संभावित छेड़छाड़ का पता लगाया जा सकता है।
मामले में उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता, TDPL के निदेशक रामवीर सिंह, अभय तिवारी और पूर्व अध्यक्ष के कंप्यूटर ऑपरेटर सहित अब तक 19 आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी दी गई है। CID अब JPSC के वर्तमान सदस्यों से भी पूछताछ कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कथित समानांतर सिंडिकेट में और कौन-कौन लोग शामिल थे।
छात्रों के आंदोलन पर असर
इस खुलासे के बाद छात्रों का आंदोलन और तेज हो सकता है। प्रदर्शनकारी पहले से ही परीक्षा रद्द करने, स्वतंत्र जांच और पूरी भर्ती प्रक्रिया की समीक्षा की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि ब्लैकलिस्टेड एजेंसी को वास्तव में नियमों को नजरअंदाज कर काम दिया गया, तो परीक्षा की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
छात्र संगठनों ने CBI और ED जांच, परीक्षा रद्द करने और भविष्य के लिए पारदर्शी भर्ती कैलेंडर की मांग की है। उनका तर्क है कि केवल कुछ गिरफ्तारियों से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि पूरी चयन प्रक्रिया और वित्तीय लेनदेन की जांच जरूरी है।
निष्कर्ष
JPSC परीक्षा गड़बड़ी मामले में अभय तिवारी के कथित कबूलनामे ने ब्लैकलिस्टेड एजेंसी को काम दिए जाने और ‘कट मनी डील’ के आरोपों को केंद्र में ला दिया है। अब जांच का मुख्य सवाल यह है कि TDPL का चयन किस प्रक्रिया से हुआ, किसे इसकी जानकारी थी और क्या इसके बदले किसी स्तर पर आर्थिक लाभ लिया गया।
फिलहाल आरोप गंभीर हैं, लेकिन अंतिम सच्चाई दस्तावेजी साक्ष्यों, डिजिटल रिकॉर्ड और अदालत में होने वाली सुनवाई के बाद ही सामने आएगी।

