AI Glasses At Jantar Mantar – दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर फेशियल रिकॉग्निशन सिस्टम (FRS) और AI-सक्षम स्मार्ट चश्मे का इस्तेमाल करके 215 वांटेड अपराधियों की पहचान की है। यह तकनीक भीड़ में छिपे संदिग्धों को तुरंत चिन्हित करने के लिए बनाई गई है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था पर दबाव कम हो सके….

यह सिस्टम कैसे काम करता है

यह चश्मा एक मोबाइल से जुड़ा रहता है और सामने से गुजरने वाले चेहरों को रियल टाइम में स्कैन करता है। स्कैन किया गया चेहरा अगर पुलिस के डेटाबेस से मेल खाता है तो मोबाइल स्क्रीन पर लाल फ्रेम दिखता है और तुरंत अलर्ट मिल जाता है।

कितने लोगों का डेटा

रिपोर्टों के अनुसार इस सिस्टम में करीब 65 हजार अपराधियों और आतंकियों का डेटा फीड है। इसमें वांटेड अपराधी, हिस्ट्रीशीटर, कोर्ट से भगोड़े और आतंकी नेटवर्क से जुड़े चेहरे शामिल हैं।

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क्यों लगाया गया

दिल्ली पुलिस के मुताबिक जंतर-मंतर जैसे संवेदनशील और भीड़भाड़ वाले इलाकों में यह सिस्टम खास तौर पर उन लोगों की पहचान के लिए लगाया गया है जिनके खिलाफ पहले से केस दर्ज हैं। पुलिस का कहना है कि इसका मकसद आम प्रदर्शनकारियों पर नजर रखना नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था को बाधित करने वाले संदिग्धों को चिन्हित करना है।

“तीसरी आंख” क्यों कहा जा रहा

इस AI चश्मे को दिल्ली पुलिस की “तीसरी आंख” इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि यह बिना शोर-शराबे के चेहरे पहचानकर पुलिस को तुरंत संकेत देता है। सामान्य काले चश्मे जैसा दिखने वाला यह गैजेट असल में हाई-टेक सर्विलांस टूल है, जिसे पहली बार गणतंत्र दिवस सुरक्षा के दौरान पेश किया गया था।

क्या यह सिर्फ जंतर-मंतर तक सीमित है

नहीं, इस तरह की तकनीक का इस्तेमाल बड़े आयोजनों, वीआईपी सुरक्षा और संवेदनशील इलाकों में भी किया जा सकता है। जंतर-मंतर पर इसका इस्तेमाल खास इसलिए चर्चा में है क्योंकि वहां लगातार विरोध-प्रदर्शन चल रहे हैं और पुलिस को भीड़ में छिपे पुराने अपराधियों की आशंका रहती है।

असली असर क्या है

इस तकनीक की सबसे बड़ी ताकत यह है कि यह भीड़ में मौजूद संदिग्ध को बहुत जल्दी पकड़ने में मदद कर सकती है। इससे पुलिस को मौके पर कार्रवाई का फायदा मिलता है और आम लोगों की अनावश्यक जांच भी कम हो सकती है।

सावधानी की बात

हालांकि ऐसी तकनीक पर निजता और गलत पहचान को लेकर सवाल भी उठते हैं। फेशियल रिकॉग्निशन सिस्टम जितना तेज है, उतना ही जरूरी है कि उसका इस्तेमाल सीमित, पारदर्शी और कानूनी दायरे में हो।

निष्कर्ष

सीधे शब्दों में, जंतर-मंतर पर 215 अपराधियों की पहचान किसी “जादुई चश्मे” से नहीं, बल्कि AI-आधारित फेशियल रिकॉग्निशन सिस्टम से हुई है। यह तकनीक चेहरे को डेटाबेस से मिलाकर पुलिस को अलर्ट देती है, और इसी वजह से भीड़ में छिपे वांटेड लोगों को पकड़ना आसान हुआ

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