India’s Passport Ranking Dropped – कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भारतीय पासपोर्ट की रैंकिंग को लेकर मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। उनका कहना है कि सरकार की नीतियों की वजह से भारत की वैश्विक साख कमजोर हुई है और नागरिकों को अब पासपोर्ट सेवाओं के लिए ज्यादा पैसा भी देना पड़ रहा है…
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खरगे ने क्या कहा?
खरगे ने X पोस्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 2018 की उस टिप्पणी का जिक्र किया, जिसमें उन्होंने भारतीय पासपोर्ट की ताकत और सम्मान की बात कही थी। खरगे ने सवाल उठाया कि अगर पासपोर्ट इतना मजबूत है, तो वर्तमान रैंकिंग में गिरावट क्यों आई। उनके मुताबिक, मौजूदा हालात सरकार के दावों से मेल नहीं खाते।
रैंकिंग में गिरावट का दावा
खरगे ने कहा कि एक वैश्विक पासपोर्ट रैंकिंग के मुताबिक भारत 2013 में 74वें स्थान पर था, जो अब जून 2026 में 80वें स्थान पर पहुंच गया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि ग्लोबल सिटिजन सॉल्यूशंस के ग्लोबल पासपोर्ट इंडेक्स में भारत की स्थिति और भी खराब बताई गई है।
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फीस बढ़ाने पर सवाल
कांग्रेस अध्यक्ष ने पासपोर्ट सेवाओं की लागत बढ़ने पर भी सवाल उठाए। उनके मुताबिक:
- पासपोर्ट फीस ₹1,500 से बढ़कर ₹2,500 हो गई है।
- तत्काल सेवा का चार्ज ₹5,000 तक पहुंच गया है।
उनका तर्क है कि जब सेवाएं बेहतर नहीं हुईं, तो जनता से ज्यादा पैसा लेना उचित नहीं है।
वीजा पोर्टल पर भी निशाना
खरगे ने भारत के आधिकारिक वीजा आवेदन पोर्टल को लेकर भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह इतना पुराना और उलझाने वाला लगता है कि 1990 के दशक के आखिर की वेबसाइट जैसा महसूस होता है। उनके अनुसार, ऐसे हालात में भारत का पर्यटन और आतिथ्य संदेश कमजोर पड़ता है।
राजनीतिक संदेश क्या है?
खरगे की यह टिप्पणी सिर्फ पासपोर्ट रैंकिंग तक सीमित नहीं है। वे यह संदेश देना चाह रहे हैं कि:
- सरकार का विदेश नीति और प्रशासनिक सेवा सुधार का दावा कमजोर है।
- आम नागरिकों को बेहतर सेवा के बजाय ज्यादा खर्च झेलना पड़ रहा है।
- भारत की छवि को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जितना मजबूत दिखाया जाता है, जमीनी हकीकत उतनी अच्छी नहीं है।
निष्कर्ष
खरगे ने पासपोर्ट रैंकिंग, बढ़ी हुई फीस और खराब ऑनलाइन सेवाओं के जरिए मोदी सरकार पर निशाना साधा है। उनके मुताबिक, भारत की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है और सरकार को दावों के बजाय वास्तविक सेवाओं पर ध्यान देना चाहिए।
