250 Chinese ‘Killer’ Cannons – पाकिस्तान और चीन के बढ़ते सैन्य सहयोग को लेकर एक नई रिपोर्ट ने भारत की सुरक्षा एजेंसियों की निगाहें और तेज कर दी हैं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, पाकिस्तान ने भारत से सटी सीमाओं पर चीन निर्मित 250 SH-15 ट्रक-माउंटेड सेल्फ-प्रोपेल्ड होवित्जर तोपें तैनात कर दी हैं। इन तोपों की मारक क्षमता रॉकेट-असिस्टेड गोला-बारूद के साथ करीब 72 किलोमीटर तक बताई जा रही है…
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यह तैनाती उत्तर से दक्षिण तक भारत से लगी पाकिस्तान की सीमा पर व्यवस्थित तरीके से की जा रही है। इसे ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान की सबसे बड़ी आर्टिलरी तैनाती माना जा रहा है। भारत ने उस ऑपरेशन में पाकिस्तान के भीतर आतंकवादी और सैन्य ठिकानों पर सटीक हमले किए थे, जिसके बाद से दोनों देशों के बीच सैन्य सतर्कता और बढ़ गई थी।
SH-15 तोप चीन की सरकारी रक्षा कंपनी NORINCO द्वारा बनाई गई है और यह PCL-181 सिस्टम का निर्यात संस्करण मानी जाती है। यह 6×6 बख्तरबंद ट्रक चेसिस पर लगी रहती है, जिसकी वजह से इसे तेजी से एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाया जा सकता है। सड़क पर इसकी रफ्तार लगभग 90 किलोमीटर प्रति घंटे तक बताई जाती है, और यही इसकी “शूट एंड स्कूट” यानी फायर करके तुरंत स्थान बदलने वाली क्षमता को खतरनाक बनाती है।
इस सिस्टम की तकनीकी खूबियां भी काफी अहम मानी जा रही हैं। सामान्य गोला-बारूद से यह लगभग 30 से 40 किलोमीटर तक हमला कर सकती है, जबकि रॉकेट-असिस्टेड प्रोजेक्टाइल के साथ इसकी रेंज 53 से 72 किलोमीटर तक पहुंच सकती है। रिपोर्टों के मुताबिक, यह प्रति मिनट छह राउंड तक फायर कर सकती है, जिससे युद्ध या सीमा संघर्ष की स्थिति में यह एक तेज और लचीला हथियार प्लेटफॉर्म बन जाती है।
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रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि पाकिस्तान की यह तैनाती केवल सैन्य तैयारी नहीं, बल्कि रणनीतिक संदेश भी है। विश्लेषकों के अनुसार, पाकिस्तान के भीतर पीओजेके, खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में बढ़ती अलगाववादी हिंसा से ध्यान हटाने के लिए इस्लामाबाद भारत के खिलाफ तनाव बढ़ाने की कोशिश कर सकता है। हालांकि, यह दावा फिलहाल रिपोर्टों और खुफिया सूत्रों पर आधारित है, और इसकी स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।
इसी पृष्ठभूमि में पाकिस्तान के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने रावलपिंडी में आयोजित एक कार्यक्रम में चीन और पाकिस्तान के संबंधों को “अद्वितीय” और समय की कसौटी पर खरा उतरने वाला बताया। यह कार्यक्रम पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की 99वीं वर्षगांठ के मौके पर आयोजित किया गया था। मुनीर के इस बयान को भी चीन-पाक सैन्य साझेदारी को और मजबूत करने वाले संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
रिपोर्टों के अनुसार, चीन न सिर्फ हथियारों की आपूर्ति कर रहा है, बल्कि पाकिस्तान के साथ संयुक्त सैन्य अभ्यास और खुफिया क्षमता बढ़ाने में भी मदद कर रहा है। इससे पाकिस्तान की निगरानी, लक्षित हमले और लॉजिस्टिक तैयारी पहले से ज्यादा मजबूत हो सकती है। यही वजह है कि भारतीय सुरक्षा एजेंसियां और तीनों सेनाएं इस पूरे घटनाक्रम पर कड़ी नजर रखे हुए हैं।
भारत की तरफ से फिलहाल आधिकारिक स्तर पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन सैन्य तैनाती और नई हथियार प्रणालियों की खबरें निश्चित रूप से सीमा पर तनाव बढ़ाती हैं। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी तैनातियां अक्सर दबाव बनाने और सामरिक बढ़त दिखाने के लिए की जाती हैं, लेकिन इससे क्षेत्रीय स्थिरता पर असर पड़ सकता है।
कुल मिलाकर, पाकिस्तान की सीमा पर 250 चीनी SH-15 तोपों की तैनाती एक गंभीर सैन्य विकास के रूप में देखी जा रही है। इसकी तकनीकी क्षमता, तेज मूवमेंट और लंबी मारक दूरी इसे खतरनाक बनाती है, लेकिन इसका सीधा अर्थ युद्ध की शुरुआत नहीं माना जा सकता। फिलहाल यह मामला रणनीतिक दबाव, सैन्य आधुनिकीकरण और भारत-पाक संबंधों में बढ़ती असहजता का संकेत ज्यादा देता है।

