देश की राजनीति में तेजी से बदलाव – पिछले महीने विधानसभा चुनावों के नतीजे आने के बाद से देश की राजनीति में तेजी से बदलाव हो रहे हैं। द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) और कांग्रेस के रास्ते अलग हो गए हैं।
वहीं 15 साल सरकार चलाने के बाद सत्ता से बाहर हुईं ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) विधानसभा में टूट के कगार पर है और आगे चलकर ऐसा ही कुछ संसद में भी होने की आशंका जताई जा रही है।
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संसद में मजबूत DMK और टीएमसी की संख्या को देखकर सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) की आंखों में चमक आ गई है।
उसे अब लगने लगा है कि अगर इन दोनों के कुछ सांसद प्रत्यक्ष या फिर अप्रत्यक्ष तौर पर भी उसके साथ आ जाएंगे तो परिसीमन बिल जैसे कई अन्य बिल के लिए जरूरी बहुमत तक वह आसानी से पहुंच सकती है।
मोदी सरकार के पास दो तिहाई बहुमत नहीं : 362 सांसदों की जरूरत
भले ही पूर्ण बहुमत की सरकार चला रही नरेंद्र मोदी सरकार संसद में मजबूत दिखती हो लेकिन उसके पास दो तिहाई बहुमत किसी भी सदन में नहीं है।
लोकसभा में दो तिहाई बहुमत:
- 362 सांसदों का समर्थन चाहिए
महिला आरक्षण परिसीमन बिल:
हाल ही में जब महिला आरक्षण के आलोक में परिसीमन (संशोधन) बिल लाया गया तो:
| विवरण | संख्या |
|---|---|
| समर्थन में वोट | 298 सांसद |
| कम पड़े | 64 सांसद |
| विरोध में वोट | 230 विधायक |
| एनडीए कुल सांसद | 293 |
यानी 64 सांसद कम थे। विरोध में कुल 230 विधायकों ने वोट किया था।
बता दें कि एनडीए के पास कुल 293 सांसद हैं लेकिन उसे कुछ बाहरी सांसदों के समर्थन के बावजूद कामयाबी नहीं मिली।
BJP की कोशिश : DMK को साधना, TMC में टूट लाना
ऐसे में अब BJP की कोशिश है कि कांग्रेस से राहें अलग होने के बाद वह डीएमके को साध सके।
साथ ही, अगर टीएमसी के संसदीय दल में भी टूट हो जाए तो एनडीए का काम बन सकता है।
इस बात की सुगबुगाहट है कि आगामी मॉनसून सत्र में ऐसा ही कुछ देखने को मिल सकता है।
लोकसभा में संख्या बल:
लोकसभा में इन दोनों दलों को मिलाकर कुल 51 सांसद हैं और अगर ये सभी सांसद बिल के पक्ष में वोटिंग करते हैं तो:
| परिणाम | विवरण |
|---|---|
| दो तिहाई | एनडीए भले ही दो तिहाई तक न पहुंचे |
| काम आसान | उसका काम जरूर आसान हो सकता है |
DMK और TMC का संख्या बल : राज्यसभा + लोकसभा
क्या है DMK और TMC का संख्या बल?
