JPSC Files – झारखंड में छात्र आंदोलन की जड़ केवल 14वीं JPSC सिविल सर्विस प्रीलिम्स एग्जाम 2025 के रिजल्ट से नहीं, बल्कि पूरे भर्ती तंत्र में कथित अनियमितताओं की जांच से जुड़ी है। CID की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए एंगल सामने आ रहे हैं जो बताते हैं कि मामला सिर्फ एक परीक्षा तक सीमित नहीं है…
Contents
जांच का दायरा एक परीक्षा से कहीं व्यापक
CID ने 22 जुलाई 2026 को केस नंबर 16/2026 दर्ज किया था। इस केस का शीर्षक केवल 14वीं JPSC परीक्षा नहीं, बल्कि JPSC द्वारा आयोजित विभिन्न प्रतियोगिता परीक्षाओं में कथित अनियमितताएं है। यही इस जांच का पहला बड़ा संकेत है कि एजेंसी का दायरा एक परीक्षा से कहीं व्यापक है।
14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 19 अप्रैल 2026 को आयोजित की गई थी। रिजल्ट जारी होने के बाद से ही JPSC सिविल सर्विस एग्जाम 2025 प्रक्रिया सवालों के घेरे में आ गई। 22 जुलाई को ही JPSC ने मेंस परीक्षा को स्थगित कर दिया और 25 जुलाई से रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में देवेंद्र नाथ महतो के नेतृत्व में आंदोलन शुरू हो गया।
अधिकारी ही नहीं, कैंडिडेट्स भी जांच के दायरे में
इस मामले में CID की जांच आगे बढ़ती गई और मामला खुलता गया। 30 जुलाई को पहला बड़ा खुलासा हुआ। झारखंड संयुक्त सिविल सर्विस परीक्षा 2025 में चयनित कैंडिडेट सुमन सोरेन को गिरफ्तार किया गया। CID ने कहा कि उसने अनुचित तरीके से परीक्षा पास करने की बात स्वीकार की है, हालांकि उसके पास से OMR की कार्बन कॉपी बरामद नहीं हुई।
यह गिरफ्तारी बताती है कि जांच केवल अधिकारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि अभ्यर्थियों तक भी पहुंच चुकी है। गड़बड़ी के तीन बड़े किरदार सामने आए हैं-JPSC, परीक्षा आयोजित करने वाली निजी एजेंसी TSR Data Processing Pvt. Ltd यानी TDPL और उससे जुड़ा कथित बाहरी नेटवर्क।
अभय तिवारी की गिरफ्तारी बड़ा संकेत
इस मामले में 3 अगस्त को CID ने राज्यभर में 18 स्थानों पर छापेमारी की। रांची, पलामू, हजारीबाग, बोकारो और धनबाद में हुई इन कार्रवाइयों में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, बैंकिंग दस्तावेज़, OMR की कार्बन कॉपियां, एडमिट कार्ड और अन्य रिकॉर्ड जब्त किए गए।
जांच में पहली बार अभय तिवारी का नाम सामने आया। CID ने कहा कि जांच में यह तथ्य सामने आए हैं कि उसने कई केंद्रीय और राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाएं पास कीं, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि इन तथ्यों का सत्यापन अभी बाकी है। यह सावधानी इस बात का संकेत है कि जांच एजेंसी अभी निष्कर्ष पर नहीं पहुंची है।
Also Read – JPSC-JSSC Scam : परीक्षा एजेंसी का अकाउंटेंट रक्षक सिंह लखनऊ से गिरफ्तार, खुद भी PT एग्जाम में हुआ था पास…
4 अगस्त को CID ने उमेश कुमार, बुद्धेश्वर भगत और रमेश कुमार की गिरफ्तारी की जानकारी दी। एजेंसी ने कहा कि इनकी गिरफ्तारी साक्ष्यों के आधार पर की गई और इनके पास से डिजिटल व अभिलेखीय साक्ष्य भी जब्त किए गए। इसके साथ ही गिरफ्तारियों की संख्या 14 पहुंच गई।
JPSC के अधिकारियों और TDPL पर भी कार्रवाई
इसी दौरान JPSC के अधिकारियों और TDPL से जुड़े लोगों पर भी कार्रवाई हुई। तत्कालीन JPSC अध्यक्ष और झारखंड के पूर्व मुख्य सचिव एल. खियांग्ते से भी CID ने पूछताछ की है। 1 अगस्त की रिपोर्ट के अनुसार, उनसे शुक्रवार को करीब आठ घंटे पूछताछ की गई।
CID परीक्षा संचालन, OMR शीट और निजी एजेंसी की भूमिका सहित कई बिंदुओं की जांच कर रही है। जांच एजेंसी भर्ती प्रक्रिया, परीक्षा संचालन और निजी एजेंसी की भूमिका समेत कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर ख्यांग्ते से सवाल-जवाब कर रही है।
छात्रों की मांगें और आंदोलन
रांची में हजारों छात्रों ने JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली के विरोध में मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों ने 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा रद्द कर दोबारा कराने, CBI जांच और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की।
आंदोलनकारी छात्रों की मुख्य मांग है कि JPSC और JSSC की सभी विवादित परीक्षाओं की CBI से जांच कराई जाए। इसके अलावा भर्ती प्रक्रिया में व्यापक सुधार और भविष्य में पूरी तरह पारदर्शी परीक्षा प्रणाली लागू की जाए।
निष्कर्ष
इस पूरी जांच में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि CID अभी किसी बड़े निष्कर्ष की सार्वजनिक घोषणा नहीं कर रही। बल्कि एक ही वाक्य दोहराया गया है कि जांच जारी है। जांच के दौरान प्राप्त होने वाले साक्ष्यों के आधार पर अग्रेतर विधि-सम्मत कार्रवाई की जाएगी।
इसका अर्थ है कि जांच अभी खुली हुई है और एजेंसी लगातार नए साक्ष्य जोड़ रही है। यही कारण है कि इस मामले को केवल 14 गिरफ्तारियां या JPSC घोटाला कहकर समझना पर्याप्त नहीं होगा।

