Nitin Gadkari Ethanol Business – पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने की नीति को लेकर जारी विवाद के बीच केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने अपने बेटों के कारोबार से जुड़े आरोपों पर सफाई दी है। उन्होंने साफ कहा है कि उनके बेटों के बिज़नेस में एथेनॉल की हिस्सेदारी न के बराबर है और उन पर लग रहे हितों के टकराव के आरोप राजनीति से प्रेरित हैं…
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आरोप क्यों लगे?
देश में E20 पेट्रोल को लेकर पहले से ही बहस चल रही है। कई वाहन मालिकों का दावा है कि इससे माइलेज घट रही है और इंजन पर असर पड़ रहा है। इसी बहस के बीच कुछ लोग यह आरोप भी लगा रहे हैं कि गडकरी एथेनॉल नीति को अपने परिवार के कारोबारी हितों के लिए बढ़ावा दे रहे हैं। इन्हीं आरोपों पर गडकरी ने अब खुलकर जवाब दिया है और कहा है कि उनका परिवार इस नीति से कोई खास लाभ नहीं उठा रहा।
गडकरी के बेटों का कारोबार क्या है?
गडकरी के दो बेटे हैं—निखिल गडकरी और सारंग गडकरी। उनके कारोबारी हित मुख्य रूप से CIAN Agro Industries और Manas Agro Industries and Infrastructure Limited से जुड़े बताए जाते हैं।
लेकिन गडकरी के मुताबिक, एथेनॉल उनकी कंपनियों की कमाई का बहुत छोटा हिस्सा है। उन्होंने यह भी कहा कि परिवार का चीनी मिल व्यवसाय एथेनॉल चर्चा शुरू होने से पहले से मौजूद है।
कारोबार पर कितना कर्ज है?
गडकरी ने दावा किया कि उनके बेटों से जुड़े इस व्यवसाय पर लगभग 1,600 करोड़ रुपये का कर्ज है। यह बयान इसलिए अहम है क्योंकि इससे यह तर्क कमजोर पड़ता है कि यह कारोबार किसी तरह से बहुत बड़ा और सीधे सरकारी नीति से फायदा उठाने वाला मॉडल है। उनके अनुसार, यह कारोबार किसी आसान लाभ वाला क्षेत्र नहीं है, बल्कि भारी वित्तीय दबाव में चल रहा है।
क्या गडकरी खुद इसमें शामिल हैं?
गडकरी ने कहा कि न तो वे पारिवारिक व्यवसाय चलाते हैं और न ही एथेनॉल की कीमत तय करने या सरकारी खरीद प्रक्रिया में उनकी कोई भूमिका है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम पेट्रोलियम मंत्रालय के तहत चलता है और इसकी कीमत केंद्रीय मंत्रिमंडल तय करता है। यानी, उनके अनुसार, नीति निर्माण और व्यक्तिगत कारोबारी हितों के बीच सीधा संबंध नहीं है।
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एथेनॉल को क्यों बढ़ावा दिया गया?
गडकरी ने यह भी कहा कि वे सिर्फ गन्ने से बनने वाले एथेनॉल की वकालत नहीं कर रहे। उन्होंने मक्का, बांस और यहां तक कि किसानों की पराली से एथेनॉल बनाने पर भी जोर दिया है।
उनका तर्क है कि इससे:
- आयातित ईंधन पर निर्भरता घटेगी,
- किसानों को अतिरिक्त आय मिलेगी,
- और वैकल्पिक ईंधन स्रोत विकसित होंगे।
क्या यह नीति नई है?
गडकरी ने यह भी कहा कि पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने की शुरुआत उनके कार्यकाल में नहीं हुई थी। उनके मुताबिक, इस कार्यक्रम की नींव अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के समय रखी गई थी और बाद में UPA सरकार ने भी इसे आगे बढ़ाया।
इस तरह वे यह दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि यह नीति किसी एक मंत्री की निजी पहल नहीं, बल्कि लंबे समय से चली आ रही सरकारी प्रक्रिया का हिस्सा है।
विवाद की जड़ क्या है?
विवाद की जड़ दो मुद्दों में है…
- पहला, E20 पेट्रोल को लेकर आम लोगों की माइलेज और इंजन सेहत से जुड़ी चिंता।
- दूसरा, गडकरी के परिवार से जुड़े कारोबारी हितों पर उठ रहे सवाल।
- इन्हीं दोनों वजहों से यह बहस तकनीकी मुद्दे से निकलकर राजनीतिक विवाद में बदल गई है।
निष्कर्ष
नितिन गडकरी ने अपने बेटों के एथेनॉल कारोबार पर लगे आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनके मुताबिक, कारोबार में एथेनॉल की हिस्सेदारी बहुत कम है, उस पर भारी कर्ज है और नीति बनाने में उनकी कोई निजी भूमिका नहीं है। फिलहाल E20 और एथेनॉल ब्लेंडिंग को लेकर बहस जारी है, लेकिन गडकरी की यह सफाई साफ संकेत देती है कि वे इस विवाद को व्यक्तिगत हितों से जोड़ने के आरोपों को स्वीकार नहीं कर रहे।

