भारत-रूस की सबसे बड़ी एयरक्राफ्ट डील – भारत-रूस के बीच 200 सुखोई SJ-100 विमानों की डील हो सकती है। HAL और UAC ने MoU पर साइन किया, 3 साल में भारत में प्रोडक्शन शुरू, 20-40 विमान प्रति वर्ष….


भारत-रूस के बीच होने जा रही सबसे बड़ी एयरक्राफ्ट डील

रूस की सरकारी विमानन कंपनी UAC (यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन) के प्रमुख वादिम बडेखा ने एक इंटरव्यू में खुलासा किया है कि भारतीय एयरलाइंस ने रूस के दो खास पैसेंजर विमानों Il-114-300 और SJ-100 (सुपरजेट) को खरीदने में गहरी दिलचस्पी दिखाई है।

भारत की तरफ से लगभग 100 से 200 विमानों की मांग आ सकती है। इससे पहले बडेखा ने पत्रकारों से बात करते हुए बताया था कि भारत में पहले सुपरजेट विमान का उत्पादन तीन साल में शुरू हो सकता है।


भारत में सुपरजेट्स का उत्पादन

बडेखा ने भारत में सुपरजेट्स के उत्पादन की दर को 20-40 यूनिट प्रति वर्ष बताते हुए इसे एक अच्छी गति कहा था।

कुल मिलाकर उन्होंने भारतीय और आस-पास के बाजारों की क्षमता का अनुमान 200-300 विमानों का लगाया।

इस डील की सबसे खास बात:
ये विमान सिर्फ रूस से खरीदे नहीं जाएंगे बल्कि भारत में ही बनाए जाएंगे

इसको लेकर भारत की सरकारी कंपनी HAL और रूस की UAC के बीच इसके लिए एक समझौता (MoU) पहले ही हो चुका है।


रूस-भारत के बीच सबसे बड़ी एयरक्राफ्ट डील

योजना:
अगले 3 सालों के भीतर भारत में ही इन ‘सुपरजेट’ विमानों का प्रोडक्शन शुरू हो सकता है।

लक्ष्य:
शुरुआत में भारत में हर साल 20 से 40 विमान बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

एक्सपर्ट्स का मानना:
भारत और उसके आसपास के पड़ोसी देशों के मार्केट को मिलाकर ऐसे 200 से 300 विमानों की जरूरत पड़ेगी।

भारत के सिविल एविएशन क्षेत्र की आवश्यकता:

  • अगले 10 वर्षों में यात्रियों की बढ़ती मांग के बीच अपने एयरक्राफ्ट बेड़े का विस्तार करना होगा
  • करीब 2200 से ज्यादा नए कमर्शियल विमानों की आवश्यकता होने का अनुमान है

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भारत-रूस की सबसे बड़ी एयरक्राफ्ट डील
भारत-रूस की सबसे बड़ी एयरक्राफ्ट डील

छोटे और मध्यम दूरी के पैसेंजर विमान

यह दोनों विमान मुख्य रूप से छोटे और मध्यम दूरी के पैसेंजर विमान हैं जो भारत के छोटे शहरों को जोड़ने जैसे उड़ान स्कीम के तहत बहुत काम आएंगे।

विमानप्रकारक्षमताविशेषता
SJ-100 (Superjet)आधुनिक विमान80-100 यात्री मध्यम दूरी
Il-114-300टर्बोप्रॉप (पंखे वाला)कम दूरी छोटे रनवे वाले एयरपोर्ट्स के लिए बेस्ट

भारतीय एयरलाइंस की वर्तमान स्थिति

अभी भारतीय एयरलाइंस ज्यादातर अमेरिकी कंपनी बोइंग या यूरोपीय कंपनी एयरबस पर निर्भर हैं।

इन पर विमानों की डिलीवरी के लिए लंबा वेटिंग पीरियड चल रहा है।

रूस के साथ इस पार्टनरशिप से:
भारत को एक मजबूत विकल्प मिल सकेगा।


ऐतिहासिक MoU

पिछले साल 27 अक्टूबर को मॉस्को में किया गया वो ऐतिहासिक समझौता भारत में सिविल एयरलाइनर के घरेलू निर्माण का रास्ता खोलेगा।

HAL ने X पर इस समझौते की जानकारी शेयर करते हुए बताया:

“HAL और पब्लिक जॉइंट स्टॉक कंपनी यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन (PJSC-UAC) रूस ने 27 अक्टूबर 2025 को रूस के मॉस्को में सिविल कम्यूटर एयरक्राफ्ट SJ-100 के उत्पादन के लिए एक MoU पर साइन किए।”


भारत में पहली बार पूरी तरह से यात्री विमान का निर्माण

यह शायद पहली बार होगा जब भारत में पूरी तरह से एक यात्री विमान का निर्माण किया जाएगा।

भारत में इससे पहले ऐसा प्रोजेक्ट:
HAL का AVRO HS748 का उत्पादन था जो 1961 में शुरू हुआ था और 1988 में खत्म हो गया था।

  • HAL को लाइसेंस के तहत HS 748 बनाने की अनुमति मिली थी
  • जिससे वह 89 विमान बना सका
  • इनमें से 72 विमान भारतीय वायु सेना को और 17 विमान इंडियन एयरलाइंस को दिए गए थे

मुख्य बिंदुओं में सारांश

पहलूविवरण
विमानSJ-100 (सुपरजेट) और Il-114-300
मांग100-200 विमान
बाजार क्षमता200-300 विमान (भारत + पड़ोसी)
उत्पादन स्थानभारत में ही
प्रोडक्शन शुरूअगले 3 सालों में [
वार्षिक लक्ष्य20-40 विमान प्रति वर्ष
कंपनियांHAL (भारत) और UAC (रूस)
MoU तिथि27 अक्टूबर 2025, मॉस्को
SJ-100 क्षमता80-100 यात्री
Il-114-300टर्बोप्रॉप, छोटे रनवे के लिए

निष्कर्ष

भारत-रूस के बीच 200 सुखोई SJ-100 विमानों की डील हो सकती है। HAL और UAC ने MoU पर साइन किया, 3 साल में भारत में प्रोडक्शन शुरू, 20-40 विमान प्रति वर्ष

मुख्य तथ्य

पहलूविवरण
दिलचस्पीभारतीय एयरलाइंस ने दिखाई
मांग100-200 विमान
उत्पादनभारत में ही, 3 साल में शुरू
विकल्पबोइंग/एयरबस के बाद मजबूत विकल्प
इतिहासपहली बार पूरी तरह विमान निर्माण
पिछला प्रोजेक्टAVRO HS748 (1961-1988), 89 विमान

यह ऐतिहासिक समझौता भारत के सिविल एविएशन क्षेत्र को घरेलू निर्माण का रास्ता खोलेगा। भारत को बोइंग और एयरबस की लंबी वेटिंग से छुटकारा मिलेगा।

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