राज्यसभा:
| पार्टी | स्थान | सांसदों की संख्या |
|---|---|---|
| तृणमूल (TMC) | तीसरी सबसे बड़ी | 13 |
| डीएमके (DMK) | चौथी सबसे बड़ी | 8 |
| कुल (राज्यसभा) | – | 21 |
राज्यसभा में तृणमूल तीसरी सबसे बड़ी पार्टी है और उसके सांसदों की संख्या 13 है।
वहीं राज्यसभा में डीएमके चौथी सबसे बड़ी पार्टी है और उसके कुल 8 सांसद हैं।
इस तरह राज्यसभा में यह संख्या 21 हो जाती है।
लोकसभा
| पार्टी | स्थान | सांसदों की संख्या |
|---|---|---|
| टीएमसी | चौथी सबसे बड़ी | 29 |
| डीएमके | पांचवीं सबसे बड़ी | 22 |
| कुल (लोकसभा) | – | 51 |
लोकसभा की बात करें तो 29 सांसदों वाली टीएमसी चौथी और 22 सांसदों वाली डीएमके पांचवीं सबसे बड़ी पार्टी है।
लोकसभा में देखें तो इन दोनों पार्टियों के सांसदों की संख्या 51 है।
बीजेपी के नेताओं की सुगबुगाहट : TMC सांसदों के संपर्क में
यही वजह है कि भले ही बंगाल बीजेपी के नेता शामिक भट्टाचार्य कह रहे हों कि टीएमसी के विधायकों के लिए उसके रास्ते बंद हैं लेकिन बीजेपी के ही कई नेता टीएमसी के सांसदों के संपर्क में होने की बात कह चुके हैं।
AAP की टूट पहले ही : 7 में से 10 राज्यसभा सांसद BJP में
इन दोनों दलों से पहले आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा संसदीय दल में पहले ही टूट हो चुकी है।
- उसके 10 में से 7 राज्यसभा सांसद अब BJP में शामिल हो गए हैं
- उन्हें BJP सांसद के तौर पर मान्यता भी मिल गई है
ऐसे में अगर टीएमसी के भी राज्यसभा संसदीय दल में ऐसी टूट होती है तो बीजेपी खुले दिल से उनका स्वागत करेगी।
हर टूट से बीजेपी को हुआ है फायदा
इससे पहले, शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) में टूट का फायदा बीजेपी को मिला है।
बीजू जनता दल (BJD) के भी कई सांसद पार्टी छोड़कर बीजेपी में आ चुके हैं, ऐसे में बीजेपी को इन सांसदों के आने से कोई गुरेज नहीं होगा।
DMK भी साथ आएगी? तमिलनाडु में कांग्रेस से अलगाव
तमिलनाडु की राजनीति में जो घटा है उससे डीएमके को बेहद हैरानी हुई है।
तमिलागा वेट्री कड़गम (TVK) की जीत के तुरंत बाद कांग्रेस ने उसे समर्थन देकर डीएमके से गठबंधन तोड़ दिया था।
डीएमके भी ने लोकसभा के स्पीकर को चिट्ठी लिखकर मांग कर डाली थी कि अब उसके सांसदों को कांग्रेस से अलग बैठाया जाए।
उधर क सुगबुगाहट यह भी है कि बीजेपी संसद में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए डीएमके को भी साथ ला सकती है।
BJP का लक्ष्य : मॉनसून सत्र में परिसीमन बिल पास करना
बीजेपी की पूरी कोशिश है कि अगले सत्र में ही परिसीमन वाला बिल पास करवा लिया जाए और 2029 के चुनाव से पहले विपक्ष के सामने एक नई तरह की चुनौती पेश की जाए।
ऐसे में अब बीजेपी का निशाना वे दल हैं जो कमजोर स्थिति में हैं और उन्हें तोड़ने में ज्यादा मेहनत नहीं करनी होगी।
संख्या बल सारांश : DMK + TMC = 51 सांसद
| सदन | TMC | DMK | कुल |
|---|---|---|---|
| राज्यसभा | 13 | 8 | 21 |
| लोकसभा | 29 | 22 | 51 |
| कुल मिलाकर | 42 | 30 | 72 |
निष्कर्ष
TMC की टूट और DMK से अलगाव के बाद संसद में मोदी सरकार बंपर बहुमत हासिल कर सकती है।
मुख्य तथ्य
| पहलू | विवरण |
|---|---|
| दो तिहाई जरूरत | 362 सांसद |
| एनडीए कुल | 293 सांसद |
| कम पड़े | 64 सांसद |
| DMK + TMC | 51 सांसद (लोकसभा) |
| राज्यसभा | 21 सांसद |
| AAP टूट | 7/10 सांसद BJP में |
| लक्ष्य | मॉनसून सत्र में परिसीमन बिल |
| 2029 चुनाव | विपक्ष के सामने नई चुनौती |
BJP की रणनीति:
- DMK को साधना
- TMC में टूट लाना
- कमजोर दलों को तोड़ना
हर टूट से BJP को फायदा हुआ है। शिवसेना, NCP, BJD में टूट का फायदा मिल चुका है। अगले मॉनसून सत्र में परिसीमन बिल पास करने की पूरी कोशिश है।
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