नासिक TCS मामला – महाराष्ट्र के नासिक में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के BPO में हिंदू महिलाओं के कथित यौन शोषण और जबरन धर्मांतरण का मामला दिन-ब-दिन और गंभीर होता जा रहा है। जांच में एक के बाद एक चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। ताजा जानकारी के मुताबिक, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) से बड़ा सुराग मिला है।

CDR से क्या खुला

पुलिस जांच में सामने आया है कि इस मामले में FIR दर्ज होने के कुछ ही घंटों के भीतर मुख्य आरोपी निदा खान ने मुंब्रा, नासिक और भिवंडी में कई जगहों पर फोन कर संपर्क किया था। पुलिस अब इन संपर्कों के जरिए पूरे नेटवर्क तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।

जांचकर्ताओं को संदेह है कि ये फोन कॉल्स सबूत छिपाने या सहयोगियों को सतर्क करने के इरादे से की गई होंगी। पुलिस अब इन सभी कॉल्स के पीछे की वजह जानने के लिए गहन पड़ताल कर रही है।

इतना ही नहीं, CDR से यह भी पता चला है कि TCS की नौकरी छोड़ने के बाद भी निदा खान इस मामले के अन्य आरोपियों के लगातार संपर्क में थी। मोबाइल कॉलिंग डिटेल्स के मुताबिक वह लगातार आरोपियों से बातचीत कर रही थी, जिससे यह संदेह और पक्का हो गया है कि कंपनी में धर्मांतरण की बड़ी साजिश रची जा रही थी।

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दानिश शेख का ‘डिजिटल किला’ टूटा

मामले के मुख्य आरोपी दानिश शेख का मोबाइल फोन नासिक पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया था। उसने अपने डिवाइस में सुरक्षा की ऐसी पुख्ता दीवार खड़ी कर रखी थी कि सामान्य फोरेंसिक तरीके भी नाकाम साबित हो रहे थे।

फोरेंसिक जांच में सामने आया कि दानिश ने अपने मोबाइल की हर एक एप्लीकेशन और फाइल के लिए अलग-अलग जटिल पासवर्ड सेट किए थे। साथ ही हाई-एंड एन्क्रिप्शन के साथ फेस आईडी सुरक्षा भी एक्टिव थी। बिना बायोमेट्रिक अनुमति के डेटा निकालना लगभग नामुमकिन हो गया था।

SIT चीफ और असिस्टेंट पुलिस कमिश्नर संदीप मिटके ने कोर्ट से विशेष अनुमति मांगी। कोर्ट के आदेश पर दानिश को 24 अप्रैल को डिंडोरी रोड स्थित फोरेंसिक लैब ले जाया गया, जहां कानूनी प्रक्रियाओं के जरिए उसकी असली फेस आईडी का इस्तेमाल करके मोबाइल सफलतापूर्वक अनलॉक कर लिया गया। अब मोबाइल से WhatsApp चैट, ईमेल, फोटो और वॉयस रिकॉर्डिंग का विश्लेषण शुरू हो चुका है।


78 संदिग्ध कॉल रिकॉर्ड और चैट बरामद

जांच में पुलिस अधिकारियों को आरोपियों के बीच हुए लगभग 78 संदिग्ध कॉल रिकॉर्ड, ईमेल और चैट बरामद हुई हैं। साथ ही संभावित वित्तीय लेन-देन के भी सबूत मिले हैं।

SIT अब उन महत्वपूर्ण फोन कॉल्स की भी पड़ताल कर रही है जो गिरफ्तारी से कुछ घंटों पहले या दिनों के दौरान की गई थीं। ये कॉल्स मामले की तह तक पहुंचने और इसमें शामिल अन्य लोगों की पहचान करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।


कैसे था पूरा षड्यंत्र

जांच में सामने आया है कि आरोपी TCS की ट्रेनिंग टीम का हिस्सा थे और नए कर्मचारियों की पूरी जानकारी उनके पास रहती थी। वे खास तौर पर उन लोगों को टारगेट बनाते थे जो:

  • आर्थिक रूप से कमजोर हों
  • पारिवारिक समस्याओं से जूझ रहे हों
  • पैसों की जरूरत में हों

जांच में एक WhatsApp ग्रुप का भी खुलासा हुआ है, जिसमें आरोपी टारगेट को लेकर चर्चा करते थे। इस ग्रुप में धार्मिक मुद्दों और कंपनी की आंतरिक राजनीति पर भी बातचीत होती थी।


निदा खान पर गंभीर आरोप

HR मैनेजर निदा खान को इस पूरे मामले का ‘मास्टरमाइंड’ बताया जा रहा है। पुलिस के अनुसार:

  • उन्होंने पीड़िताओं से बार-बार कहा कि इस मामले को यहीं खत्म कर दें
  • POSH (यौन उत्पीड़न रोकथाम) कमेटी का सदस्य होने के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया
  • पीड़िता को बुर्का और इस्लाम से जुड़ी किताबें दी गईं — ये जब्त की जा चुकी हैं
  • पीड़िता के मोबाइल में इस्लामिक ऐप्स और YouTube व Instagram के धार्मिक लिंक भेजे गए
  • एक पीड़िता को उसका नाम बदलकर ‘हानिया’ रखने के लिए दबाव डाला गया
  • पीड़िता के सर्टिफिकेट तक अपने पास दबा रखे थे

मलेशिया कनेक्शन — सबसे चौंकाने वाला खुलासा

जांच में सबसे गंभीर मोड़ तब आया जब मलेशिया कनेक्शन सामने आया। जांच में खुलासा हुआ कि पीड़िता को नौकरी का झांसा देकर मलेशिया भेजने और वहां ‘इमरान’ नाम के किसी व्यक्ति के लिए काम करवाने की साजिश रची गई थी। पुलिस अब उस ‘इमरान’ की पहचान करने में जुटी है और यह भी पता लगा रही है कि क्या इस पूरे मामले के पीछे कोई अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी या धर्मांतरण रैकेट काम कर रहा था।


अग्रिम जमानत पर फैसला 2 मई को

निदा खान के वकील राहुल कासलीवाल ने कोर्ट में दलील दी कि महाराष्ट्र में धर्म बदलने पर कोई कानून नहीं है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि एक ही कंपनी में एक जैसी घटनाओं के लिए 9 अलग-अलग केस दर्ज करने की जरूरत नहीं थी। हालांकि कोर्ट ने आरोपी को सुरक्षा नहीं दी है, इसलिए SIT उन्हें कभी भी गिरफ्तार कर सकती है। अग्रिम जमानत याचिका पर अगली सुनवाई 2 मई को है।


अब तक के प्रमुख आरोपी और आरोप

अब तक 7 संदिग्ध पुलिस हिरासत में हैं:

  • दानिश शेख (मुख्य आरोपी, निदा खान का भाई)
  • आसिफ अंसारी
  • शफी शेख
  • शाहरुख कुरैशी
  • रजा मेमन
  • तौसीफ बिलाल अत्तार

7 महिला पीड़िताओं और एक पुरुष ने अपनी शिकायतें दर्ज कराई हैं। सभी आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं — 75, 79, 299, 302 और 3(5) — के तहत मामला दर्ज है।


निष्कर्ष

नासिक TCS मामला एक साधारण कार्यस्थल विवाद नहीं रह गया है। CDR रिपोर्ट, फोरेंसिक डेटा, 78 संदिग्ध चैट और मलेशिया कनेक्शन — ये सब मिलकर एक सुनियोजित और बड़े षड्यंत्र की ओर इशारा कर रहे हैं। SIT की जांच अब निर्णायक मोड़ पर है और आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे होने की संभावना है।

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