ओमान तट के पास भारतीय झंडे वाले जहाज पर मिसाइल अटैक – भारत ने ओमान के तट के पास भारतीय ध्वज वाले एक कमर्शियल जहाज पर हुए हमले की तीखी आलोचना की है। सरकार ने इस घटना को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर नागरिक जहाजों को निशाना बनाना पूरी तरह अस्वीकार्य है।


क्या हुआ — पूरी घटना

यह हमला 13 और 14 मई की दरम्यानी रात ‘हाजी अली’ नामक जहाज पर हुआ, जो ओमान के तट के पास समुद्री मार्ग से गुजर रहा था।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में भारत के जहाज पर हमला हुआ है। जहाज को डूबते देख उस पर सवार कुल 14 सदस्यों ने तुरंत टाइम सिग्नल का इस्तेमाल करते हुए लाइफबोट्स की मदद ली और अपनी जान बचाई।

जहाज पर मौजूद सभी भारतीय क्रू सदस्य सुरक्षित हैं। उन्हें बचाने में सहयोग के लिए ओमान सरकार का धन्यवाद किया गया है।


भारत का कड़ा संदेश — MEA ने क्या कहा?

विदेश मंत्रालय ने इस घटना की कड़ी निंदा की है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि ओमान तट के पास भारतीय ध्वज वाले जहाज पर हमला पूरी तरह अस्वीकार्य है। भारत ने कहा कि लगातार कमर्शियल जहाजों और नागरिक नाविकों को निशाना बनाया जाना बेहद गंभीर मामला है।

Ministry of External Affairs India ने गुरुवार 14 मई 2026 को कहा :

  • व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाना पूरी तरह अस्वीकार्य है
  • निर्दोष नाविकों की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता
  • समुद्री व्यापार में बाधा डालना वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए खतरा है

घटना के बाद भारतीय विदेश मंत्रालय ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए समुद्री सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की। मंत्रालय ने कहा कि लगातार व्यापारिक जहाजों और नागरिक नाविकों पर बढ़ते हमले वैश्विक समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बनते जा रहे हैं।

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ओमान तट के पास भारतीय झंडे वाले जहाज पर मिसाइल अटैक
ओमान तट के पास भारतीय झंडे वाले जहाज पर मिसाइल अटैक

पहले भी हो चुके हैं भारतीय जहाजों पर हमले

‘हाजी अली’ पर यह हमला इकलौता नहीं है।

इस संकट में भारतीय नाविक पहले भी निशाना बन चुके हैं। 1 मार्च 2026 को ओमान के खसाब के पास तेल टैंकर ‘स्काईलाइट’ पर हुए हमले में दो भारतीय चालक दल के सदस्यों की मौत हो गई थी, जबकि तीन अन्य घायल हुए थे। इसके अलावा ‘MKD VYOM’ और ‘Ayeh’ नामक जहाजों पर हुए हमलों में भी भारतीय नाविक प्रभावित हुए थे।

इससे पहले भारत का जहाज ‘अल फैज नूर सुलेमानी-1’ आठ मई 2026 की रात को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अमेरिका-ईरान के बीच हुई गोलीबारी में फंस गया था, इस दौरान इस जहाज पर हमला हुआ था और जहाज समंदर में डूब गया। यह जहाज दुबई से यमन के मुक्काला जा रहा था।


संकट की जड़ — क्यों हो रहे हैं ये हमले?

28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ शुरू किए गए हवाई हमलों और ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत के बाद से पूरे पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर पहुंच गया है।

इसके जवाब में ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों को चेतावनी दी थी। इसके बाद कई व्यापारिक जहाजों पर हमले की घटनाएं सामने आईं।

अमेरिका और इजराइल की संयुक्त सैन्य शक्ति 37 दिनों तक ईरान पर बरसी, लेकिन न तो तेहरान झुका और न ही उसकी राजनीतिक संरचना टूटी।


भारत के लिए यह क्यों इतना गंभीर है?

भारत के समुद्री व्यापार का 95% हिस्सा समुद्री रास्तों से होता है। होर्मुज और ओमान की खाड़ी वह नाजुक गला है जहां से:

  • भारत का 85% कच्चा तेल आता है
  • LPG की 60% से ज्यादा आपूर्ति होती है
  • खाद्य तेल, उर्वरक और अन्य आयात भी इसी रास्ते

जब भारतीय झंडे वाले जहाज को निशाना बनाया जाता है, तो यह सिर्फ एक जहाज का नुकसान नहीं — यह भारत की संप्रभुता और उसके व्यापारिक हितों पर सीधा हमला है।


भारत ने पहले भी लिया है एक्शन

इससे पहले जब 2023-24 में लाल सागर में हूती विद्रोहियों ने भारतीय जहाजों पर हमले किए थे, तब भारतीय नौसेना ने INS विशाखापट्नम और अन्य युद्धपोत तैनात किए थे। अब होर्मुज के पास जब भारतीय जहाज खतरे में हैं, तो भारत के सामने कुछ विकल्प हैं:

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निष्कर्ष

ओमान तट पर ‘हाजी अली’ पर हुआ हमला एक और चेतावनी है — मिडिल ईस्ट की जंग की लपटें भारत के व्यापारी जहाजों तक पहुंच रही हैं। भारत ने सख्त भाषा में विरोध जताया है, लेकिन कूटनीतिक शब्दों से परे अब नौसैनिक और रणनीतिक जवाब की भी जरूरत है।

व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाना पूरी तरह अस्वीकार्य है — निर्दोष नाविकों की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता।

यह सिर्फ एक जहाज की कहानी नहीं। यह उन हजारों भारतीय नाविकों की कहानी है जो देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए हर रोज खतरनाक पानी में जान जोखिम में डालते हैं।

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